Bihar News: यहां ट्रेन से उतरकर रेलकर्मी खोलते और बंद करते हैं फाटक, इस वजह फाटक पर होता है ट्रेन का इंतजार

Published by : Paritosh Shahi Updated At : 27 Feb 2025 5:37 PM

विज्ञापन

ढाला बंद करते मोबाइल गेट मैन

Bihar News: दरौंदा-मशरख रेल लाइन से होकर गुजरनेवाली ट्रेनें यहां के लोगों के लिए लाइफ लाइन है. छपरा-भटनी रेल खंड के दरौंदा रेलवे स्टेशन से महराजगंज तक मात्र छह किलोमीटर की रेललाइन सत्तर के दशक में बिछायी गयी थी. इस छोटी दूरी के लिए रेल बस चला करती थी. बाद के दिनों में यह रेल बस भी बंद हो गयी.

विज्ञापन

Bihar News, जितेंद्र उपाध्याय,सीवान: विश्व का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क वाले अपने देश में कुछ ऐसे भी रेल रूट हैं जहां स्टेशनों से अधिक रेल फाटक पर यात्री अपने ट्रेनों का इंतजार करते हैं. जहां हर दिन इन रेल फाटक पर दो बार ट्रेन रुकती है. जहां से इस ट्रेन में सवार होकर यात्री अपने गंतव्य तक की यात्रा पूरी करते हैं. हम बात कर रहे हैं पूर्वोत्तर रेलवे के वाराणसी रेल मंडल के अंतर्गत आनेवाले दरौंदा-मशरख रेल लाइन की. कुल 42 किलोमीटर के रेल रूट पर पड़नेवाले हर रेल फाटक पर ट्रेन दो बार रुकती है.

ट्रेन में सवार मोबाइल गेट मैन यहां रेल फाटक को करते हैं बंद

दरौंदा-मशरख रेल रूट पर दो जोड़ी ट्रेनें चलती हैं. यह ट्रेन थावे जक्शन से मशरख स्टेशन जाती है. इसमें थावे से दरौंदा तक मेन लाइन है. यहां से रूट बदल कर ट्रेन कुल 42 किलोमीटर मशरख स्टेशन तक का सफर पूरा करती है. खास बात यह है कि इस रूट पर सड़कों को क्राॅस करनेवाले रेल लाइन पर फाटक तो बनाये गये हैं, पर यहां गेट मैन की तैनाती नहीं की गयी है. इसके चलते रेल फाटक आने के पचास मीटर पहले ही ट्रेन रुक जाती है. इसके बाद ट्रेन से उतरकर मोबाइल गेट मैन आता है और रेल फाटक बंद करता है. यह गेट मैन ड्राइवर के ही केबिन में रहता है. इसके बाद ट्रेन रेल फाटक से आगे बढ़कर फिर रुक जाती है. इस बार ट्रेन के गार्ड के केबिन में बैठा दूसरा मोबाइल गेट मैन उतरकर रेल फाटक को खोलता है. इसके बाद गेट मैन को लेकर ट्रेन अब आगे की तरफ बढ़ती है.

यह क्रम रेल रूट के अंतिम स्टेशन तक हर रेल फाटक पर चलता रहता है. इस तरह के रेल फाटक की संख्या 9 से अधिक है. हालांकि कुछ रेल फाटक पर अब अंडरपास का निर्माण हो जाने से यह समस्या दूर हो गयी है. इसमें महराजगंज स्टेशन व विशुनपुर महुवारी रेलवे स्टेशन के बीच मौजूद रगड़्रगंज रेल फाटक शामिल है. नब्बे के दशक में रेल लाइन का विस्तार करते हुए महराजगंज से 36 किलोमीटर और आगे रेल लाइन को बढ़ाते हुए मशरख स्टेशन तक ले जाने का सरकार ने फैसला किया.लिहाजा कुल 42 किलोमीटर की तैयार हुयी रेल लाइन पर वर्ष 2018 से ट्रेन दौड़ने लगी.

रेल फाटक के सामने खड़ी ट्रेन में सवार होते यात्री

रेल फाटक पर ट्रेन का इंतजार करते हैं यात्री

दरौंदा-मशरख रेल रूट से गुजरने वाली ट्रेन यहां के अगल बगल के गांवों के लोगों के सफर के लिये सबसे सुगम साधन है. इस रूट पर आठ रेलवे स्टेशन बनाये गये हैं. इसमें दरौंदा व मशरख के बीच महराजगंज, विशुनपुर महुवारी, सरहरी, बड़का गांव, बसंतपुर, साघर सुल्तानपुर स्टेशन पड़ता है. इन स्टेशनों से अधिक रूट पर रेल फाटक की संख्या है. जहां आसपास के ग्रामीण अपनी यात्रा शुरू करने के लिये इस रेल फाटक पर ही ट्रेन का इंतजार करते हैं.खास बात यह है कि इन रेलवे फाटकों से नजदीक के स्टेशन की दूरी डेढ़ से दो किलोमीटर ही है. इसके बाद भी रेल फाटक पर ट्रेन रूकना तय होने से यात्री स्टेशन तक जाना मुनासिब नहीं समझते हैं. लिहाजा हर रेल फाटक से आसपास के पांच से छह गांवों के यात्री अपना सफर शुरू करते हैं.

रेल फाटक पर ट्रेन रूकने से औसतन छह मिनट का लगता है वक्त

हर रेल फाटक आने पर उसके पहले ट्रेन रूकने व पुन: रेल फाटक के पार करके रूकने के इस क्रम में एक अनुमान के मुताबिक औसतन छह मिनट का वक्त गुजर जाता है.लिहाजा 2 घंटा 13 मिनट का हर ट्रेनों को तय किया गया सफर को पुरा करने में अतिरिक्त समय लग जाता है.डीजल इंजन से पूर्व में चलनेवाली ट्रेनों से इंधन के अतिरिक्त खर्चे का अनुमान पहले लगाया जाता था, पर अब इलेक्ट्रिक इंजन होने के चलते इसकी चर्चा आमतौर पर नहीं होती है.

रगड़गंज रेल फाटक के सामने बना अंडरपास

फाटक पर ट्रेन रूकने से रेल का व्यवसाय भी हो रहा प्रभावित

हर रेलवे फाटक पर चौबीस घंटे में तीन गेट मैन की ड्यूटी लगती है.पर यहां तैनाती नहीं होने से रेल प्रशासन का मानना है कि यह अतिरिक्त खर्च बच जाता है.दूसरी तरफ स्टेशन के बजाय रेलवे फाटक से ट्रेन पर सवार होनेवाले यात्री को टिकट नहीं मिल पाता है.जिसका नुकसान रेलवे को आर्थिक रूप से उठाना पड़ रहा है.इसके साथ ही दरौंदा व मशरख रेलवे स्टेशन को छोड़कर अन्य सभी स्टेशनों पर टिकट बिक्री के लिये ठेके पर वेंडर की तैनाती की गयी है.जहां से रेलवे को अपने उम्मीद के अनुसार टिकटों की बिक्री नहीं होती है.इससे भी रेलवे का व्यवसाय प्रभावित है.

पढ़ें प्रभात खबर की प्रीमियम स्टोरी : Mughal Harem Stories : अपने हुस्न और चतुराई से नूरजहां ने जहांगीर को कदमों में रखा और बनी मलिका ए हिंद

तत्कालीन रेल मंत्री के कार्यकाल में रेल रूट हुआ था स्वीकृत

दरौंदा से महराजगंज तक पहले से मौजूद रेल लाइन का विस्तार करते हुए मशरख तक बढ़ाने के प्रस्ताव के बारे में कहा जाता है कि तत्कालीन रेल मंत्री नीतीश कुमार ने मंजुरी दी थी.हालांकि पूर्व में महराजगंज से वाया गोरयाकोठी होते हुए मशरख तक रेल लाइन बिछाने की मांग उठती रही थी.जिसे काफी पहले मंजूरी भी मिल गयी थी, पर यह प्रस्ताव हकीकत में नहीं बदल पाया.बाद के दिनों में महराजगंज के तत्कालीन सांसद प्रभुनाथ सिंह के पहल पर रेलमंत्री नीतीश कुमार ने महराजगंज-मशरख रेल लाइन को स्वीकृति प्रदान कर दी.जिसका छह वर्षों तक काम चलने के बाद यह रूट वर्ष 2018 में चालू हो गया.

पढ़ें प्रभात खबर की प्रीमियम स्टोरी : कभी देश की आवाज रही कांग्रेस, आज अपने नेताओं को सहेज नहीं पा रही, क्या है वजह?

विज्ञापन
Paritosh Shahi

लेखक के बारे में

By Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन