50% टीबी मरीजों को निक्षय पोषण की पहली किस्त नहीं

Updated at : 03 Jul 2019 1:53 AM (IST)
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50% टीबी मरीजों को निक्षय पोषण की पहली किस्त नहीं

सीवान : टीबी मरीजों को टीबी की दवा के साथ-साथ स्वस्थ भोजन की आवश्यकता होती है. केवल दवा ही तपेदिक रोग को नियंत्रित नहीं कर सकती है. यदि टीबी के रोगी अच्छा भोजन नहीं ले रहे हैं, तो वे टीबी से अपना जीवन खो सकते हैं. इसी को देखते हुए भारत सरकार ने पूरे देश […]

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सीवान : टीबी मरीजों को टीबी की दवा के साथ-साथ स्वस्थ भोजन की आवश्यकता होती है. केवल दवा ही तपेदिक रोग को नियंत्रित नहीं कर सकती है. यदि टीबी के रोगी अच्छा भोजन नहीं ले रहे हैं, तो वे टीबी से अपना जीवन खो सकते हैं. इसी को देखते हुए भारत सरकार ने पूरे देश में अप्रैल 2018 में निक्षय पोषण योजना को लागू किया. इस योजना के अनुसार, केंद्र सरकार निक्षय पोषण टीबी रोगियों को प्रतिमाह पांच सौ रुपये का वित्तीय लाभ देती है.

2018 में सीवान जिले में कुल 2409 टीबी के मरीजों को पंजीकृत किया गया. इसमें अभी तक 1277 मरीजों को ही निक्षय पोषण योजना की राशि विभाग ने उनके खाते में भेजा है. इसी तरह मई 2019 तक विभाग ने 1164 टीबी के मरीजों को पंजीकृत किया है. इसमें मात्र 517 मरीजों को ही राशि उनके खाते में भेजी गयी है.
दोनों सालों की समीक्षा की जाये तो जिले के करीब 50 प्रतिशत टीबी मरीजों को यक्ष्मा विभाग ने केंद्र सरकार द्वारा दी जाने वाली निक्षय पोषण योजना की राशि उपलब्ध नहीं करायी है. जब टीबी मरीजों को दवा के साथ-साथ स्वस्थ भोजन जरूरी है, उस स्थिति में गरीब मरीजों को टीबी बीमारी से मुक्त करने की सरकार की योजना आरएनटीसीपी बेपटरी होते दिखायी दे रही है.
25 सितंबर अंतिम डेट निर्धारित की थी एसटीओ ने
राज्य यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ कैप्टेन केएन सहाय ने टीबी मरीजों को निक्षय पोषण योजना की दी जाने वाली राशि का बैकलॉग खत्म करने के लिए 2018 में 25 सितंबर का अंतिम डेट निर्धारित किया था. 2018 का बैकलॉग खत्म तो हुआ नहीं, 2019 का भी करीब 53 प्रतिशत बैकलॉग हो गया. निक्षय पोषण योजना की राशि नहीं मिलने से गरीब टीबी मरीजों के इलाज पर असर पड़ रहा है. टीबी मरीजों को कम से कम छह माह की दवा खानी होती है.
अगर दिसंबर में पंजीकृत मरीज को पैसा नहीं मिला होगा तथा अब पैसा मिले तो दो ही स्थिति मरीज के सामने होगी. पहला टीबी की दवा खाने से मरीज क्योर हो गया होगा. दूसरी स्थिति यह हुई होगी कि मरीज मर गया होगा. दोनों स्थिति में बाद में निक्षय योजना के पैसे मिलने से सरकार की योजना उदेश्य से भटकी प्रतीत हो रही है.
पैसे नहीं भेजने के संबंध में कर्मचारी बनाते हैं बहाना
टीबी मरीजों को निक्षय पोषण योजना की राशि नहीं भेजने के संबंध में विभाग के कर्मचारी तरह-तरह का बहाना बनाते हैं. पहला बहाना यह होता है कि करीब पचास प्रतिशत मरीजों के पास कोई बैंक अकाउंट नहीं है.
सारण क्षेत्र के आरएडी डॉ एके गुप्ता ने कुछ माह पहले सीवान दौरे के दौरान यक्ष्मा विभाग की समीक्षा के दौरान निक्षय पोषण योजना की राशि लंबित होने के संबंध में कारण पूछा तो कर्मचारियों ने वहीं रटी-रटाई बात कहीं की मरीजों के पास बैंक अकाउंट नहीं है.
उन्होंने फटकार लगाते हुए मरीजों का कैंप लगाकर खाते खुलवाकर पैसा भुगतान करने की बात कही. लेकिन उनके जाने के बाद कर्मचारी फिर शांत हो गये. अब कर्मचारियों की शिकायत है कि बैंक का सहयोग नहीं मिलता है तथा पैसे भेजने वाला डीबीटीएल पोर्टल सही ढंग से काम नहीं कर रहा है. सच्चाई यह है कि यक्ष्मा विभाग द्वारा तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराएं जाने के बाद भी जिले के करीब 25 प्रतिशत टीबी मरीजों को देखने एसटीएस व एसटीएलएस नहीं जाते है.
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