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सीवान : 20 गांवों में दहेज व बाल विवाह के खिलाफ अलख जगा रहीं उर्मिला

Updated at : 17 Oct 2017 6:37 AM (IST)
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सीवान : 20 गांवों में दहेज व बाल विवाह के खिलाफ अलख जगा रहीं उर्मिला

समाज सुधार : 200 से अधिक परिवारों को टूटने से बचाया विवेक कुमार सिंह सीवान : जिले के गोरेयाकोठी प्रखंड के हरपुर गांव के स्व. रघुनाथ सिंह की बेटी बहन उर्मिला ने 200 से अधिक परिवारों को टूटने से बचाया है और उनके जीवन में उमंग लाने का कार्य किया है. अब वह दहेजमुक्त शादी […]

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समाज सुधार : 200 से अधिक परिवारों को टूटने से बचाया
विवेक कुमार सिंह
सीवान : जिले के गोरेयाकोठी प्रखंड के हरपुर गांव के स्व. रघुनाथ सिंह की बेटी बहन उर्मिला ने 200 से अधिक परिवारों को टूटने से बचाया है और उनके जीवन में उमंग लाने का कार्य किया है. अब वह दहेजमुक्त शादी व बाल विवाह के खिलाफ अभियान चला रही हैं.
बसंतपुर के हरियामा गांव की पूजा कुमारी व उसी गांव की शकुंतला कुमारी का बाल विवाह उन्होंने रुकवाया. साथ ही गोपालगंज जिले के बैकुंठपुर प्रखंड के गंमहारी के मंटु कुमार साह व भगवानपुरहाट प्रखंड के बिठुना गांव निवासी अंगिका कुमारी की दहेजमुक्त शादी करायी है. इसको लेकर पहले उन्हें भारी विरोध का सामना करना पड़ा. लेकिन अब लोग उर्मिला की तारीफ करते हैं.
उनका यह कार्य बसंतपुर प्रखंड के 20 गांवों में 25 वर्षों से किया जा रहा है. बहन उर्मिला ने घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न और बाल विवाह पर वर्ष 1992 में कार्य शुरू किया और धीरे-धीरे सभी पंचायतों में कार्य करने लगीं. इसको लेकर समय-समय पर प्रशिक्षण आयोजित कर लोगों को जागरूक भी करती रही हैं. वे गोपालगंज जिले के हलुवार पिपरा की बहू हैं.
लेकिन शुरू से ही बसंतपुर के सिपाह गांव में रह रही हैं और बसंतपुर के ही यमुना प्रोजक्ट हाईस्कूल में सहायक शिक्षक पद पर कार्यरत हैं. उन्होंने महिलाओं को चौखट से बाहर निकालने का भी कार्य किया है. यही नहीं, महिलाओं में स्वावलंबन की अलख भी जगा चुकी हैं. क्षेत्र के लोग उन्हें प्यार से दीदी भी कह कर पुकारते हैं.
25 वर्ष पूर्व शुरू की थी सखी री महिला विकास संस्थान
उन्होंने सखी री महिला विकास संस्थान की शुुरुआत 1992 के आसपास की थी. उनका सफर 1990 के करीब आरंभ हुआ, जब वह वनवासी सेवा आश्रम, यूपी के साथ संपूर्ण साक्षरता अभियान से जुड़ीं. उर्मिला मानती हैं कि महिलाओं के विकास के लिए सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक स्वावलंबन जरूरी है.
उन्होंने बताया कि बचपन में उनके पढ़ने-लिखने व बाहर निकलने को लेकर सामाजिक विरोध होता था. पिता ने मैट्रिक पास होते ही शादी भी कर दी. लेकिन उर्मिला ने पढ़ाई जारी रखी और एमए की पढ़ाई पूरी की. शिक्षक की भी नौकरी पकड़ ली.
यही नहीं, जीवन में कुछ करने के लिए परिवार के सदस्यों का भी विरोध सहा. लेकिन न तो परिवार टूटने दिया और न अपना काम आज तक बंद किया. वे कहती हैं, उस दौर में मां रामपति देवी का समर्थन मिला. उन्होंने बताया कि घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न और बाल विवाह को लेकर आठ पंचायतों में कार्य चल रहा है. 20 गांवों को सघन रूप से इसको लेकर गोद लिया गया है.
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