42 से अधिक लोगों की पदाधिकारियों ने सुनी समस्याएं

जिलाधिकारी विवेक रंजन मैत्रेय के निर्देश के आलोक में समाहरणालय स्थित संवाद कक्ष में जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी इश्तेयाक अली अंसारी की अध्यक्षता में जनता से साक्षात्कार कार्यक्रम का आयोजन हुआ
सीवान. जिलाधिकारी विवेक रंजन मैत्रेय के निर्देश के आलोक में समाहरणालय स्थित संवाद कक्ष में जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी इश्तेयाक अली अंसारी की अध्यक्षता में जनता से साक्षात्कार कार्यक्रम का आयोजन हुआ. इस दौरान जिले के विभिन्न पंचायतों एवं नगर निकायों के आमजन अपनी समस्याओं को लेकर पदाधिकारियों के समक्ष उपस्थित हुए. वहीं जिला स्तरीय पदाधिकारियों ने 42 से अधिक व्यक्तियों के मामलों को गंभीरतापूर्वक सुनते हुए संबंधित पदाधिकारियों को प्राप्त परिवाद पत्रों की जांच यथाशीघ्र कराते हुए जांच प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया. इनमें ज्यादातर मामले भूमि विवाद, आवास, पेंशन, रोजगार नहीं मिलने, अतिक्रमण, कल्याण, बैंकिंग, शस्त्र, स्वास्थ्य, नगर पंचायत, पंचायती राज विभाग, विद्युत विभाग से संबंधित थे. इस क्रम में करीब आधा दर्जन से अधिक मामलों का आन स्पाट निष्पादन भी कर दिया गया. वहीं कई मामलों में जिलाधिकारी द्वारा जिले के वरीय पदाधिकारी यथा अपर समाहर्ता, भूमि सुधार उप समाहर्ता सदर एवं महाराजगंज, सदर अनुमंडल पदाधिकारी सहित संबंधित प्रखंड के नामित जिला स्तरीय पदाधिकारियों को मामलें की जांच कराने की भी जिम्मेदारी दी गई. जनता दरबार में भूमि विवाद, आपसी बंटवारा, अतिक्रमण, जमीन संबंधी मामले, कल्याण, बैंकिंग, शस्त्र, स्वास्थ्य, नगर पंचायत, पंचायती राज विभाग, विद्युत विभाग से संबंधित मामले आए थे. इनमें से आधा दर्जन मामलों का आन स्पाट निष्पादन भी कर दिया गया. इसके अलावा जमीन से संबंधित मामलों पर प्राप्त सभी आवेदन के आलोक में संबंधित अंचलाधिकारी तथा थानाध्यक्ष एवं अनुमंडल पदाधिकारी तथा अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी की अध्यक्षता में थाना स्तर एवं अनुमंडल स्तर पर हर शनिवार को आयोजित होने वाले जनता से साक्षात्कार कार्यक्रम में दोनों पक्षों के व्यक्तियों को बुलाकर संबधित मामलों को प्राथमिकता देते हुए निराकरण कराने की बात कही गई. वहीं जनता दरबार में जमीन से संबंधित अत्यधिक मामले को देखते हुए प्राप्त आवेदनों की गहनतापूर्वक जांच करते हुए संबंधित अधिकारियों द्वारा नियमानुसार उचित कार्रवाई करने हेतु आदेशित करने की बात कही गई. ताकि मामलों का निस्तारण हो सके. साथ ही जांच पदाधिकारी को निर्देश गया कि प्राप्त आवेदन की अधिकतम सात दिनों में जांच करें. जांच के क्रम में कर्मी/ पदाधिकारी के दोषी पाए जाने पर उनके विरुद्ध विरुद्ध कार्रवाई हेतु प्रतिवेदन प्रेषित करें.
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