साहत्यिकि योगदान के लिए सम्मानित हुए विहवल

Updated:
विज्ञापन

साहित्यिक योगदान के लिए सम्मानित हुए विहवल फोटो नंबर-7, कवि गोष्ठी में मौजूद कवि डुमरा : जिला मुख्यालय डुमरा स्थित गीता भवन के वाचनालाय में रविवार को प्रसाद साहित्य परिषद की मासिक कवि-गोष्ठी का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षत ई शचींद्र कुमार हीरा ने की. संचालन गीतकार गीतेश ने किया. इस अवसर पर हिंदी […]

विज्ञापन

साहित्यिक योगदान के लिए सम्मानित हुए विहवल फोटो नंबर-7, कवि गोष्ठी में मौजूद कवि डुमरा : जिला मुख्यालय डुमरा स्थित गीता भवन के वाचनालाय में रविवार को प्रसाद साहित्य परिषद की मासिक कवि-गोष्ठी का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षत ई शचींद्र कुमार हीरा ने की. संचालन गीतकार गीतेश ने किया. इस अवसर पर हिंदी साहित्य में विशेष योगदान के लिए कवि सह स्टेशन अधीक्षक बच्चा प्रसाद विह्वल को संस्था की ओर से दिल्ली निवासी वयोवृद्ध साहित्यकार, समाजसेवी व गीता भवन के ट्रस्टी शशि भूषण प्रसाद सिन्हा व ममता वर्मा द्वारा अंग वस्त्र, प्रशस्ति-पत्र, पुष्प गुच्छ व नगद राशि देकर सम्मानित किया गया. — कवि गोष्ठी का हुआ आयोजनइस अवसर पर कवि गोष्ठी का आगाज गीतकार गीतेश की रचना ‘ दिल में मुहब्बत के कहां अब फूल खिलते हैं, हंस कर गले कहां अब लोग मिलते है’ से हुआ. ईं शचींद्र कुमार हीरा की ‘ सालों साल से मुझे सालती, जाति-पाति की जालिम भ्रांति’, अधिवक्ता अशोक कुमार सिंह की ‘ क्या करेंगे मोल हीरे कीमती है जिंदगी’ एवं डॉ आनंद प्रकाश वर्मा की रचना ‘ यूं तो कोई भी रिश्ते ताउम्र कहां ठहरते है, फिर भी अपनेपन को कुछ भरम बनाये रखना’ ने महफिल को गति प्रदान की. वाल्मीकि कुमार की ‘जहां हकदार कुरसी का बना है पालतू कुत्ता, नहीं खता कभी गाजर उसे मुर्गा सुहाता है’, रामकृष्ण सिंह वेदांती की ‘ अब बदाल भी बरसने लगे हैं सरजमीं देख कर’, उमा शंकर लोहिया की ‘ बैठा मंदिर में सहमा सहमा राम है, देखो रावण पा रहा सम्मान राहों पर’ एवं जितेंद्र झा आजाद की रचना ‘ मुफलिसी चाहे कितना भी सताये मगर जिंदगी जीने का अलग अंदाज होता है’ ने महफिल को जवां बना दिया. बच्चा प्रसाद विह्वल की ‘ क्या करे ये गिले-शिकवे उस जालिम जमाने से’, तौहीद अश्क की ‘ मैं हर रोज मरता हूं मगर मेरी मैय्यत नहीं जाती’, डॉ शत्रुघ्न यादव की ‘ हम भारत में रहते है, शफी आजिज की गजल ‘चमन तबाह है बागवां सफर में है’ एवं जिला पार्षद अलाउद्दीन बिस्मिल की गजल ‘ हर शहर हर गली अब यही शोर है, हर तरफ हर जगह जुल्म का जोर है’, एवं सुरेश वर्मा, मुरलीधर झा मधुकर, रामबाबू सिंह, सुरेश लाल कर्ण, गुफरान राशिद व विकास कुमार ने भी खूब वाहवाही लूटी.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन