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पैसे के लिए टकटकी लगाये हैं निजी स्कूल

Updated at : 07 Apr 2025 10:00 PM (IST)
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पैसे के लिए टकटकी लगाये हैं निजी स्कूल

शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत निजी विद्यालयों को प्राप्त होने वाली राशि पांच वर्षों से लंबित है. निजी विद्यालय राशि के लिए टकटकी लगाए बैठे हैं. शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत प्रस्वीकृति प्राप्त निजी विद्यालयों को 25 फीसदी गरीब व असहाय बच्चों को नि:शुल्क पढ़ाने का प्रावधान है.

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प्रतिनिधि, सीवान. शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत निजी विद्यालयों को प्राप्त होने वाली राशि पांच वर्षों से लंबित है. निजी विद्यालय राशि के लिए टकटकी लगाए बैठे हैं. शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत प्रस्वीकृति प्राप्त निजी विद्यालयों को 25 फीसदी गरीब व असहाय बच्चों को नि:शुल्क पढ़ाने का प्रावधान है. इस 25 फीसदी बच्चों का खर्च सरकार वहन करती है और विद्यालयों के डिमांड के आधार पर जांच कर उसके खाते में हस्तांतरित करती है. 20 फरवरी को जिला पदाधिकारी मुकुल कुमार गुप्ता ने ज्ञानदीप पोर्टल पर क्लेम करने वाले प्रस्वीकृति प्राप्त 140 विद्यालयों को जांच कराने का निर्णय लेते हुए एक कमेटी गठित कर 70 अधिकारियों को जांच की कमान सौंपी थी. सूत्र बताते हैं केि अबतक केवल 52 विद्यालयों की ही जांच रिपोर्ट शिक्षा विभाग को प्राप्त हो सकी है. कई विद्यालयों द्वारा पोर्टल पर राशि हेतु जो क्लेम किया गया था, उसमें काफी भिन्नता थी, जिसके बाद जिला पदाधिकारी ने जांच कराने का निर्णय लिया था. प्राइवेट स्कूल एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसियेशन का कहना है कि सरकार व विभाग को सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए राशि भुगतान पर तत्काल निर्णय लेना चाहिए. संघ के जिला सचिव शिवजी प्रसाद ने बताया कि पांच वर्ष लंबा समय होता है, कई विद्यालयों का लाखों रूपया फंसा है. अगर यह राशि समय से प्राप्त होती तो निजी विद्यालय संचालकों को काफी सहूलियत होती. इस राशि का उपयोग वे विद्यालय विकास में भी करते. दुबारा पोर्टल एक्टिव करने की मांग मौजूदा समय में जिले में प्रस्वीकृति प्राप्त निजी विद्यालयों की संख्या 517 है. सचिव ने बताया कि वर्ष 2019 में प्रस्वीकृति प्राप्त विद्यालयों की संख्या तकरीबन 300 थी. जो अब 517 हो गया है. उन्होंने बताया कि जब निजी विद्यालयों ने ज्ञानदीप पोर्टल पर राशि के लिए क्लेम करना शुरू किया तो कुछ दिन बद ही पोर्टल बंद हाो गया. ऐसे में बहुतेरे विद्यालय पोर्टल पर क्लेम करने से वंचित हो गए. बंद होने तक जिन विद्यालयों ने क्लेम किया, उसमें 140 की फाइनल सूची जारी करते हुए जांच के दायरे में लाया गया. सचिव ने दुबारा पोर्टल को एक्टिव करने की मांग विभाग से किया है. एक अधिकारी को दो विद्यालयों की करनी थी जांच- 20 फरवरी को आदेश जारी करते हुए जिला पदाधिकारी मुकुल कुमार गुप्ता ने 70 अधिकारियों को तीन दिनों के भीतर जांच कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया था. विभागीय सूत्र बताते हैं केि अबतक 52 विद्यालयों की ही जांच रिपोर्ट प्राप्त हो सकी है. बताया जाता है कि प्रति छात्र 10900 रूपये से लेकर 11490 रूपये प्रदान किये जाने है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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