मिट्टी के बरतन व ईख की रही मांग

Updated at :05 Nov 2016 2:10 AM
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मिट्टी के बरतन व ईख की रही मांग

आस्था. नहाय-खाय के साथ प्रारंभ हुआ चार दिवसीय महापर्व शुक्रवार से शुरू हुए महापर्व षष्ठी के पहले दिन हजारों व्रती अपने आसपास की नदियों, तालाब व कुएं के पानी से स्नान करने के बाद चावल, चना दाल और कद्दू की सब्जी पकाया और उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया. सुपौल : नहाय-खाय के साथ […]

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आस्था. नहाय-खाय के साथ प्रारंभ हुआ चार दिवसीय महापर्व

शुक्रवार से शुरू हुए महापर्व षष्ठी के पहले दिन हजारों व्रती अपने आसपास की नदियों, तालाब व कुएं के पानी से स्नान करने के बाद चावल, चना दाल और कद्दू की सब्जी पकाया और उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया.
सुपौल : नहाय-खाय के साथ ही चार दिवसीय महापर्व छठ पूजा शुरू हो गया है. शुक्रवार से शुरू हुए महापर्व षष्ठी के पहले दिन हजारों व्रती अपने आसपास की नदियों, तालाब व कुएं के पानी से स्नान करने के बाद चावल, चना दाल और कद्दू की सब्जी पकाया और उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया. नहाय-खाय के बाद छठ व्रती अरवा भोजन, सेंधा नमक ही प्रयोग करेंगे. पर्व के समाप्ति तक लहसुन, प्याज वर्जित रहेगा. नियम निष्ठा व आस्था के इस महापर्व को लेकर शहरी व ग्रामीण इलाकों में उत्साह है.
महापर्व के दूसरे दिन शनिवार को खरना का आयोजन किया जायेगा. जिसमें दिनभर उपवास के बाद व्रतियों द्वारा संध्या काल में पूजा-अर्चना करने के बाद भोजन ग्रहण किया जाता है. इसके साथ ही छठ पूजा का करीब 36 घंटे का निर्जला उपवास प्रारंभ हो जाता है. उपवास के क्रम में ही पर्व के छठे दिन रविवार की संध्या व सोमवार के सुबह सूर्य देव को अर्घ्य देने के उपरांत व्रती भोजन ग्रहण करेंगे.
खरना की तैयारी में जुटीं छठ व्रती
खरना को लेकर घरों में व्रतियों द्वारा तैयारी प्रारंभ कर दी गयी है. छठ मइया के प्रसाद के लिए गेहूं को बारिकी से साफ-सुथरा कर उसे धूप में सुखाया जा रहा है. वहीं ठेकुआ, लड‍्डू जैसे अन्य पकवान प्रसाद के लिए तैयार किये जा रहे हैं. मालूम हो कि छठ पूजा के प्रसाद के लिए सारी सामग्री घर में ही बड़ी पवित्रता के साथ तैयार किया जाता है. जिसमें घी व गुड़ का विशेष महत्व होता है.
बाजार में उमड़ी खरीदारों की भीड़
छठ पूजा को लेकर बाजार में फल, कंद व पूजन सामग्रियों की दुकानें सज चुकी है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजन-सामग्री के साथ-साथ नारियल, सेब, केला, निंबू, ईख, टाब व अन्य जरूरी खरीद रहे हैं. पर्व के करीब आते ही बाजार में भीड़ बढ़ती जा रही है. दूसरी तरफ नदी के तटों व पोखर की साफ-सफाई कर लाइट और टेंट लगाने का काम भी युद्ध स्तर पर किया जा रहा है. शहर के सभी पोखरों को भी आकर्षक तरीकें से सजाने के प्रयास में श्रद्धालु जुटें हैं.
कंद-मूल की भी हो रही खरीदारी
छठ पर्व को लेकर बाजार में फलों के अलावा मिट्टी के बरतन व कंद-मूलों की भी दुकानें सज गयी है, जहां ग्राहकों द्वारा पूजा में उपयोग होने वाले अदरख, मूली, सुथनी, हल्दी, बेंगन, पानी फल आदि की खरीदारी की जा रही है. गौरतलब है कि छठ पूजा को प्रकृति पूजा का भी स्वरूप माना जाता है. यही वजह है कि इस महापर्व के मौके पर व्रतियों द्वारा छठी मइया को प्रसाद स्वरूप जमीन व पानी में उपजने वाले फल के साथ कंद-मूल भी चढ़ाये जाते हैं.
छठ के मौके पर ईख बेचते हुए दुकानदार.
खरना को लेकर बाजार में बढ़ी दूध की मांग
शनिवार को होने वाले खरना का इस महापर्व में विशेष महत्व है. खरना का प्रसाद ग्रहण करने के बाद से ही व्रती लगातार उपवास में रहेंगे. खरना के प्रसाद में गंगाजल, दूध, गुड़ व अरवा चावल के खीर का विशेष महत्व है. खरना पूजा में खीर के लिए दूध की मांग बढ़ गयी है. स्थानीय स्तर पर आने वाले दूध के अलावा ग्राहकों की मांग को देखते हुए विभिन्न कंपनियों के पैकट बंद दूध की डिमांड बढ़ गयी है. जानकारी के अनुसार पर्व को देखते हुए दूध विक्रेताओं ने 50 हजार लीटर से अधिक दूध की एडवांस बुकिंग की है.
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