सीवान: बड़हरिया में सिमटती जा रही राष्ट्रीय पर्व पर सामूहिक ध्वजारोहण की परंपरा, प्रबुद्धजनों में नाराजगी

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प्रखंड मुख्यालय में राष्ट्रीय पर्वों को मनाने की दशकों पुरानी समृद्ध परंपरा धीरे-धीरे लुप्त हो रही है. सामूहिक ध्वजारोहण की घटती भागीदारी और राष्ट्रगान गाने वाले युवाओं की कमी ने प्रबुद्धजनों को चिंतित कर दिया है.

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Siwan Flag Hoisting Tradition: बड़हरिया प्रखंड मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस मनाने की दशकों पुरानी समृद्ध परंपरा धीरे-धीरे खत्म होने के कगार पर पहुंच गई है. इससे क्षेत्र के प्रबुद्धजनों और समाजसेवियों में क्षोभ और मलाल है. उनका कहना है कि राष्ट्रीय पर्व के मौके पर सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों में सामूहिक रूप से ध्वजारोहण की परंपरा रही है, जो अब सिमटती जा रही है.

सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों में होता था सामूहिक झंडोत्तोलन

प्रबुद्धजनों के अनुसार प्रखंड कार्यालय, थाना परिसर, अस्पताल, डाकघर, रजिस्ट्री कचहरी, आइबी कार्यालय, मनरेगा, बाल विकास परियोजना कार्यालय, गंडक कार्यालय, सभी बैंकों और आसपास के सरकारी शैक्षणिक संस्थानों के अलावा विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यालयों में भी सामूहिक रूप से झंडोत्तोलन होता था.

15 अगस्त के तीन-चार दिन पूर्व जनप्रतिनिधियों और प्रबुद्धजनों की प्रखंड कार्यालय में बैठक कर कार्यक्रमों की रूपरेखा और समय-सारणी तय की जाती थी. निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पदाधिकारियों के साथ जनप्रतिनिधि, समाजसेवी और प्रबुद्धजन विभिन्न स्थानों पर ध्वजारोहण में शामिल होते थे. इससे पूरे प्रखंड में देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता का माहौल बनता था.

औपचारिकता तक सिमटती जा रही परंपरा

क्षेत्रवासियों का कहना है कि आज भी झंडोत्तोलन के समय और संस्थानों को लेकर प्रखंड कार्यालय से औपचारिक तौर पर पत्र जारी होता है, लेकिन सामूहिक भागीदारी की पुरानी परंपरा कमजोर पड़ती जा रही है. कुछ स्थानों पर झंडोत्तोलन के बाद पदाधिकारी अपने आवास लौट जाते हैं. पूर्व में तैयारी नहीं हो पाने पर झंडोत्तोलन के बाद राष्ट्रगान गाने वालों का भी अभाव होता जा रहा है. इससे नयी पीढ़ी के युवक इस परंपरा से जुड़ नहीं पा रहे हैं.

राष्ट्रगान की परंपरा को आगे बढ़ाने वाला कोई युवा नहीं

क्षेत्रवासियों के अनुसार अब स्थिति यह है कि बशीर अहमद उर्फ लालबाबू विभिन्न स्थानों पर राष्ट्रगान का शुभारंभ करते हैं. उनकी जगह लेने के लिए नयी पीढ़ी का कोई युवक सामने नहीं आ सका है. इसे भी पुरानी परंपरा के कमजोर पड़ने के उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है.

प्रशासन से परंपरा को फिर जीवंत करने की मांग

इधर, इस पुरानी और समृद्ध परंपरा के कमजोर पड़ने से वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ. अनिल गिरि, समाजसेवी फहीम आलम और पूर्व मुखिया वीरेंद्र प्रसाद ने आपत्ति जतायी है. उन्होंने प्रशासन से दशकों पुरानी सामूहिक ध्वजारोहण की परंपरा को पुनः जीवंत करने की मांग की है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय पर्व का आयोजन सामूहिक भागीदारी और देशभक्ति की भावना के साथ होना चाहिए, ताकि नयी पीढ़ी भी राष्ट्रीय पर्वों की इस परंपरा से जुड़ सके.


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आनंद मिश्र

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By आनंद मिश्र

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