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भीषण कनकनी में अलाव बना सहारा

Updated at : 04 Jan 2026 7:26 PM (IST)
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भीषण कनकनी में अलाव बना सहारा

मौसम के बदलते मिजाज ने जनजीवन को प्रभावित किया है. दो दिनों से तापमान में भारी गिरावट, कुहासा और पछुआ हवा के प्रकोप से कनकनी बढ़ गई है. रविवार को अधिकतम तापमान 17 और न्यूनतम तापमान 8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. वही 10 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पछुआ हवा चली.मौसम विभाग के अनुसार आने वाले 10 दिनों तक तापमान में स्थिरता बनी रहने की संभावना है

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प्रतिनिधि, सीवान. मौसम के बदलते मिजाज ने जनजीवन को प्रभावित किया है. दो दिनों से तापमान में भारी गिरावट, कुहासा और पछुआ हवा के प्रकोप से कनकनी बढ़ गई है. रविवार को अधिकतम तापमान 17 और न्यूनतम तापमान 8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. वही 10 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पछुआ हवा चली. मौसम विभाग के अनुसार आने वाले 10 दिनों तक तापमान में स्थिरता बनी रहने की संभावना है. ठंड और कनकनी से लोगों की मुश्किलें लगातार जारी हैं. पछुआ हवा के कारण वातावरण में नमी और ठंडक इतनी बढ़ गई है कि लोग घरों में दुबकने को मजबूर हैं. सुबह और शाम के समय चलने वाली बर्फीली हवाएं शरीर को भीतर तक झकझोर रही हैं. हालांकि दो दिनों से कोहरे का प्रकोप नहीं है, लेकिन आसमान में बादल छाए हुए हैं. इस सर्द पछुआ हवा के कारण सड़कों पर सन्नाटा पसरा हुआ है और लोग बेहद जरूरी काम होने पर ही बाहर निकल रहे हैं. चौक-चौराहों और ग्रामीण इलाकों में आग ही सहारा इस ठिठुरन भरी ठंड से बचने के लिए जिले के चौक-चौराहों और ग्रामीण इलाकों में अलाव ही एकमात्र सहारा बन गया है. लोग लकड़ी, सूखी पत्तियां और कूड़ा-करकट जलाकर खुद को गर्म रखने की कोशिश कर रहे हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी गंभीर है, जहां पशुओं को ठंड से बचाने के लिए पुआल और बोरे का सहारा लिया जा रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों की तुलना में इस बार की कनकनी अधिक कष्टदायक है.वही बदलते मौसम ने स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को भी बढ़ा दिया है. खासकर बुजुर्गों और बच्चों में सर्दी, जुकाम और सांस लेने की समस्याएं देखी जा रही हैं.पछुआ हवा और शीतलहर के कारण दैनिक मजदूरी करने वाले लोगों के लिए काम की तलाश में निकलना दूभर हो गया है. तेलहन व दलहन की फसलों पर संकट, किसान परेशान कड़ाके की ठंड ने किसानों की चिंता का बढ़ा दिया है. तेलहन व दलहन फसल की खेती करने वाले किसान परेशान है.क्योंकि ठंड के चलते उनकी फसलों का विकास अवरुद्ध हो रहा है.जिसके चलते फसल की उत्पादकता प्रभावित होने की आशंका है.वही सब्जी की खेती पर भी पाले की मार की चिंता सता रही है. हालांकि यह ठंड गेहूं के लिए फायदेमंद मानी जाती है. लेकिन लगातार गिरते तापमान और पाला गिरने की आशंका ने तिलहन,सब्जी और दलहन की फसलों पर संकट के बादल मंडरा दिए हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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DEEPAK MISHRA is a contributor at Prabhat Khabar.

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