जो करेगा क्षेत्र का विकास, उसे ही जनता का साथ

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सुपौल : लोकतंत्र में चुनाव भी किसी त्योहार से कम नहीं होता. यह दीगर बात है कि इस महापर्व का आयोजन पांच साल पर किया जाता है. आजादी के बाद से ही लोकतंत्र के महापर्व का आयोजन होता रहा है. प्रत्येक वोटर का विचार अलग – अलग होता है. ऐसे में जन प्रतिनिधियों को समानता […]

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सुपौल : लोकतंत्र में चुनाव भी किसी त्योहार से कम नहीं होता. यह दीगर बात है कि इस महापर्व का आयोजन पांच साल पर किया जाता है. आजादी के बाद से ही लोकतंत्र के महापर्व का आयोजन होता रहा है. प्रत्येक वोटर का विचार अलग – अलग होता है. ऐसे में जन प्रतिनिधियों को समानता का भाव अपना कर मतदाता के विकास की फिक्र करनी चाहिए.

आज टीवी, मोबाइल, इंटरनेट, कंप्यूटर सहित अन्य उपलब्ध अत्याधुनिक सुविधा के कारण संपूर्ण देश की जानकारी जानने में कुछ ही क्षण लगते हैं. वर्तमान हालात में मतदाता अधिकांश राज नेताओं द्वारा दिये जा रहे उल जुलुल वक्तव्य सुन कर ऊब रहे हैं. राज नेताओं द्वारा जिस तरीके से बयानबाजी की जा रही है.

उससे सिर्फ व सिर्फ सत्ता हासिल करने की लोलुपता ही जाहिर हो रही है. मतदाता हैरान हैं कि संविधान की रक्षा व देश के विकास को लेकर महापुरुषों द्वारा लोकतंत्र की स्थापना की गयी थी. लेकिन राज नेता के बदलते स्वरूप से मतदाता अपने आपको उपेक्षित महसूस कर रहे हैं. इसका असर मतदान पर देखा जा रहा है और शत प्रतिशत मतदान कराने के लिए सरकारी कोष से करोड़ों की राशि जागरूकता के नाम पर खर्च कराया जा रहा है.

बावजूद शत-प्रतिशत मतदान संभव नहीं हो पा रहा. आधुनिक दौर में चुनाव का स्वरूप बदलता जा रहा है. चुनाव से पूर्व पार्टियों द्वारा अलग – अलग एजेंडा तैयार किया जाता है. लेकिन चुनाव के दौरान सभी एजेंडों को ताक रख एक दूसरे के सम्मान पर चोट किया जा रहा है. जबकि लोकतंत्र में भावना के साथ खिलबाड़ करने का अधिकार नहीं है. इसके लिए स्थानीय जन प्रतिनिधि जिम्मेवार हैं या फिर उन लोगों के द्वारा गठित सरकार या फिर कोई और.

सूबे में किसकी सरकार बननी चाहिए और स्थानीय जन प्रतिनिधि कैसा हो. इसी को लेकर प्रभात खबर द्वारा की गयी राय शुमारी में वोटरों ने अपना विचार अलग – अलग तरीके से व्यक्त किया. महेश कुमार चौधरी ने कहा कि जिस तरह हमारा संविधान लचीला व सरल है. ठीक उसी प्रकार सरकार का रवैया भी होना चाहिए, ताकि लोकतंत्र का अस्तित्व बरकरार रहे और सबों को समानता का अधिकार मिले.

रोशन कुमार ने कहा कि आरक्षण के मुद्दे को लेकर जनप्रतिनिधि सहित जनता परेशान हो रही है. सरकार को जातिगत आरक्षण की बात नहीं करके समाज के सभी वर्गो के दबे कुचले लोगों को उपर उठाने के बारे में सोचना चाहिए. परशुराम पंडित का मानना है कि कोसी क्षेत्र के लिए वह सरकार अच्छी होगी, जो जन प्रतिनिधि सहित गैर राजनीतिक लोगों के सहयोग से एजेंडा तैयार कर प्राथमिकता के आधार पर कोसी के पिछड़े क्षेत्र का विकास करे. साथ ही ससमय सभी कार्यों की जानकारी लेते रहे.तेज नारायण पंडित ने कहा कि कोसी के इलाके में रोजगार उपलब्ध कराये जाने संबंधी कार्यों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए,

ताकि बाहरी प्रदेशों की ओर पलायन कर रहे लोगों को रोजगार उपलब्ध हो सके. राजेश कुमार ने कहा कि लोकतंत्र में सभी स्वतंत्र है. वोटरों को अपनी स्वेच्छा से मत देने का अधिकार प्राप्त है. जन प्रतिनिधि को जातिवाद से उपर उठ कर राजनीति करनी चाहिए.मनोज कुमार कहते हैं कि प्रजातंत्र में सरकार की भूमिका अहम होती है.

ऐसे में जन प्रतिनिधियों को नैतिकता का परिचय देना आवश्यक है. ताकि समाज के सभी वर्ग अपने आपको उपेक्षित ना समझे.उमेश कुमार राय ने कहा कि जन प्रतिनिधियों को प्रचार प्रसार के दौरान धार्मिक सहिष्णुता की बात करनी चाहिए. साथ ही उनके कार्यकर्ता द्वारा क्षेत्र के विकास को लेकर बनाये गये एजेंडे पर बल देना चाहिए.

ताकि मतदाताओं में उनके प्रति सहानुभूति का माहौल बन सके.शैलेंद्र कुमार ने कहा कि चुनाव के समय सभी पार्टियां तरह – तरह के विज्ञापन, नुक्कड़- नाटक करा कर वोट बटोर लेती हैं. जनप्रतिनिधि उक्त राशि को विकास कार्य में लगा दें तो वर्तमान राजनीति का स्वरूप बदल एक आदर्श लोकतंत्र का परिचय दे सकते हैं.

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