पुपरी में पांच दिवसीय बकरी पालन प्रशिक्षण शुरू, किसानों को वैज्ञानिक तरीके से आमदनी बढ़ाने की दी जानकारी

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दीप प्रज्ज्वलित करते अतिथि व वैज्ञानिक.

सीतामढ़ी में बकरी पालन प्रशिक्षण का 5 दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया गया है. किसानों को वैज्ञानिक तरीकों से बकरी पालन कर बेहतर आमदनी हासिल करने की जानकारी दी जा रही है. इसमें अर्द्ध सघन और सघन पद्धतियों के साथ-साथ समेकित कृषि प्रणाली पर भी जोर दिया गया है.

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Sitamarhi News: कृषि विज्ञान केंद्र, बलहा मकसूदन, सीतामढ़ी में शुक्रवार से पांच दिवसीय बकरी पालन प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ. प्रशिक्षण का उद्घाटन मुख्य अतिथि सह बीडीओ परमानंद पंडित एवं केंद्र के वरीय वैज्ञानिक व प्रधान डॉ. राम ईश्वर प्रसाद ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया. कार्यक्रम में किसानों और पशुपालकों को वैज्ञानिक तरीके से बकरी पालन कर बेहतर आमदनी हासिल करने की जानकारी दी गई.

Pupri News: बकरी पालन की दो पद्धतियों की दी जानकारी

मुख्य अतिथि परमानंद पंडित ने कहा कि बकरी बहुपयोगी पशु है, जिससे मांस, दूध, उर्वरक सहित कई उपयोगी सामग्री प्राप्त होती है. उन्होंने बताया कि बकरी पालन मुख्य रूप से अर्द्ध सघन और सघन पद्धति से किया जाता है.

अर्द्ध सघन पद्धति में बकरियों को चार से छह घंटे तक खुले खेतों में चरने के लिए छोड़ा जाता है, जबकि सघन पद्धति में उनके भोजन और रहने की पूरी व्यवस्था उनके आवास पर ही की जाती है. उन्होंने किसानों को अपनी सुविधा और संसाधनों के अनुसार पद्धति अपनाने की सलाह दी.

समेकित कृषि प्रणाली अपनाने पर जोर

वरीय वैज्ञानिक व प्रधान डॉ. राम ईश्वर प्रसाद ने कहा कि वर्तमान समय में जलवायु अनुकूल कृषि और समेकित कृषि प्रणाली को बढ़ावा देने की जरूरत है. समेकित कृषि में खेती, बागवानी, पशुपालन, मछलीपालन और मुर्गीपालन जैसी गतिविधियों को शामिल किया जाता है.

उन्होंने कहा कि विभिन्न उद्यमों को एक साथ अपनाने से प्राकृतिक आपदा की स्थिति में भी किसी न किसी गतिविधि से किसानों की आमदनी बनी रह सकती है. इस व्यवस्था में बकरी पालन को महत्वपूर्ण व्यवसाय के रूप में अपनाया जा सकता है.

वैज्ञानिक तरीके से बकरी पालन से बढ़ेगी आमदनी

पशुपालन वैज्ञानिक डॉ. किंकर कुमार ने कहा कि कम पूंजी में बेहतर आमदनी के लिए वैज्ञानिक विधि से बकरी पालन लाभकारी व्यवसाय साबित हो सकता है. उन्होंने बताया कि अच्छी नस्ल की बकरी करीब डेढ़ वर्ष में औसतन पांच बच्चे दे सकती है, जिससे पशुपालकों की आमदनी बढ़ाने में मदद मिलती है.

संतुलित आहार और उन्नत नस्ल पर दिया जोर

उद्यान वैज्ञानिक मनोहर पंजीकार, सस्य वैज्ञानिक सच्चिदानंद प्रसाद, गृह वैज्ञानिक डॉ. सलोनी चौहान एवं पादप रक्षा वैज्ञानिक डॉ. श्रुति मोसेस ने बेहतर मांस और दूध उत्पादन के लिए बकरियों को संतुलित आहार देने की सलाह दी.

उन्होंने कहा कि बकरियों के आहार में हरा चारा, सूखा चारा, दाना और खनिज मिश्रण का संतुलित उपयोग जरूरी है. वैज्ञानिकों ने ब्लैक बंगाल, सिरोही, बरबरी और जमुनापारी जैसी उन्नत नस्लों के पालन की जानकारी देते हुए बताया कि इनसे प्रति इकाई करीब 30 किलो तक मांस और सामान्य से अधिक दूध प्राप्त किया जा सकता है.

बड़ी संख्या में पशुपालक किसान हुए शामिल

प्रशिक्षण कार्यक्रम में बीएओ आशुतोष कुमार, अली राजा, नक्की, नंदकिशोर गौतम, ललन राम समेत बड़ी संख्या में पशुपालक एवं किसान शामिल हुए. प्रशिक्षण के दौरान किसानों को बकरी पालन से जुड़े विभिन्न व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी दी जा रही है.

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