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नेपाल में भारतीय नोटों की बंदी : व्यापार को झटका, बिचौलियों की ''चांदी'', लोग परेशान

Updated at : 17 Dec 2018 8:42 AM (IST)
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नेपाल में भारतीय नोटों की बंदी : व्यापार को झटका, बिचौलियों की ''चांदी'', लोग परेशान

बिहार के सीमावर्ती क्षेत्रों में व्यापक असर, लोग परेशान सुपौल/जोगबनी/किशनगंज : नेपाल कैबिनेट द्वारा भारतीय बड़े नोट को बंद किये जाने के फैसले के बाद सुपौल, किशनगंज व अररिया जिलों के सीमावर्ती क्षेत्रों में व्यापक असर पड़ा है. नेपाली संसद के इस निर्णय से विशेष कर सीमावर्ती क्षेत्र में व्यापार, स्वास्थ्य व पर्यटन क्षेत्र पर […]

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बिहार के सीमावर्ती क्षेत्रों में व्यापक असर, लोग परेशान
सुपौल/जोगबनी/किशनगंज : नेपाल कैबिनेट द्वारा भारतीय बड़े नोट को बंद किये जाने के फैसले के बाद सुपौल, किशनगंज व अररिया जिलों के सीमावर्ती क्षेत्रों में व्यापक असर पड़ा है. नेपाली संसद के इस निर्णय से विशेष कर सीमावर्ती क्षेत्र में व्यापार, स्वास्थ्य व पर्यटन क्षेत्र पर विशेष असर पड़ने लगा है.
व्यवसाय को झटका लगने की आशंका के बीच बिचौलियों की पूछ बढ़ गयी है. छुट्टा कराने के लिए जहां पहले 10 फीसदी राशि की कटौती की जाती थी, अभी 40 फीसदी तक कटौती की जा रही है. सुपौल जिले की करीब 20 किमी व किशनगंज, अररिया में 30 किमी से अधिक खुली सीमा क्षेत्र है. जहां से दोनों देशों के लोगों का आना-जाना लगा रहता है. जाहिर तौर पर नेपाल में बड़े नोट के बंद हो जाने से अब सुपौल, किशनगंज व अररिया के साथ ही नेपाल के लोग भी इससे प्रभावित हो रहे हैं.
पर्यटन पर भी पड़ेगा बुरा असर
नोटबंदी से नेपाल के पर्यटन क्षेत्र पर भी असर पड़ेगा. भारतीय क्षेत्र के लोग अक्सर नेपाल के पहाड़ी क्षेत्र स्थित इटहरी, धरान, भेडेटार, नमस्ते झरना, चतरा जैसे खुबसूरत पहाड़ियों में भ्रमण के लिए जाते हैं. परंतु भारतीय बड़े नोटों के बंद होने से पहुंचनेवाले सैलानियों को खाने से लेकर रहने तक में परेशानी झेलनी पड़ेगी
भंटाबाड़ी बाजार हुआ सुनसान
आमतौर पर सुपौल के वीरपुर सीमा से सटे नेपाली प्रभाग का भंटाबाड़ी बाजार भारतीय लोगों से गुलजार रहा करता था. जो बड़े नोट पर लगे बंदिश के बाद खाली-खाली सा नजर आने लगा है. सड़क पर वीरानी छा गयी है. भंटाबाड़ी में दुकान कर रहे प्रकाश साह, तेजू व पप्पू लाल दास ने बताया कि जब से नोट पर बंदिश लगी है, तब से बाजार में लगता है जैसे ग्रहण लग गया है. बड़े नोट बंद होने के बाद बहुत कम संख्या में ग्राहक यहां आते हैं.
सुपौल, किशनगंज व अररिया जिलों के सीमावर्ती क्षेत्रों में पर्यटन और स्वास्थ्य पर भी प्रभाव
व्यापार पर पड़ेगा प्रतिकूल असर
व्यापार के दृष्टिकोण से देखे तो इस पर भी व्यापक असर पड़ता दिखाई दे रहा है. भारतीय व्यापारी नेपाल से तेजपत्ता, लौंग, इलाइची, संतरा आदि चीजों को खरीद कर भारत लाते हैं. व्यवसायी भारतीय बाजार में इसे बेच कर अच्छा मुनाफा कमा लेते हैं. इससे सैकड़ों परिवारों का गुजर बसर चलता है. चूंकि कारोबार में भारी भरकम रकम लगता है, ऐसे में अब ये व्यापार भी प्रभावित होना लाजमी है.
लेन-देन की सुविधा भी है कठिन
खास बात यह है कि भारतीय 100 रुपये की कीमत नेपाल में 160 रुपये के करीब आ जाता है. इससे नेपाल में खरीदारी भी आसान होती थी. कहीं भी ये रुपये एक्सचेंज हो जाया करते थे, लेकिन अब भारतीय बड़े नोटों का नेपाल में एक्सचेंज करना टेढ़ी खीर बन गयी है. सीमावर्ती क्षेत्र के लोग बताते हैं कि 2008 के बाद एक्सचेंज कार्यालय विराटनगर शिफ्ट हो गया. ऐसे में एक्सचेंज की सुविधा भी लोगों के हाथ से चली गयी.
हजारों मरीज इलाज के लिए जाते हैं नेपाल
सुपौल व अररिया जिले के गंभीर रूप से बीमार लोग इलाज के लिए नेपाल के धरान, लहान और विराटनगर जाते हैं. सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में इलाज में बड़ा खर्च आता है. नोटबंदी से मरीजों को भी परेशानी हो रही है.
विराटनगर स्थित गोल्डेन हॉस्पिटल के प्रबंधक संतोष मेहता ने बताया कि नेपाल सरकार द्वारा लिये गये इस फैसले से विराटनगर स्थित सभी हॉस्पिटल पर भी इसका काफी असर पड़ता दिख रहा है. उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्र से सटे होने के कारण और भारत में अच्छे हॉस्पिटलों के दूर होने के कारण भारतीय मरीज विराटनगर ही इलाज करवाने आते हैं और वे अपने साथ भारतीय रुपये ही लेकर आते हैं.
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