मां-पिता व भाई के हत्यारे शमीम की हैवानियत का दर्द
6 Jun, 2018 4:54 am
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सीतामढ़ी : मां-पिता व भाई के हत्यारे शमीम की हैवानियत का दर्द लिए ढाका से बाजपट्टी स्थित नाना के घर पहुंची सिमरन की बदकिस्मती ने यहां भी उसका पीछा नहीं छोड़ा था. गैरों से इंसाफ की जंग लड़ रही सिमरन को उसके सगे मामा ने भी हवस का शिकार बनाया. जब मन भर गया तो […]
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सीतामढ़ी : मां-पिता व भाई के हत्यारे शमीम की हैवानियत का दर्द लिए ढाका से बाजपट्टी स्थित नाना के घर पहुंची सिमरन की बदकिस्मती ने यहां भी उसका पीछा नहीं छोड़ा था.
गैरों से इंसाफ की जंग लड़ रही सिमरन को उसके सगे मामा ने भी हवस का शिकार बनाया. जब मन भर गया तो देह व्यापार कराना शुरू कर दिया. सिमरन ने पुलिस को बताया था कि ढाका में शमीम के तहखाने से मुक्त होने के बाद वह अपने मामा की शरण में आयी थी. कुछ दिनों तक सब कुछ ठीक रहा. बाद में उसके मामा दिग्विजय मिश्रा ने उसके साथ शारीरिक संबंध बनाना शुरू किया. मन भर जाने पर वह उससे देह व्यापार कराने लगा. गांव के अलावा बाहर के लोग भी रात में आकर उसके साथ जबरन संबंध बनाने लगे. सिमरन का दावा है कि देह व्यापार के दलदल में पड़ने के बाद उसने सबूत के तौर पर संबंध बनाते समय मामा का वीडियो रिकार्डिंग भी कर लिया है. दिग्विजय मिश्रा तीन साल से बंधक बनी सिमरन को ढाका पुलिस ने कराया था.
इसके बाद पुलिस ने सिमरन की सहमति पर उसे ननिहाल पहुंचा दिया गया.
शमीम की गिरफ्तारी के बाद जगी थी न्याय की आस: 24 फरवरी 2015 को ढाका पुलिस ने छापेमारी कर तीन साल से एक कमरे में बंधक बनी सिमरन को मुक्त करा नाना के घर बाजपट्टी भेजा था. जहां शमीम केस उठाने का दबाव बना रहा था. 26 सितंबर 2016 को शमीम के गुर्गे ने उसके कमरे में घुस कर दुष्कर्म का प्रयास किया था. वहीं सिमरन की हत्या की भी कोशिश की थी. हालांकि, उसकी सुरक्षा में तैनात महिला आरक्षियों ने मौके से ही आरोपित को दबोच लिया था. 24 नवंबर 2016 को ढाका पुलिस ने शमीम को गिरफ्तार कर लिया था. शमीम की गिरफ्तारी के बाद सिमरन को न्याय मिलने की उम्मीद जगी थी.
जिस मामा पर किया भरोसा, वह
भी निकला दगाबाज
गैरों से इंसाफ की जंग लड़ रही सिमरन को मामा ने भी बनाया
हवस का शिकार
तीन साल से बंधक बनी सिमरन को ढाका पुलिस ने कराया था मुक्त
तबाह हुआ हंसता-खेलता परिवार
सिमरन मूल रूप से डुमरा थाना क्षेत्र के एक गांव की रहनेवाली है. उसके पिता राजीव कुमार उर्फ गूंगा मूक बधिर था. भाई अमनदीप व सिमरन समेत चार लोगों का हंसता-खेलता परिवार था. अच्छी-खासी संपत्ति वाले इस परिवार को मानो जमाने की नजर लग गयी. तीन जनवरी 2009 को उसके भाई अमनदीप (13) का स्कूल जाते वक्त फिरौती के लिए अपहरण कर लिया गया. बाद में अपहर्ताओं ने उसकी हत्या कर दी. बेटे की मौत के बाद परिवार सदमे से बाहर आता, इसी बीच ढाका निवासी शमीम का मां खुशबू देवी से प्रेम-प्रसंग हो गया. प्रेमी के साथ मिल कर खुशबू ने ही अपने पति राजीव की हत्या करा दी. 31 दिसंबर 2012 को राजीव का शव शिवहर-पूर्वी चंपारण जिले के सीमा पर मिला था. इसके बाद खुशबू ने शमीम के साथ शादी कर ली. शमीम, खुशबू व बेटी के साथ सिलीगुड़ी चला गया. जहां उसने मौका देख खुशबू की हत्या कर दी. बेटी के साथ ढाका लौटे शमीम की नजर खुशबू की प्रॉपर्टी पर थी, वहीं दूसरी ओर सिमरन के जिस्म पर. उसने पहले बाप-बेटी के रिश्ते को शर्मसार करते हुए सिमरन के साथ जिस्मानी संबंध बनाने की कोशिश की. सिमरन के विरोध करने के बाद उसे बंधक बना कर एक कमरे में बंद कर दिया. इस दौरान नशे की सूई देकर उससे देह व्यापार भी कराता रहा. आखिर में शमीम ने सिमरन के साथ निकाह करने का फैसला लिया. निकाह के बाद उसकी संपत्ति पर कब्जा जमाने के बाद सिमरन को अरब के एक व्यापारी से सात लाख में बेचने की तैयारी भी कर रखी थी.
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