सीवान पंचायत चुनाव 2026 में आरक्षण बदलाव से बदलेंगे राजनीतिक समीकरण

Published by : YUVRAJ RATAN Updated At : 29 May 2026 5:36 PM

विज्ञापन

सीवान समाहरणालय की तस्वीर

Siwan News : सीवान में पंचायत चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज

विज्ञापन

Siwan News (मनीष गिरि) : सीवान पंचायत चुनाव 2026 को लेकर प्रशासनिक स्तर पर आरक्षण व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है. आरक्षण चक्र में होने वाला परिवर्तन पंचायत राजनीतिक के पुराने समीकरणों को पूरी तरह बदल सकता है. कई पंचायतों में जहां लगातार दो चुनावों में एक ही वर्ग का दबदबा रहा, वहां अब नए वर्गों और नए उम्मीदवारों के लिए अवसर खुलने की संभावना है. अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि नया आरक्षण चक्र किसके लिए अवसर और किसके लिए चुनौती लेकर आता है. पंचायत चुनाव 2026 में होने वाला यह आरक्षण परिवर्तन नए राजनीतिक समीकरणों को जन्म देगा. प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया जनगणना के आंकड़ों और पंचायत स्तर के सामाजिक ढांचे के विश्लेषण के आधार पर की जाएगी. इसके लिए प्रारंभिक तैयारियां शुरू कर दी गई है.

पंचायत राजनीति में बढ़ी हलचल

पंचायती राज अधिनियम के प्रविधान के अनुसार, किसी भी पद को लगातार दो आम चुनाव तक एक ही वर्ग के लिए आरक्षित रखने के बाद उसका आरक्षण चक्र बदलना अनिवार्य होता है.इस नियम के तहत वर्ष 2026 के चुनाव में तीसरी बार आरक्षण व्यवस्था में व्यापक बदलाव देखने को मिलेगा. प्रशासनिक महकमे के मुताबिक, जिन पदों पर वर्ष 2016 और 2021 में एक ही श्रेणी का आरक्षण लागू था, अब उन पदों को नए सिरे से तय किया जाएगा. इससे पंचायत स्तर पर राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल सकते है.

2006 से शुरू आरक्षण व्यवस्था अब तीसरे चक्र में प्रवेश करेगी

सूबे में पंचायत चुनावों में आरक्षण व्यवस्था की शुरुआत वर्ष 2006 में की गई थी. इसका पहला चक्र वर्ष 2011 में पूरा हुआ. इसके बाद 2016 और 2021 के चुनावों में आरक्षण का दूसरा चक्र लागू रहा.अब 2026 का चुनाव इस व्यवस्था का तीसरा बड़ा चरण माना जा रहा है. जिसमें जनसंख्या के नए आंकड़ों और सामाजिक संरचना के आधार पर आरक्षण का निर्धारण किया जाएगा.

अत्यंत पिछड़ा वर्ग को पंचायत चुनाव में 20 फीसदी तक आरक्षण का प्रावधान

पंचायती राज व्यवस्था में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अत्यंत पिछड़ा वर्ग और महिलाओं को अधिकतम 50 प्रतिशत तक आरक्षण देने का प्रविधान है. अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को उनकी आबादी के अनुपात में आरक्षण मिलता है. इसके अलावा अत्यंत पिछड़ा वर्ग को लगभग 20 फीसदी तक आरक्षण का प्रविधान है.

हर पद के लिए अलग तरीके से तय होता है आरक्षण

आरक्षण व्यवस्था केवल ग्राम पंचायत स्तर तक सीमित नहीं होती. यह अलग-अलग स्तरों पर अलग तरीके से लागू होती है. मुखिया पद का आरक्षण ग्राम पंचायतों की स्थिति को देखकर तय किया जाता है.वही पंचायत समिति सदस्यों का आरक्षण पूरे पंचायत समिति के पदों के आधार पर निर्धारित होता है. इसके अलावा प्रखंड प्रमुख पद का आरक्षण जिले में उपलब्ध कुल पदों के 50 प्रतिशत के आधार पर तय किया जाता है.

नए आरक्षण चक्र को लेकर संभावित उम्मीदवारों की बढ़ी बेचैनी

आरक्षण चक्र में बदलाव की संभावना से राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. कई ऐसे उम्मीदवार है, जो पिछले दो चुनावों में आरक्षण का लाभ लेकर मैदान में उतरे थे.अब नई व्यवस्था में अपनी स्थिति को लेकर असमंजस में है. दूसरी ओर नए उम्मीदवारों और नेताओं के लिए यह बदलाव एक बड़ा अवसर माना जा रहा है. कई पंचायतों में नए सामाजिक समीकरण बनते दिखाई दे रहे हैं.

Also Read : गोपालगंज के नौ प्रखंडों में शुरू होगी डिग्री कॉलेजों की पढ़ाई

विज्ञापन
YUVRAJ RATAN

लेखक के बारे में

By YUVRAJ RATAN

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन