कमलदाह सरोवर को मिलेगा वेटलैंड का दर्जा

जिले के सिसवन प्रखंड के मेहदार स्थित कमलदाह सरोवर को वेटलैंड घोषित करने की प्रक्रिया शुरु हो गयी है. जिला आर्द्रभूमि समिति ने 151.3 एकड़ में फैले इस सरोवर के ड्राफ्ट नोटिफिकेशन को मंजूरी दे दी है. अब राज्य सरकार के पास प्रस्ताव को अंतिम स्वीकृति के लिए भेजा गया है. मंजूरी मिलते ही यह सरोवर संरक्षित आर्द्रभूमि घोषित हो जाएगा और इसके संरक्षण के लिए सख्त नियम लागू होंगे.
प्रतिनिधि,सीवान. जिले के सिसवन प्रखंड के मेहदार स्थित कमलदाह सरोवर को वेटलैंड घोषित करने की प्रक्रिया शुरु हो गयी है. जिला आर्द्रभूमि समिति ने 151.3 एकड़ में फैले इस सरोवर के ड्राफ्ट नोटिफिकेशन को मंजूरी दे दी है. अब राज्य सरकार के पास प्रस्ताव को अंतिम स्वीकृति के लिए भेजा गया है. मंजूरी मिलते ही यह सरोवर संरक्षित आर्द्रभूमि घोषित हो जाएगा और इसके संरक्षण के लिए सख्त नियम लागू होंगे.जिससे प्रवासी पक्षियों का ठिकाना सुरक्षित हो जायेगा. यह सरोवर सिर्फ एक जलाशय नहीं, बल्कि इलाके की पहचान और आस्था का केंद्र भी है. महेन्द्रनाथ मंदिर के पास स्थित होने के कारण यहां हर साल सावन और महाशिवरात्रि में हजारों श्रद्धालु जुटते हैं. वहीं, हर साल शरद ऋतु में यहां बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षियों का डेरा लगता है, जो इसकी प्राकृतिक अहमियत को और बढ़ाता है. वेटलैंड का दर्जा मिलने के बाद अतिक्रमण, गंदगी फैलाने और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगेगी. इससे सरोवर की सफाई, पानी की गुणवत्ता और जैव विविधता सुरक्षित रहेगी. साथ ही यह क्षेत्र आने वाले समय में पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण का प्रमुख केंद्र बन सकता है क्योंकि सीवान के लिये पहला आर्द्रभूमि क्षेत्र चिन्हित किया गया है.बताया जाता है कि सरोवर का निर्माण 17वीं शताब्दी में नेपाल के नरेश महेन्द्रवीर विक्रम द्वारा कराया गया था. गणना के दौरान मिले थे 1500 से अधिक देशी एवं प्रवासी पक्षी कमलदाह सरोवर अपनी जैव विविधता और पारिस्थितिकी सेवाओं के कारण भी विशेष महत्व रखता है. इस साल किये गये वार्षिक जलीय पक्षी गणना के अनुसार सरोवर में लगभग 1500 से अधिक देशी एवं प्रवासी पक्षी पाए गए. जिनमें 29 विभिन्न प्रजातियां शामिल हैं. इनमें रेड-क्रेस्टेड पोचार्ड, फेरुजिनस डक, नॉर्दर्न पिंटेल, यूरेशियन विजन तथा कॉमन टील जैसे प्रमुख प्रवासी पक्षी शामिल हैं.इस सरोवर को वेटलैंड घोषित करने का मुख्य उद्देश्य इसके पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखना, जैव विविधता का संरक्षण करना तथा स्थानीय समुदायों के लिए इसके संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग सुनिश्चित करना है. अधिसूचना के तहत सरोवर क्षेत्र एवं उसके प्रभाव क्षेत्र में विभिन्न गतिविधियों को नियंत्रित एवं विनियमित किया जाएगा ताकि इसके प्राकृतिक स्वरूप को किसी प्रकार की क्षति न पहुंचे. सरोवर में अतिक्रमण, गंदगी और निर्माण पर लग सकेगा रोक अधिसूचना के प्रारूप में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि सरोवर के भीतर कई गतिविधियां पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगी.इनमें आर्द्रभूमि को गैर-आर्द्रभूमि उपयोग में परिवर्तित करना, किसी भी प्रकार का अतिक्रमण, उद्योगों की स्थापना या विस्तार, ठोस कचरा फेंकना, बिना उपचारित अपशिष्ट या रसायनों का निर्वहन, 50 मीटर के भीतर स्थायी निर्माण, अवैध शिकार तथा व्यावसायिक उद्देश्य से मिट्टी या अन्य संसाधनों का दोहन शामिल है. इसके साथ ही, कुछ गतिविधियों को विनियमित श्रेणी में रखा गया है. कृषि एवं बागवानी के लिए पारंपरिक जल उपयोग जारी रहेगा. धार्मिक गतिविधियां रहेगी जारी, पर्यावरण से समझौता नहीं अधिसूचना में यह भी प्रावधान किया गया है कि स्थानीय लोगों की धार्मिक एवं पारंपरिक गतिविधियों को यथावत जारी रखा जाएगा, बशर्ते वे पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाएं. सरोवर क्षेत्र में वर्तमान में प्रचलित धार्मिक अनुष्ठान जारी रहेंगे. लेकिन किसी भी प्रकार की ऐसी गतिविधि जिससे पारिस्थितिक संतुलन प्रभावित हो, की अनुमति नहीं होगी. इसके अलावा जल संकट की स्थिति में ग्रामीणों के घरेलू उपयोग के लिए सरोवर से पानी की आपूर्ति भी की जा सकेगी. जिसका नियंत्रण जल संसाधन विभाग के अधीन होगा. वृक्षारोपण को सरोवर के मुख्य क्षेत्र में प्रतिबंधित रखा गया है, जबकि प्रभाव क्षेत्र में इसकी अनुमति दी गई है. साथ ही वाइज यूज ऑफ वेटलैंड के सिद्धांत के तहत सामुदायिक, जीविका एवं सांस्कृतिक उपयोग को भी अनुमति दी गई है, बशर्ते इससे आर्द्रभूमि के पारिस्थितिक स्वरूप और सेवाओं पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े.इस अधिसूचना के प्रभावी क्रियान्वयन और निगरानी की जिम्मेदारी बिहार राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से निभाई जाएगी. क्या होता है वेटलैंड वेटलैंड (आर्द्रभूमि) यानी ऐसी जगह जहां जमीन पर हमेशा या कुछ समय तक पानी रहता है.यह जगह पूरी तरह पानी से भरी हो सकती है या हल्की गीली और दलदली भी हो सकती है.जैसे—तालाब, पोखर, झील, नदी किनारे का इलाका या दलदल.सरल भाषा में समझें तो जहां पानी और जमीन दोनों साथ मिलकर एक खास तरह का प्राकृतिक माहौल बनाते हैं, उसे आर्द्रभूमि कहते हैं. यह जगहें प्रकृति के लिए बहुत काम की होती हैं. बोले जिलाधिकारी कमलदाह सरोवर के आद्रभूमि अधिसूचित होने से महेंद्र नाथ शिव मंदिर व कमलदह सरोवर टूरिस्ट सर्किट बन सकेगा.जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय पर्यटन को भी प्रोत्साहन मिलेगा. -विवेक रंजन मैत्रेय, जिलाधिकारी सीवान सरोवर का होगा विकास कमलदाह सरोवर को जिले का प्रथम अधिसूचित आद्रभूमि घोषित कराने के लिए प्रारूप अधिसूचना बिहार राज्य आद्रभूमि प्राधिकरण को प्रेषित किया गया है. कमलदाह सरोवर अधिसूचित होने से यहाँ के जल, जलीय प्राणीयों, स्थानीय व प्रवासी पक्षियों व अन्य सभी फ़्लोरा फ़ाउना को तत्काल प्रभाव से वेटलैंड्स कंजर्वेशन एंड मैनेजमेंट रूल्स 2017 के नियमों के अंतर्गत सुरक्षा प्रदान की जायेगी. -मेघा यादव, वन प्रमंडल पदाधिकारी, गोपालगंज वन प्रमंडल
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