अनिश्चितकालीन हड़ताल पर गये राजस्व कर्मचारी

जिले के राजस्व कर्मचारी बुधवार से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं.हड़ताल शुरू होते ही दाखिल-खारिज, जाति, निवास, आय प्रमाणपत्र, परिमार्जन प्लस, इ-मापी जैसे राजस्व से जुड़े जरूरी कार्य पूरी तरह प्रभावित हो गए हैं. अधिकांश अंचल कार्यालयों में कर्मचारियों के कक्ष खाली नजर आए और पूरे परिसर में सन्नाटा पसरा रहा. दूर-दराज के गांवों से अपने जरूरी काम लेकर पहुंचे लोग घंटों इंतजार करने के बाद बिना काम कराए बैरंग लौटते दिखे.
प्रतिनिधि, सीवान. जिले के राजस्व कर्मचारी बुधवार से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं.हड़ताल शुरू होते ही दाखिल-खारिज, जाति, निवास, आय प्रमाणपत्र, परिमार्जन प्लस, इ-मापी जैसे राजस्व से जुड़े जरूरी कार्य पूरी तरह प्रभावित हो गए हैं. अधिकांश अंचल कार्यालयों में कर्मचारियों के कक्ष खाली नजर आए और पूरे परिसर में सन्नाटा पसरा रहा. दूर-दराज के गांवों से अपने जरूरी काम लेकर पहुंचे लोग घंटों इंतजार करने के बाद बिना काम कराए बैरंग लौटते दिखे. रघुनाथपुर अंचल कार्यालय में बरुआ गांव के शेषनाथ यादव परिमार्जन के सिलसिले में पहुंचे थे, लेकिन हड़ताल के कारण उनका काम नहीं हो सका.चकरी गांव से बिगन चौधरी और धर्मेंद्र कुमार दाखिल-खारिज कराने आए थे, मगर उन्हें भी निराश होकर लौटना पड़ा.गोरेयाकोठी अंचल में हरिहरपुर कला के अश्वनी कुमार जाति, निवास और आय प्रमाणपत्र बनवाने पहुंचे थे, पर कर्मचारियों के नहीं मिलने से वे भी वापस चले गए. जिले के लगभग सभी अंचलों में यही स्थिति रही और आम लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा.राजस्व कर्मचारियों ने इससे पहले जिला मुख्यालय और पटना में धरना-प्रदर्शन किया था.अपनी मांगों के समर्थन में कर्मचारियों ने काला बिल्ला लगाकर विरोध भी जताया था. कर्मचारियों का कहना है कि सरकार से कई बार वार्ता के प्रयास हुए, लेकिन अब तक ठोस समाधान नहीं निकला है. इस कारण वे अनिश्चितकालीन हड़ताल के लिए बाध्य हुए हैं.बिहार राज्य भूमि सुधार कर्मचारी संघ संयुक्त संघर्ष मोर्चा के जिला अध्यक्ष ऋतुराज और जिला सचिव चंदन कुमार ने कहा कि सरकार की दमनकारी नीति और लगातार बढ़ते कार्यभार के कारण कर्मचारी आंदोलन करने को मजबूर हैं. उनका आरोप है कि कर्मचारियों पर नए-नए कार्यों का दबाव डाला जा रहा है, लेकिन वेतन वृद्धि, पदोन्नति, संसाधन और सेवा सुरक्षा से जुड़ी मांगों की अनदेखी की जा रही है, जिससे कर्मचारियों में भारी नाराजगी है.कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में वेतन ग्रेड पे को 1900 से बढ़ाकर 2800 करना शामिल है.इसके अलावा नवनियुक्त कर्मियों को गृह जिला में पदस्थापन, लंबित सेवा संपुष्टि, एसीपी-एमएसीपी का लाभ, राजस्व अधिकारी के रिक्त पदों पर वरीयता के आधार पर पदोन्नति, लैपटॉप और इंटरनेट सहित आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना, अतिरिक्त कार्य के बदले अतिरिक्त भुगतान, सुरक्षा और सम्मान की गारंटी, मुफ्त चिकित्सा सुविधा तथा पुरानी पेंशन योजना की बहाली जैसी मांगें शामिल हैं.साथ ही राजस्व कर्मचारी नियमावली 2025 को कर्मचारियों के हित में नहीं बताते हुए उसे निरस्त करने की मांग भी की गई है.हड़ताल का असर पूरे जिले में साफ तौर पर देखने को मिल रहा है. जमीन से जुड़े मामलों और प्रमाणपत्र संबंधी कार्यों के रुकने से लोगों की योजनाएं अटक गई हैं.
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