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मोटे अनाज में फाइबर की प्रचूरता, यह कई रोगों से करता है रक्षा

Updated at : 29 Aug 2024 10:34 PM (IST)
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मोटे अनाज में फाइबर की प्रचूरता, यह कई रोगों से करता है रक्षा

कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंध अभिकरण (आत्मा) ने अंबेडकर भवन के संवाद कक्ष में प्रगतिशील किसान व कृषि वैज्ञानिकों के बीच बदलते मौसम में मोटे अनाज की वैज्ञानिक खेती विषय पर परिचर्चा आयोजित की

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सीवान. कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंध अभिकरण (आत्मा) ने अंबेडकर भवन के संवाद कक्ष में प्रगतिशील किसान व कृषि वैज्ञानिकों के बीच बदलते मौसम में मोटे अनाज की वैज्ञानिक खेती विषय पर परिचर्चा आयोजित की. जिला कृषि पदाधिकारी आलोक कुमार ने बताया कि आत्मा के माध्यम से प्रतिवर्ष कृषक-वैज्ञानिक परिचर्चा आयोजित होती है, जिसका उद्देश्य कृषकों की समस्याओं का समाधान वैज्ञानिकों के माध्यम से बेहतर तरीके से करना और किसानों को वैज्ञानिकों से जोड़ना है. उन्होंने बताया कि सूखे की स्थिति में मोटे अनाज को लगाना बेहतर है. भारत सरकार मोटे अनाज की खेती पर अत्यधिक ध्यान दे रही है. पूरा विश्व मोटे अनाज के अत्यधिक उत्पादन पर विशेष ध्यान दे रहा है. कृषि विज्ञान केंद्र, भगवानपुर हाट की वैज्ञानिक डॉ हर्षा बीआर ने कहा कि ऐसे किसान, जिनकी खेती योग्य जमीन ऊंची जगहों पर हैं, वे मक्का, बाजरा, ज्वार, मड़ुआ (रागी), सोयाबीन आदि लगा सकते हैं. उन्होंने खेती के लिए स्वयं कंपोस्ट बनाकर जैविक खेती की ओर अग्रसर होने की अपील की. वरीय वैज्ञानिक डॉ नंदीश सीवी ने फसलों में लगने वाले रोगों एवं मक्का, ज्वार, बाजरा एवं मडुवा आदि की वैज्ञानिक तरीके से खेती के बारे में विस्तार से बताते हुए इन्टर क्रॉपिंग पर जोर दिया. वहीं, वैज्ञानिक इ कृष्णा बहादुर छेत्री ने हैप्पी सीडर, रोटावेटर, रीपर बाइन्डर आदि मशीनों के बेहतर संचालन एवं रख-रखाव के बारे में जानकारी प्रदान की. इसके पश्चात अनुमंडल कृषि पदाधिकारी सीवान सदर सह सहायक निदेशक (प्रक्षेत्र) आलेख शर्मा ने किसानों को मोटे अनाजों के गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन की उन्नत तकनीक की जानकारी प्रदान की. उन्होंने बताया कि मोटे अनाज में फाइबर पाया जाता है, जो हमारे पेट के लिए बेहतर होता है और डायबिटिज जैसे रोगों से बचाता है. मौके पर बड़हरिया के प्रगतिशील किसान मुकेश कुमार ने बाजार में बीज की कमी से अवगत कराया. बसंतपुर की प्रगतिशील महिला किसान ज्ञांती देवी आत्मा से मोटे अनाजों से बनाये जाने वाले खाद्य पदार्थों का प्रशिक्षण प्राप्त कर पंचायत में उसका उत्पादन कर रही हैं. कार्यक्रम का संचालन उप परियोजना निदेशक (आत्मा) कालीकांत चौधरी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन सहायक तकनीकी प्रबंधक विपिन कुमार चतुर्वेदी ने किया. मौके पर प्रखंड तकनीकी प्रबंधक शरद सिंह बघेल, वरिष्ठ सहायक तकनीकी प्रबंधक ज्ञानेंद्र तिवारी, रामपाल, दीपक यादव, सहायक तकनीकी प्रबंधक शशिकांत ठाकुर, अखिलेश गुप्ता, आलोक कुमार सहित प्रगतिशील किसान संगीता देवी, अमिताभ कुमार त्रिपाठी आदि उपस्थिति रहे.

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