सुपौल में स्थायी लोक अदालत स्थापना की कवायद तेज

सुपौल वासियों को बहुत जल्द स्थायी लोक अदालत की सुविधाएं मिलने लगेगी. इसकी शुरूआत व्यवहार न्यायालय के पुराने भवन में होगी.
सुपौल. सुपौल वासियों को बहुत जल्द स्थायी लोक अदालत की सुविधाएं मिलने लगेगी. इसकी शुरूआत व्यवहार न्यायालय के पुराने भवन में होगी. जिसकी तैयारी प्रारंभ कर दी गयी है. यह अदालत जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) के अंतर्गत काम करेगी. स्थायी लोक अदालत की स्थापना के बाद पीड़ितों को त्वरित न्याय मिल सकेगा. जानकारी देते जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव अफजल आलम ने बताया कि स्थायी लोक अदालत के सदस्य के रूप में डॉ अरविंद कुमार और लक्ष्मण कुमार ने योगदान दिया है. इसके अध्यक्ष जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनंत सिंह हैं. उन्होंने बताया कि स्थायी लोक अदालत का गठन जिला विधिक सेवा प्राधिकार अधिनियम 1987 की धारा 22 (बी) के अंतर्गत किया जाना है. इसका उद्देश्य जन-उपयोगी सेवाओं से जुड़े विवादों का तेज, सरल और नि:शुल्क समाधान करना है. लोक अदालत में वायु, सड़क, जल, यात्रियों के परिवहन सेवा, डाक, टेलीफोन, ऊर्जा, बिजली, शिक्षा, लोक स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवाएं, रक्षा प्रणाली, अस्पताल, बैंकिंग, डिस्पेंसरी सेवा, बीमा सेवाएं, भू-संपदा विवाद इसके अलावा केंद्र या राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित अन्य सेवाएं भी इसके दायरे में आयेंगी. जिसकी सुनवाई की जायेगी. श्री आलम ने बताया कि लोक अदालत आमतौर पर सुलहनीय मामलों का निष्पादन करती है, लेकिन स्थायी लोक अदालत को धारा 22 बी (1) के तहत सुलहकारी के साथ-साथ निर्णयात्मक अधिकार भी दिए गए हैं. कोई भी नागरिक अपनी शिकायत का नि:शुल्क आवेदन यहां कर सकता है. एक करोड़ रुपये तक के विवादित संपत्ति मामलों की सुनवाई स्थायी लोक अदालत में की जा सकती है. बताया कि फिलहाल जिले में लोगों को स्थायी लोक अदालत की स्थापना व इससे मिलने वाले लाभ के बारे में जागरूक किया जा रहा है. बताया कि इस दौरान विवाद से संबंधी यदि कोई आवेदन आता है तो उसे विधिवत रिसीव किया जायेगा. उन्होंने कहा कि स्थायी लोक अदालत की स्थापना के दूरगामी परिणाम सामने आयेगें.
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