रुक्मिणी का हरण कर कृष्ण ने किया विवाह: द्वारिका दास

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महाराजगंज : प्रखंड क्षेत्र के तक्कीपुर शिव मंदिर पर रुद्र महायज्ञ के छठे दिन रविवार को द्वारिका से आये द्वारिका दास उर्फ फलाहारी बाबा ने रुक्मिणी हरण का वर्णन किया. महाराज ने कहा कि शिशुपाल रुक्मिणी से विवाह करना चाहता था. रुक्मिणी के भाई रुक्म का शिशुपाल परम मित्र था. रुक्म भी अपनी बहन का […]

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महाराजगंज : प्रखंड क्षेत्र के तक्कीपुर शिव मंदिर पर रुद्र महायज्ञ के छठे दिन रविवार को द्वारिका से आये द्वारिका दास उर्फ फलाहारी बाबा ने रुक्मिणी हरण का वर्णन किया. महाराज ने कहा कि शिशुपाल रुक्मिणी से विवाह करना चाहता था. रुक्मिणी के भाई रुक्म का शिशुपाल परम मित्र था. रुक्म भी अपनी बहन का विवाह शिशुपाल से करना चाहता था. रुक्म के माता-पिता शिशुपाल से रुक्मिणी की शादी नहीं करना चाहते थे.

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बावजूद रुक्म ने अपनी बहन का शिशुपाल के साथ रिश्ता तय कर विवाह की तैयारियां शुरू कर दी थीं. रुक्मिणी को जब इस बात का पता लगा, तो वह बड़ी दुखी हुई. उसने अपना मनसा प्रकट करने के लिए एक ब्राह्मण को द्वारिका श्रीकृष्ण के पास भेजा. रुक्म और शिशुपाल के हठ मनसा को तोड़ने के लिए ही श्रीकृष्ण को रुक्मिणी का हरण कर उनसे विवाह करना पड़ा. महाराज ने कहा शिशुपाल कृष्ण की बुआ का लड़का था.
श्रीकृष्ण ने अपनी बुआ को वचन दिया था कि मैं इसके 100 अपराध क्षमा कर दूंगा. कालांतर में शिशुपाल ने अनेक बार श्रीकृष्ण को अपमानित किया था. भगवान श्रीकृष्ण को कई चुनौतियों के साथ गाली दी थी. लेकिन श्रीकृष्ण ने उन्हें हर बार क्षमा कर दिया करते थे. एक यज्ञ समारोह में शिशुपाल ने श्रीकृष्ण को भरी सभा में अपमानित करने की सारी हदें पार कर दीं. फिर भी श्रीकृष्ण ने चेताया शिशुपाल अभी भी चेत जाओ अब अंतिम समय है. बावजूद शिशुपाल नहीं माना.
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