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रैन बसेरा में अंधेरा, टूटे पड़े हैं दर्जन भर बेड

Updated at : 04 Jan 2026 8:06 PM (IST)
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रैन बसेरा में अंधेरा, टूटे पड़े हैं दर्जन भर बेड

जरूरतमंदों को राहत के लिये शहर में मौजूद दो रैन बसेरा में से एक में ताला लटका हुआ है,तो दूसरे तीन मंजिला रैन बसेरा के दो मंजिल में अंधेरा छाया है.लिहाजा ठंड में राहत के लिये आये मजबूर लोगों को ललित बस स्टैंड के समीप मौजूद रैन बसेरा में अंधेरे में ही रात गुजारनी पड़ रही है.

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प्रतिनिधि,सीवान. जरूरतमंदों को राहत के लिये शहर में मौजूद दो रैन बसेरा में से एक में ताला लटका हुआ है,तो दूसरे तीन मंजिला रैन बसेरा के दो मंजिल में अंधेरा छाया है.लिहाजा ठंड में राहत के लिये आये मजबूर लोगों को ललित बस स्टैंड के समीप मौजूद रैन बसेरा में अंधेरे में ही रात गुजारनी पड़ रही है. प्रभात खबर की टीम ने रात में शहर के रैना बसेरा की पड़ताल की.जहां मौजूद लोगों ने भी अपनी परेशानी गिनायी.ललित बस स्टैंड पर स्थित 50 बेड वाले रैन बसेरा में हाल यह है कि यहां के 15 बेड टूट चुके हैं.जिसके चलते यह लोगों के काम नहीं आ रहे.यहां की व्यवस्था में लगे लोगों का कहना है कि रोजाना 20 से 25 लोग यहां ठहरते हैं.रैन बसेरा की व्यवस्था में चार कर्मचारी तैनात हैं,जो बेड, कंबल, मच्छरदानी, पानी और भोजन की व्यवस्था संभालते हैं. बेड व कंबल यहां आये लोगों को मुफ्त उपलब्ध कराए जाते हैं, जबकि भरपेट भोजन मात्र 30 रुपये में मिलता है. व्यवस्था में लगे कर्मियों ने कहा कि यह सुविधा मुसाफिरों, रिक्शा-ऑटो चालकों और शहर के असहाय लोगों के लिए बहुत मददगार है.पड़ताल के दौरान शौचालय की हालत बेहद खराब मिली. पाइप फटे होने से चारों तरफ गंदगी फैली हुई थी. कर्मचारियों ने बताया कि अक्टूबर से ही बिजली की व्यवस्था नहीं है. कई बार विभाग को शिकायत की गई, लेकिन समाधान नहीं हुआ. नतीजतन, लोग अंधेरे में रहने को मजबूर हैं ऊपरी मंजिल पर अंधकार रहता है कर्मचारी इनवर्टर से काम चलाते हैं, जो अक्सर फेल हो जाता है एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “इनवर्टर की रोशनी से खाना बनाते हैं और रोशनी का इंतजाम करते हैं, लेकिन अंधेरा होने पर बड़ी मुश्किल होती है. सुरक्षा के नाम पर यहां सिर्फ एक नाइट गार्ड है, जो पर्याप्त नहीं है.एक महिला कर्मचारी ने कहा, ठंड में ज्यादा व्यवस्था की जरूरत है प्रशासन को ध्यान देना चाहिए कई लोग रेलवे स्टेशन पर खुले में सोते नजर आते हैं अगर रेन बसेरा की व्यवस्था दुरुस्त होती, तो वे यहां ठहरते. एक मुसाफिर ने बताया, पहले से बेहतर है खाना-कंबल मिल रहा है ठहरने वालों से आधार कार्ड की कॉपी लेकर रिकॉर्ड रखा जाता है, जो सुरक्षा के लिए जरूरी है. गोपालगंज मोड़ के पास एक रेन बसेरा था, जो सड़क किनारे होने से ज्यादा उपयोगी था, लेकिन उसे बंद कर दिया गया. वहां ठहरने वाले ज्यादा थे. ललित बस स्टैंड वाला अंदर होने से कम लोग पहुंच पाते हैं. बंदी के बाद वहां की महिला कर्मचारी भुखमरी के कगार पर पहुंच गईं. उन्हें दूसरे जगह शिफ्ट करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. लोगों ने कहा कि सरकारी पहल तो अच्छी है,लेकिन रखरखाव की कमी से यह प्रभावहीन हो रही है.ठंड में असहायों की जिंदगी अंधेरे में गुजर रही है. इस संबंध में पूछे जाने पर नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी डा.विपिन कुमार ने कहा कि एक रैन बसेरा चालू हालत में है.दूसरा जर्जर होने के चलते बंद करा दिया गया है.चालू हालत में मौजूद रैन बसेरा में अव्यवस्था की शिकायतों को जल्द दूर कर लिया जायेगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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DEEPAK MISHRA

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