पवित्रता व निस्वार्थ प्रेम की प्रतिमूर्ति थी मम्मा

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पवित्रता व निस्वार्थ प्रेम की प्रतिमूर्ति थी मम्मा

ब्रह्माकुमारी संस्था की प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदंबा सरस्वती का 60वां स्मृति दिवस मंगलवार को आध्यात्मिक ज्ञान दिवस के रूप में नगर के पुरानी एक्सचेंज रोड स्थित शिव शक्ति भवन में मनायी गयी.

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सीतामढ़ी. ब्रह्माकुमारी संस्था की प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदंबा सरस्वती का 60वां स्मृति दिवस मंगलवार को आध्यात्मिक ज्ञान दिवस के रूप में नगर के पुरानी एक्सचेंज रोड स्थित शिव शक्ति भवन में मनायी गयी. उपस्थित भाई बहनों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की. केंद्र की प्रभारी वंदना बहन ने उन्हें याद करते हुए कहा कि मम्मा यज्ञ के आदि रत्नों में सबसे श्रेष्ठ हैं, जो पवित्रता व नि:स्वार्थ प्रेम की प्रतिमूर्ति थीं. उनके चेहरे पर मातृत्व प्रेम झलकता था. मां जगदंबा एक शक्ति स्वरूपा थीं. उन्होंने सदैव देने की भावना रखीं. यद्यपि वे बहुत छोटी थी, फिर भी सभी उन्हें हृदय से मम्मा कहते थे. उन्होंने कई लोगों को नया जीवन दिया. उनकी विवेक शक्ति अदभुत थी. मम्मा हर कर्म खुद करती थीं. कार्यकम में मुजफ्फरपुर की बहन श्वेता ने मातेश्वरी जगदंबा के गीत प्रस्तुत की. बाद में सभी भाई बहनों को ब्रह्मा भोग दिया गया.कार्यक्रम में बीके रेणु, डॉ रेणु चटर्जी, इं राजकिशोर नारायण यादव, ज्योति, बिंदु, रीमा बहन, शत्रुघ्न व महेश समेत दर्जनों भाई बहन शामिल हुए.

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