एक वर्ष में ही जवाब देने लगे पीएसएस के उपकरण
फोटो-01केप्सन-पीएसएस में उपयोग विहीन उपकरणछातापुरमुख्यालय स्थित पीएसएस के निर्माण को एक वर्ष भी नहीं हुआ लेकिन इसमें लगा उपकरण व ब्रेकर जल कर नष्ट हो चुका है. 33 हजार पावर सप्लाई वाले संचरण लाइन बिछाने में भी अनियमितता बरती गयी, जिस कारण इंसुलेटर व डिस बार बार पंक्चर हो रहा है. आपूर्ति बाधित होते ही […]
फोटो-01केप्सन-पीएसएस में उपयोग विहीन उपकरणछातापुरमुख्यालय स्थित पीएसएस के निर्माण को एक वर्ष भी नहीं हुआ लेकिन इसमें लगा उपकरण व ब्रेकर जल कर नष्ट हो चुका है. 33 हजार पावर सप्लाई वाले संचरण लाइन बिछाने में भी अनियमितता बरती गयी, जिस कारण इंसुलेटर व डिस बार बार पंक्चर हो रहा है. आपूर्ति बाधित होते ही विभागीय अधिकारियों द्वारा नित नये बहाने बनाये जाते हैं, लेकिन इसका खामियाजा उपभोक्ताओं को उठाना पड़ता है.बिहार सरकार प्रत्येक गांव तक बिजली पहुंचाने को लेकर गंभीर है और इसके लिए विद्युत उत्पादन से लेकर वितरण तक की व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा रहा है.लेकिन विभाग इसके प्रति गंभीर नहीं है.जिन स्थानों पर बिजली पहुंची भी वहां के उपभोक्ताओं को अनियमित आपूर्ति का शिकार होना पड़ रहा है. अनियमितता की खुल रही पोल निर्माण कंपनी एसपीएमएल द्वारा निर्मित पावर सब स्टेशन के निर्माण को एक वर्ष भी नहीं हुआ है, लेकिन यहां लगाये गये उपकरण अब जवाब देने लगा है.उपभोक्ताओं को फीडर के माध्यम से उर्जा वितरण के निमित्त लगे सभी उपकरण खराब हो चुके हैं. ब्रेकर भी काम नहीं कर रहा. नतीजा है कि 33 हजार पावर को 11 हजार वोल्ट में परिवर्तित करने में पीएसएस में तैनात ऑपरेटर जान जोखिम में डाल कर काम करने को विवश हैं. कंपनी ने विभागीय सांठ-गांठ के तहत निर्माण कार्य को देने के बाद आनन फानन में हैंडओवर भी कर दिया. कार्य व उपकरण के गुणवत्ता की जांच किये बिना ही सुपुर्दगी लिया जाना कई सवालों को जन्म दे रहा है.
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