पटना के PMCH में जटिल सर्जरी सफल, शरीर में आरपार धंसी लोहे की रॉड निकाली गई

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शरीर के आरपार धंस गई थी लोहे की रॉड

शरीर के आरपार धंस गई थी लोहे की रॉड

पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (PMCH) के डॉक्टरों ने 22 वर्षीय युवक की जान बचाई, जिसके शरीर में निर्माण कार्य के दौरान लोहे की रॉड आरपार घुस गई थी. आपातकालीन सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति स्थिर है. डॉक्टरों ने दुर्घटना में वस्तु धंसने पर महत्वपूर्ण सलाह दी है.

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PMCH Successful Surgery: पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) के ट्रॉमा सर्जनों ने एक अत्यंत जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देते हुए 22 वर्षीय युवक की जान बचा ली.

नौबतपुर के परसा निवासी सुदामा निर्माण कार्य के दौरान गंभीर हादसे का शिकार हो गए थे. हादसे में लोहे की रॉड (सरिया) उनके शरीर के आरपार धंस गई थी.

गर्दन के पीछे से घुसकर फेफड़े को चीरते हुए सीने से निकली रॉड

चिकित्सकों के अनुसार लोहे की रॉड गर्दन के पीछे ऊपरी पीठ से शरीर में प्रवेश करते हुए दाएं फेफड़े के ऊपरी हिस्से को भेदकर बाएं सीने से बाहर निकल गई थी.

गंभीर रूप से घायल युवक को तत्काल पीएमसीएच लाया गया, जहां उसकी हालत को देखते हुए बिना देर किए ऑपरेशन थिएटर में भर्ती किया गया.

आपातकालीन थोराकोटॉमी कर निकाली गई रॉड

ट्रॉमा सर्जनों ने आपातकालीन थोराकोटॉमी कर बेहद सावधानी से लोहे की रॉड को शरीर से बाहर निकाला.

सर्जरी के दौरान फेफड़े के क्षतिग्रस्त हिस्से का उपचार किया गया और फेफड़े की कार्यक्षमता बनाए रखने के लिए चेस्ट ड्रेन भी डाला गया.

डॉक्टरों की त्वरित कार्रवाई से बची जान

पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने बताया कि मामला अत्यंत गंभीर था, लेकिन चिकित्सकों की सूझबूझ, अनुभव और त्वरित कार्रवाई से ऑपरेशन सफल रहा.

उन्होंने बताया कि मरीज की स्थिति अब स्थिर है और वह चिकित्सकीय निगरानी में तेजी से स्वस्थ हो रहा है.

इन डॉक्टरों की टीम ने किया सफल ऑपरेशन

सर्जरी करने वाली टीम में डॉ. दीपिका, डॉ. हरेंद्र कुमार, डॉ. अभिषेक, डॉ. अनुज, डॉ. प्रियंका, डॉ. राम निवास और डॉ. अभिनव शामिल थे.

डॉक्टरों ने दी महत्वपूर्ण सलाह

पीएमसीएच अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने लोगों से अपील की कि यदि किसी दुर्घटना में शरीर में कोई वस्तु धंस जाए, तो उसे घटनास्थल पर निकालने या हिलाने-डुलाने का प्रयास नहीं करना चाहिए.

ऐसी स्थिति में घायल व्यक्ति को बिना देर किए नजदीकी ट्रॉमा सेंटर या अस्पताल पहुंचाना ही सबसे सुरक्षित और प्रभावी उपाय है.

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आनंद तिवारी

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By आनंद तिवारी

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