गोपालगंज के नौ प्रखंडों में शुरू होगी डिग्री कॉलेजों की पढ़ाई

Published by : YUVRAJ RATAN Updated At : 29 May 2026 4:35 PM

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बैकुंठपुर प्रखंड में चयनित उच्चतर माध्यमिक विद्यालय देवकुली

Gopalganj News : ग्रामीण क्षेत्रों में डिग्री कॉलेज खुलने से नामांकन बढ़ने की उम्मीद

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Gopalganj News (विकास दुबे) : गोपालगंज जिले के नौ प्रखंडों में लंबे इंतजार के बाद राजकीय डिग्री महाविद्यालयों में शैक्षणिक सत्र 2026-27 से पढ़ाई शुरू होने जा रही है. जयप्रकाश विश्वविद्यालय प्रशासन और उच्च शिक्षा विभाग ने इन कॉलेजों के संचालन को लेकर तैयारी तेज कर दी है. नामांकन की ऑनलाइन प्रक्रिया भी शुरू कर दी गयी है. हालांकि शुरुआती दौर में इन कॉलेजों की पूरी व्यवस्था केवल एक प्रभारी प्राचार्य और एक शिक्षक-सह-अर्थपाल के भरोसे चलायी जायेगी. ऐसे में पढ़ाई, प्रशासनिक कार्य और व्यवस्था संचालन को लेकर कई तरह की चुनौतियां भी सामने दिख रही हैं. गोपालगंज जिले के बैकुंठपुर, बरौली, मांझा, सिधवलिया, कटेया, पंचदेवरी, फुलवरिया, उचकागांव और विजयीपुर प्रखंड में स्थापित राजकीय डिग्री महाविद्यालयों में जुलाई माह से वर्ग संचालन शुरू कराने का लक्ष्य रखा गया है. फिलहाल शिक्षा विभाग द्वारा चयनित सरकारी उच्च विद्यालयों में इन कॉलेजों का अस्थायी संचालन किया जायेगा.

नए डिग्री कॉलेजों में पांच विषयों में होगा नामांकन

नये डिग्री कॉलेजों में शुरुआती चरण में केवल पांच विषय हिस्ट्री, पॉलिटिकल साइंस, इकोनॉमिक्स, हिंदी व अंग्रेजी में ही नामांकन लिया जायेगा. प्रत्येक विषय में 48-48 सीटें निर्धारित की गयी हैं. नामांकन मेधा सूची के आधार पर होगा. विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि सीमित संसाधनों के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पढ़ाई शुरू करायी जा रही है. आने वाले समय में विषयों और सीटों की संख्या बढ़ाने की योजना है. ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों और अभिभावकों में नये कॉलेजों को लेकर उत्साह देखा जा रहा है. अब छात्रों को स्नातक की पढ़ाई के लिए गोपालगंज शहर, छपरा या दूसरे जिलों में भटकना नहीं पड़ेगा. खासकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्रों को इसका बड़ा लाभ मिलेगा.

ग्रामीण डिग्री कॉलेजों में पढ़ाई शुरू कराने को विश्वविद्यालय प्रशासन सक्रिय

जेपीयू प्रशासन ने बिहार विश्वविद्यालय अधिनियम 1976 की धारा 10(11) के तहत विभिन्न कॉलेजों और विश्वविद्यालय विभागों के शिक्षकों को अतिरिक्त प्रभार देते हुए नये कॉलेजों में प्रभारी प्राचार्य के रूप में प्रतिनियुक्त किया है. मांझा स्थित राजकीय डिग्री महाविद्यालय में कमला राय महाविद्यालय, गोपालगंज के राजनीति विज्ञान विभाग के सह-प्राध्यापक डॉ. सुरेंद्र कुमार चौधरी को प्रभारी प्राचार्य बनाया गया है. वहीं फुलवरिया कॉलेज में गोपेश्वर कॉलेज, हथुआ के अर्थशास्त्र विभाग के प्रो. डॉ. महेश कुमार को जिम्मेदारी दी गयी है. इसके अलावा बैकुंठपुर में डीएवी कॉलेज, सिवान के प्रो. डॉ. अली इमाम, बरौली में प्रो. डॉ. संजय कुमार, सिधवलिया में डॉ. राजीव कुमार मिश्रा, कटेया में प्रो. डॉ. अरशद मसूद हाशमी, पंचदेवरी में डॉ. अमरेंद्र कुमार, उचकागांव में डॉ. राजू प्रसाद तथा विजयीपुर में प्रो. डॉ. संजय कुमार को प्रभारी प्राचार्य बनाया गया है.

एक शिक्षक के भरोसे चलेगा पढ़ाई से लेकर प्रशासन तक का काम

विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रत्येक कॉलेज में एक-एक शिक्षक-सह-अर्थपाल की भी प्रतिनियुक्ति की है. इन्हें शैक्षणिक कार्य के साथ वित्तीय और प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी संभालनी होंगी. जिसमें विभिन्न कॉलेजों के प्राध्यापक को मांझा के राजकीय डिग्री कॉलेज में गोपेश्वर कॉलेज के सहायक प्राध्यापक राजेश्वर बैठा, उचकागांव कॉलेज में कमला राय महाविद्यालय के इतिहास विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. अमित कुमार तथा फुलवरिया कॉलेज में सोमनाथ झा को जिम्मेदारी दी गयी है. इसी तरह बैकुंठपुर में प्रभात कुमार निराला, बरौली में हैदर अली, सिधवलिया में डॉ रिंकी कुमारी, कटेया में डॉ दिनेश पाल, पंचदेवरी में डॉ कमाल अहमद और विजयीपुर के राजकीय डिग्री कॉलेज में अब्दुल रशीद शिक्षकों को प्रतिनियुक्त किया गया है.

सीमित संसाधनों के बीच शुरू होंगे गोपालगंज के नए डिग्री कॉलेज

नये कॉलेजों में फिलहाल स्थायी भवन, पर्याप्त शिक्षक और कर्मियों की व्यवस्था नहीं हो सकी है. अधिकांश कॉलेज अस्थायी रूप से सरकारी स्कूल भवनों में संचालित होंगे. ऐसे में सीमित संसाधनों के बीच पढ़ाई शुरू कराना विश्वविद्यालय और शिक्षा विभाग के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है. शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि चरणबद्ध तरीके से सभी कॉलेजों में आधारभूत सुविधाएं विकसित की जायेंगी. भविष्य में स्थायी भवन निर्माण, नियमित शिक्षकों की नियुक्ति और अन्य संसाधनों की व्यवस्था की जायेगी.

बढ़ेगा उच्च शिक्षा का दायरा

जिले के ग्रामीण इलाकों में डिग्री कॉलेज खुलने से सबसे अधिक फायदा उन छात्रों को होगा, जो आर्थिक या पारिवारिक कारणों से बाहर जाकर पढ़ाई नहीं कर पाते थे. खासकर छात्राओं के लिए यह पहल काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है. अब गांव और प्रखंड स्तर पर ही स्नातक की पढ़ाई उपलब्ध होने से उच्च शिक्षा का दायरा बढ़ेगा और कॉलेजों में नामांकन संख्या में भी वृद्धि होने की उम्मीद है. शिक्षा विभाग और विश्वविद्यालय प्रशासन का दावा है कि आने वाले वर्षों में इन कॉलेजों को पूरी तरह विकसित संस्थान के रूप में तैयार किया जायेगा.

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