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शादी के समय कुंडली मिलान की तरह ही थैलेसीमिया की भी जांच जरूरी

Updated at : 08 May 2025 9:11 PM (IST)
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शादी के समय कुंडली मिलान की तरह ही थैलेसीमिया की भी जांच जरूरी

siwan news : विश्व थैलेसीमिया दिवस : सदर अस्पताल परिसर स्थित रक्त केंद्र में रक्तदान शिविर का हुआ आयोजन

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सीवान. गुरुवार को थैलेसीमिया दिवस पर सदर अस्पताल परिसर स्थित रक्त केंद्र में रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया. शिविर में लगभग 25 रक्तवीरों ने रक्तदान किया.

सिविल सर्जन डॉ श्रीनिवास प्रसाद ने कहा कि जिले में फिलहाल 53 थैलेसीमिया के मरीज हैं. थैलेसीमिया एक रक्त जनित रोग है, जो मानव शरीर में हीमोग्लोबिन के उत्पादन को कम करता है. हीमोग्लोबिन का कम स्तर शरीर के विभिन्न अंगों में ऑक्सीजन की कमी करता है, जिसको लेकर थैलेसीमिया रोग के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए प्रत्येक वर्ष आठ मई को विश्व थैलेसीमिया दिवस मनाया जाता है. इस वर्ष ””””थैलेसीमिया के लिए एकजुट हों : समुदायों को एकजुट करें, रोगियों को प्राथमिकता दें”””” थीम के तहत विश्व थैलेसीमिया दिवस मनाया गया है. उन्होंने जिलावासियों से अपील करते हुए कहा कि शादी-विवाह के पहले जिस तरह से लड़का और लड़की की जन्म कुंडली एवं गुणों का मिलान किया जाता है, ठीक उसी तरह से थैलेसीमिया की जांच अनिवार्य रूप से करानी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी थैलेसीमिया बीमारी से ग्रसित नवजात का जन्म नहीं हो. रक्त केंद्र की परामर्शी सुनीति श्रीवास्तव के नेतृत्व में जिला रक्तदाता और सारथी टीम के सहयोग से रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया. इस अवसर पर सदर अस्पताल के अधीक्षक डॉ अनिल कुमार सिंह, डॉ जेबा प्रवीण, डॉ मारिया और डॉ मुंतजिर, सिफार के डीपीसी धर्मेंद्र रस्तोगी, साहिल मकसूद, नेहमतुल्लाह खान, सलीम सहित कई अन्य अधिकारी और कर्मी मौजूद रहे.

पुरुषों को तीन महीने व महिलाओं को चार महीने पर करना चाहिए रक्तदान

रक्त केंद्र के नोडल अधिकारी डॉ अनूप कुमार दुबे ने रक्तदान करने आये युवाओं से कहा कि थैलेसीमिया से ग्रसित व्यक्ति के शरीर में रक्ताल्पता या एनीमिया की शिकायत हमेशा रहती है. क्योंकि शरीर में पीलापन, थकावट एवं कमजोरी का एहसास होना इसके मुख्य लक्षण होते हैं. हालांकि समय रहते इसका उपचार नहीं किया गया, तो बीटा थैलेसीमिया के मरीज के शरीर में खून के थक्के जमा होने लगते हैं. उन्होंने जिलावासियों से अपील करते हुए कहा कि रक्तदान करने से किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं होती है. बल्कि पुरुष वर्ग को तीन महीने जबकि महिलाओं को प्रत्येक चार महीने के अंतराल पर अनिवार्य रूप से रक्तदान करना चाहिए, ताकि शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ्य रहने में सक्षम रह सकें.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SHAILESH KUMAR

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By SHAILESH KUMAR

SHAILESH KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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