मकर संक्रांति की पूजा कल ढाई दशक बाद बनेगा महायोग

सुपौल : कहते हैं कि सूर्य साक्षात देव का स्वरूप है. अपनी ऊष्मीय ऊर्जा और प्रकाश के कारण सूर्य की पूजा आदिकाल से ही होती रही है. विशेष तौर पर हिंदू संस्कृति में सूर्योपासना का काफी महत्व बताया गया है. मकर संक्रांति का पर्व भी इसी का एक हिस्सा है. यह पर्व माघ मास के […]
सुपौल : कहते हैं कि सूर्य साक्षात देव का स्वरूप है. अपनी ऊष्मीय ऊर्जा और प्रकाश के कारण सूर्य की पूजा आदिकाल से ही होती रही है. विशेष तौर पर हिंदू संस्कृति में सूर्योपासना का काफी महत्व बताया गया है. मकर संक्रांति का पर्व भी इसी का एक हिस्सा है. यह पर्व माघ मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा में मनाया जाता है. हिंदू मान्यताओं में पृथ्वी सूर्य के चारों ओर एक चक्कर लगाती है, उस अवधि को सौर वर्ष कहते हैं. पृथ्वी का गोलाई में सूर्य के चारों ओर घूमना क्रांति चक्र कहलाता है. इसी परिधि को 12 भागों में बांट कर 12 राशियां बनी हैं. जिनका नामकरण भी 12 नक्षत्रों के अनुरूप किया गया है.
ज्योतिष में पृथ्वी का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश संक्रांति कहलाता है. मकर राशि में पृथ्वी के प्रवेश के अवसर पर ही मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है. इस साल विशेष यह है कि करीब ढाई दशक बाद 14 जनवरी को मकर संक्रांति के मौके पर सर्वाथ सिद्धि और अमृत सिद्धि का योग बन रहा है. हालांकि ऐसे ही कुछ संयोग वर्ष 2013 में भी बने थे, लेकिन इस बार सूर्य का योग काफी प्रबल है. इस बार चंद्रमा का कर्क राशि में अश्लेषा नक्षत्र के पड़ने से प्रीति योग व मानस योग बन रहा है. लिहाजा यह पर्व इस साल संपत्ति का द्योतक माना जा रहा है.
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