छातापुर : सरकारी मूल दस्तावेज चोरी कब और कैसे हुई, बताने को तैयार नहीं हैं अधिकारी
Updated at : 28 Feb 2019 12:30 AM (IST)
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संजय कुमार पप्पू, छातापुर : त्रिवेणीगंज एसडीएम के नेतृत्व में गठित विशेष टीम के द्वारा बीते 24 फरवरी को की गयी छापेमारी में व्यापक स्तर पर सरकारी मूल दस्तावेजों की बरामदगी ने भूस्वामियों की चिंता बढ़ा दी है. भूमि से संबंधित अभिलेख, पंजी व अन्य कागजात सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज है. जिनमें शुद्धि पत्र पंजी, औपबंधी […]
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संजय कुमार पप्पू, छातापुर : त्रिवेणीगंज एसडीएम के नेतृत्व में गठित विशेष टीम के द्वारा बीते 24 फरवरी को की गयी छापेमारी में व्यापक स्तर पर सरकारी मूल दस्तावेजों की बरामदगी ने भूस्वामियों की चिंता बढ़ा दी है. भूमि से संबंधित अभिलेख, पंजी व अन्य कागजात सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज है. जिनमें शुद्धि पत्र पंजी, औपबंधी परवाना लैंड सिलिंग, खासमहाल रजिस्टर, कृषि सांख्यिकी पंजी, दाखिल-खारिज के 18 अभिलेख, चकबंदी अभिलेख सहित लगान, फॉर्म व नोटिस फॉर्म आदि शामिल है.
जिसे बड़े ही सुरक्षित और जिम्मेदारी के साथ अंचल कार्यालय व राजस्व कचहरी में रखा जाता है. ताकि भू अभिलेख के स्वामित्व व उसके सबूत के साथ अनावश्यक छेड़छाड़ नहीं हो. परंतु पुलिस द्वारा बनायी गयी जब्ती सूची में छातापुर व पिपरा अंचल ही नहीं बल्कि जिला कार्यालय सुपौल से लेकर अनुमंडल कार्यालय वीरपुर तक के मूल दस्तावेज शामिल हैं.
इससे स्पष्ट है कि सरकारी दफ्तरों खासकर भूमि से जुड़े कार्यालयों में सरकारी दस्तावेज सुरक्षित नहीं है. हालांकि छातापुर सीओ के आदेश पर राजस्व कर्मचारी ने बरामद दस्तावेजों की सूची संलग्न करते थाना में मामला दर्ज करवाया है. जिसमें महम्मदगंज वार्ड संख्या सात निवासी मुरली मनोहर मंडल को नामजद अभियुक्त बनाते हुए उस पर सरकारी दस्तावेजों की चोरी करने संबंधी गंभीर आरोप लगाये गये है.
सरकारी दफ्तरों में सुरक्षित नहीं है दस्तावेज, भू-स्वामियों की बढ़ी चिंता
बताया जाता है कि महम्मदगंज पंचायत स्थित कटही में फर्जी कचहरी लगाकर भूस्वामियों का शोषण करने वाला मुरली मनोहर मंडल के संबंध जिले भर के सरकारी मुलाजिमों से हो सकते हैं. स्वतंत्र एजेंसी द्वारा पारदर्शिता से जांच के बाद इसका खुलासा हो सकता है. बरामद दस्तावेज जिला कार्यालय से लेकर अनुमंडल कार्यालय वीरपुर तक का है.
प्रशासन के द्वारा अब तक की गई कार्रवाई भी इस बात का सबूत दे रहा है. दर्ज प्राथमिकी में स्पष्ट है कि बरामद दस्तावेज संबंधित कार्यालय से चोरी गये है. परंतु चोरी कब हुई कैसे हुई और इसमें किन किन सरकारी कर्मियों की सहभागिता हो सकती है, इस बात का जिक्र नहीं किया गया है. हालांकि इस प्रकार का गंभीर मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खुल गई है.
चोरी कब हुई और कैसे हुई यह जांच का विषय : एसडीएम
एसडीएम त्रिवेणीगंज विनय कुमार सिंह ने पूछने पर बताया कि सीओ छातापुर के द्वारा मामला संज्ञान में दिया गया था. जिसके बाद उनके नेतृत्व में छापेमारी की गयी. सरकारी दस्तावेजों की बरामदगी के बाद मामले को गंभीरता से लिया गया है और आवश्यक कार्रवाई के लिए सीओ को निर्देश दिये गये हैं.
जिला कार्यालय सुपौल, अनुमंडल कार्यालय वीरपुर एवं पिपरा अंचल कार्यालयों को बरामद दस्तावेजों की जानकारी दी जा रही है. ताकि उनके स्तर से भी आवश्यक कार्रवाई की जा सके. बताया कि दस्तावेज सुरक्षित रखने के लिए संबंधितों की जिम्मेवारी तय रहती है, सभी जगहों पर रेकार्ड रूम बना हुआ है और सुरक्षा व्यवस्था भी उपलब्ध है. बावजूद इसके दस्तावेजों की चोरी कब हुई और कैसे हुई यह जांच का विषय है.
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