जिले में 39 डेंगू मरीज मिले, अलर्ट मोड में विभाग

डॉक्टरों की निगरानी में हैं सभी मरीज, सभी की स्थिति फिलहाल स्थिर
डॉक्टरों की निगरानी में हैं सभी मरीज, सभी की स्थिति फिलहाल स्थिर जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों को अलर्ट मोड में रहने का दिया गया है निर्देश सदर अस्पताल में डेंगू मरीजों के लिए अलग वार्ड तैयार सभी पीएचसी में डेंगू जांच किट, दवा और पर्याप्त चिकित्सा संसाधन उपलब्ध फोटो – 01 कैप्सन – वार्ड में लगा मच्छरदानी सुपौल जिले में डेंगू का प्रकोप धीरे-धीरे बढ़ने लगा है. अगस्त में डेंगू के पहले मरीज की पहचान होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अलर्ट मोड में था. अब अक्टूबर के अंत तक मरीजों की संख्या बढ़कर 39 पहुंच गई है. डेंगू के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ आम लोगों की चिंता भी बढ़ा दी है. स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार 30 अक्टूबर तक जिले में कुल 39 डेंगू मरीजों की पुष्टि की गई है. इनमें सदर प्रखंड में सबसे अधिक 20 मरीज, पिपरा प्रखंड में सात, छातापुर में पांच, त्रिवेणीगंज में चार, राघोपुर में दो, और सरायगढ़ में एक मरीज हैं. जिले में अलग-अलग इलाकों में संक्रमण के फैलने की खबरों के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य महकमा पूरी तरह सतर्क हो गया है. जिला वीबीडीसी पदाधिकारी डॉ दीप नारायण राम ने बताया कि जिन मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई है, उन्हें समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई है. डॉक्टरों की विशेष टीम लगातार इनकी निगरानी कर रही है और सभी मरीजों की स्थिति फिलहाल स्थिर बताई जा रही है. उन्होंने कहा कि प्रभावित इलाकों में एंटी-लार्वा अभियान और फॉगिंग कराई जा रही है, ताकि मच्छरों के प्रजनन को रोका जा सके. उधर, सिविल सर्जन डॉ ललन कुमार ठाकुर ने बताया कि जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को सतर्क रहने का निर्देश दिया गया है. उन्होंने कहा सभी पीएचसी में डेंगू जांच किट, दवा और पर्याप्त चिकित्सा संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं. सदर अस्पताल में डेंगू मरीजों के लिए अलग वार्ड तैयार कर रखा गया है. कहा कि डेंगू से बचाव ही सबसे प्रभावी उपाय है, क्योंकि अभी तक इसका कोई विशेष टीका या दवा उपलब्ध नहीं है. लोगों को जागरूक रहना जरूरी है. यदि समय रहते सावधानी बरती जाए तो डेंगू से बचा जा सकता है. डेंगू के लक्षण और प्राथमिक उपचार स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार डेंगू मच्छर एडीज एजिप्टी के काटने से फैलता है, जो प्रायः दिन के समय काटता है. डेंगू के प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, सिर दर्द, बदन दर्द, आंखों के पीछे दर्द, भूख में कमी और त्वचा पर लाल चकत्ते शामिल हैं. कहा कि ऐसे लक्षण दिखाई देने पर मरीज को तुरंत डेंगू जांच करानी चाहिए. उन्होंने बताया कि डेंगू मरीज को पपीते के पत्ते का रस, नारियल पानी और तरल पदार्थ अधिक मात्रा में देना चाहिए. साथ ही पर्याप्त आराम करने और बिना डॉक्टर की सलाह के दवा नहीं लेने की सलाह दी है. प्रभावित क्षेत्रों में अभियान तेज डेंगू के मामलों के बढ़ने के बाद जिले के नगर निकायों और पंचायतों में सफाई अभियान और फॉगिंग कार्यों को तेज कर दिया गया है. स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जलजमाव वाले इलाकों में दवा का छिड़काव और एंटी-लार्वा अभियान चलाया है. वहीं कई जगहों पर पोस्टर, माइकिंग और बैनर के जरिए भी जागरुकता अभियान चलाया जा रहा है. आम लोगों में बढ़ी चिंता और सावधानी स्थानीय स्तर पर मरीजों की पहचान होने के बाद आमलोगों में हल्की दहशत का माहौल है. लोग यह मान रहे हैं कि अगर जल्द ही स्थिति पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो आने वाले दिनों में संक्रमण का दायरा और बढ़ सकता है. बरसात का मौसम होने के कारण जगह-जगह पानी जमा है, जो डेंगू फैलाने वाले मच्छरों के लिए अनुकूल वातावरण बना रहा है. डेंगू और मलेरिया से बचाव के उपाय स्वास्थ्य विभाग ने आम जनता से अपील की है कि वे अपने घर के आसपास पानी जमा नहीं होने दें. कूलर, गमले, टंकी, पुराने बर्तनों या टायर में पानी नहीं ठहरने दें. पूरी बाजू के कपड़े पहनें और शरीर को ढंककर रखें. मच्छरदानी और रिपेलेंट का उपयोग करें. बुखार होने पर तुरंत जांच कराएं और डॉक्टर की सलाह लें. स्वच्छता और सफाई बनाए रखें, ताकि मच्छरों का प्रजनन नहीं हो सके.
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