खसरा और काली खांसी की निगरानी होगी और सशक्त

राज्य में वैक्सीन से रोकी जा सकने वाली बीमारियों की निगरानी व्यवस्था में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है. राज्य स्वास्थ्य समिति, ने निर्णय लिया है कि अब वीपीडी सर्विलांस का कार्य विश्व स्वास्थ्य संगठन के स्थान पर राज्य के इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम के माध्यम से किया जाएगा. यह नई व्यवस्था चरणबद्ध तरीके से लागू की जा रही है और एक मार्च 2026 से पूर्ण रूप से प्रभावी हो जाएगी.
प्रतिनिधि, सीवान.राज्य में वैक्सीन से रोकी जा सकने वाली बीमारियों की निगरानी व्यवस्था में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है. राज्य स्वास्थ्य समिति, ने निर्णय लिया है कि अब वीपीडी सर्विलांस का कार्य विश्व स्वास्थ्य संगठन के स्थान पर राज्य के इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम के माध्यम से किया जाएगा. यह नई व्यवस्था चरणबद्ध तरीके से लागू की जा रही है और एक मार्च 2026 से पूर्ण रूप से प्रभावी हो जाएगी. राज्य स्वास्थ्य समिति द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि केंद्र सरकार और स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देशों के आलोक में राज्य की स्वास्थ्य निगरानी प्रणाली को आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है. इसके तहत जिन जिलों में अब तक डब्लूएचओ प्रत्यक्ष रूप से वीपीडी सर्विलांस करता था, वहां यह जिम्मेदारी अब आइडीएसपी को सौंपी जा रही है.निर्देश के अनुसार अरवल, कटिहार, मधेपुरा, मुंगेर, रोहतास और सीवान सहित कुल आठ जिलों में पहले से ही आइडीएसपी के माध्यम से वीपीडी सर्विलांस किया जा रहा है. वीएसआइएमएस पोर्टल पर अनिवार्य होगी रिपोर्टिंग- नयी व्यवस्था के तहत सभी जिलों में वीपीडी सर्विलांस से संबंधित रिपोर्टिंग वीएसआईएमएस पोर्टल पर अनिवार्य रूप से की जाएगी. राज्य स्वास्थ्य समिति ने जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी, जिला सर्वेक्षण पदाधिकारी, एपिडेमियोलॉजिस्ट, डेटा मैनेजर, डीएम एंड ई अधिकारी और डेटा ऑपरेटर को आवश्यक प्रशिक्षण देने के निर्देश भी दिए हैं. संक्रमण नियंत्रण होगा और मजबूत- स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इस बदलाव से खसरा, रूबेला, डिप्थीरिया, काली खांसी सहित अन्य वैक्सीन प्रिवेंटेबल बीमारियों की निगरानी अधिक प्रभावी होगी. समय पर रिपोर्टिंग और त्वरित कार्रवाई से रोग नियंत्रण और रोकथाम को मजबूती मिलेगी.
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