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प्रेमचंद की कहानियों में सामंती शोषण पर प्रहार

Updated at : 05 Aug 2024 9:00 PM (IST)
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प्रेमचंद की कहानियों में सामंती शोषण पर प्रहार

सोमवार को जनवादी लेखक संघ के तत्वाधान में डीएवी उच्च विद्यालय सह इंटर कॉलेज में प्रेमचंद जयंती समारोह के अवसर पर साक्षी संस्कृति की विरासत विषयक संगोष्ठी एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया. अध्यक्षता कमर शिवानी ने की. इसमें बड़ी संख्या में जिले के बुद्धिजीवियों व साहित्यकारों ने भाग लिया.

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सीवान. सोमवार को जनवादी लेखक संघ के तत्वाधान में डीएवी उच्च विद्यालय सह इंटर कॉलेज में प्रेमचंद जयंती समारोह के अवसर पर साक्षी संस्कृति की विरासत विषयक संगोष्ठी एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया. अध्यक्षता कमर शिवानी ने की. इसमें बड़ी संख्या में जिले के बुद्धिजीवियों व साहित्यकारों ने भाग लिया. उपस्थित लोगों ने मुंशी प्रेमचंद के तैल चित्र पर माल्यार्पण किया. विषय प्रवेश करते हुए मार्कंडेय ने कहा कि प्रेमचंद ऐसे पहले साहित्यकार थे, जिन्होंने आम आदमी को साहित्य में जगह दी. अपने उपन्यासों एवं कहानी के माध्यम से आम जनमानस की समस्याओं को रेखांकित किया तथा सामंती शोषण एवं पूंजीवादी उत्पीड़न पर जमकर प्रहार किया. आज पूंजीवाद संस्थागत रूप ले चुका है. वह दुनिया के सरकारों को बनाता बिगड़ा ही नहीं, बल्कि यह सरकारों को उदारीकरण के नाम पर जनता के हाथों को छीना जा रहा है. साहित्यकार युगल किशोर दुबे ने प्रेमचंद के कहानी कफन ईद की चर्चा की. इस अवसर पर रविंद्र सिंह अधिवक्ता, डॉ के ऐहतेशाम, विनोद प्रसाद सिंह, डॉ दयानंद सिंह प्रोफेसर उपेंद्रनाथ यादव, डॉ संदीप कुमार यादव, प्रो. भारत प्रसाद , प्रो. वीरेंद्र प्रसाद यादव, इंजीनियर रमेश यादव, मुन्नालाल प्रसाद, भूपेंद्र यादव, सुरेश सिंह शिक्षक परम चौधरी, बिपिन बिहारी सिंह, अशरफ अली, अधिवक्ता योगेंद्र झा, गणेश राम, शशि कुमार, डॉ लालजी नारायण आदि ने अपने-अपने विचार व्यक्त किये. वहीं दूसरे सत्र में कवि सम्मेलन एवं मुशायरा का का आयोजन किया गया. जहां कवि एवं शायरों ने अपनी कविता एवं शेरो शायरी से शमां बांध दिया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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