बड़हरिया-गोपालगंज सीमा पर बांकी नदी का पुल जर्जर, चार पहिया वाहनों का आवागमन बंद होने के कगार पर

नूराहाता और फुलगनी को जोड़ने वाला जर्जर पुल
सीवान और गोपालगंज को जोड़ने वाला बांकी नदी का पुल अब जानलेवा हो गया है। 2010 में बना यह पुल घटिया निर्माण के कारण जर्जर हो चुका है और कभी भी गिर सकता है। ग्रामीणों को अब 7 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है।
Siwan News: बड़हरिया प्रखंड के सीमावर्ती क्षेत्र में स्थित सीवान के बड़हरिया प्रखंड के नूराहाता गांव और गोपालगंज के थावे प्रखंड के फुल्गनी गांव को जोड़ने वाला बांकी नदी पुल जर्जर हो गया है. पुल की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि यह कभी भी टूट सकता है. इससे दोनों जिलों के ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ रही है.
खेतों तक पहुंचने का एकमात्र सहारा है पुल
ग्रामीणों के अनुसार, बरसात के मौसम में दोनों ओर के लोगों के खेत नदी के पार स्थित होते हैं. ऐसे में खेती-किसानी के काम के लिए ग्रामीणों को इसी पुल का सहारा लेना पड़ता है.
बांकी नदी के किनारे बसे झखाड़ीहाता, गौसी हाता, नूराहाता, जलटोलिया, रुकुम टोला, हलीम टोला और जोगापुर सहित कई गांवों के लोगों की जमीन सीमावर्ती गोपालगंज क्षेत्र में है.
2010 में मुख्यमंत्री सेतु योजना से हुआ था निर्माण
ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2010 में बिहार सरकार के ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा मुख्यमंत्री सेतु निर्माण योजना के तहत गोपालगंज के फुल्गनी और सीवान के नूराहाता को जोड़ने के लिए बांकी नदी पर पुल का निर्माण कराया गया था.
इस पुल के निर्माण पर करीब 24.85 लाख रुपये खर्च किए गए थे. निर्माण के बाद लंबे समय तक दोनों जिलों के लोगों को आवागमन में सुविधा मिली.
घटिया निर्माण का ग्रामीणों ने लगाया आरोप
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण के दौरान मानकों का ध्यान नहीं रखा गया. ठेकेदार द्वारा घटिया सामग्री के इस्तेमाल के कारण पुल समय से पहले ही जर्जर हो गया.
नूराहाता निवासी रमेश प्रसाद शर्मा, नारायण शर्मा, रामाजी साह, मो कासिम, अली अहमद और नसीम अहमद ने बताया कि अब पुल से चार पहिया वाहन गुजरना बेहद जोखिम भरा हो गया है.
सात किलोमीटर घूमकर जाने को मजबूर ग्रामीण
गोपालगंज जिले के फुल्गनी गांव के ग्रामीणों सुदर्शन भगत, अमरजीत भगत, हनीफ मंसूरी और रेयाज मंसूरी ने बताया कि पहले इस पुल से आने-जाने में काफी सुविधा होती थी.
शादी-विवाह और अन्य जरूरी कामों में समय की बचत होती थी, लेकिन पुल के बीच और किनारे के हिस्से टूट जाने के कारण अब लोगों को करीब सात किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है.
मरम्मत नहीं होने से बढ़ी परेशानी
ग्रामीणों का कहना है कि विभागीय उदासीनता के कारण लंबे समय से पुल की मरम्मत नहीं कराई गई है. पुल की जर्जर स्थिति के कारण कृषि कार्यों सहित दैनिक आवागमन में लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है.
ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से जल्द पुल की मरम्मत या पुनर्निर्माण कराने की मांग की है.
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