थानेदार की पहल पर टूटने से बचा एक परिवार
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :19 Apr 2018 6:40 AM (IST)
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सीतामढ़ी : महिला थानाध्यक्ष कुमारी विभा रानी की पहल से एक परिवार टूटने से बच गया. पिछले पांच वर्ष से पति-पत्नी के बीच चल रहे विवाद को थानाध्यक्ष ने पहल कर सुलझा दिया. एक-दूसरे से आंख चुराते पति-पत्नी के दिल पर महिला थानाध्यक्ष की बात ने ऐसा गहरा असर डाला कि धर्मेंद्र और रेखा के […]
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सीतामढ़ी : महिला थानाध्यक्ष कुमारी विभा रानी की पहल से एक परिवार टूटने से बच गया. पिछले पांच वर्ष से पति-पत्नी के बीच चल रहे विवाद को थानाध्यक्ष ने पहल कर सुलझा दिया. एक-दूसरे से आंख चुराते पति-पत्नी के दिल पर महिला थानाध्यक्ष की बात ने ऐसा गहरा असर डाला कि धर्मेंद्र और रेखा के चेहरे खिल उठे और दोनों ने मां-बाप व प्रबुद्ध लोगों की मौजूदगी में राजी-खुशी रहने की इच्छा व्यक्त की.
इसी प्रकार पिछले पांच वर्षों से चले आ रहे पारिवारिक तनाव का बुधवार को पटाक्षेप हो गया तथा रेखा को लेकर धर्मेंद्र घर लौट गया. दोनों के पारिवारिक सदस्यों की मौजूदगी में पंसस राकेश कुमार, सरपंच पति राम जुलुम महतो, भाजपा जिला मंत्री भोला महतो एवं जदयू प्रदेश सचिव किरण गुप्ता ने पहल के लिए महिला थानाध्यक्ष की सराहना की. जदयू प्रदेश नेत्री ने कहा कि यदि हर पुलिस अफसर केस दर्ज करने की बजाय, छोटे-छोटे विवाद को खुद पहल कर समझौता करा दे तो फिर कोई परिवार नहीं टूटेगा. वहीं घर व समाज में खुशियां भी बरकरार रहेगी.
क्या है पूरा मामला
नगर के कोट बाजार निवासी जगदीश ठाकुर ने अपनी पुत्री रेखा कुमारी की शादी 25 फरवरी 2013 को परिहार थाना क्षेत्र के जगदर वार्ड संख्या-12 निवासी स्व किशोरी ठाकुर के पुत्र धर्मेंद्र ठाकुर के साथ हिंदू रीति-रिवाज से किया था. शादी के एक साल तक सबकुछ ठीक-ठाक चल रहा था. इसके बाद पति-पत्नी के रिश्ते में दरार आने लगा. इसका असर दोनों के परिवार पर भी पड़ा. तंग होकर रेखा ससुराल से मायके चली आयी. दोनों परिवार की ओर से सामाजिक तौर पर मामले को सुलझाने का प्रयास किया गया, लेकिन संबंध खराब ही होता चला गया.
15 फरवरी 2018 को जब रेखा ससुराल गयी तो ससुराल वालों ने रहने नहीं दिया. 10 अप्रैल 2018 को थक हारकर वह मां-बाप के साथ महिला थाने पहुंची और प्राथमिकी दर्ज करने के लिए आवेदन दिया. उसने पति पर दूसरी शादी रचाने का भी आरोप लगाया. आवेदन पर थानाध्यक्ष ने जब जांच-पड़ताल की. लड़का व लड़की पक्ष के लोगों को बैठाकर पहल कर कानूनी पचड़े में नहीं पड़ने की सलाह दी. थानाध्यक्ष की बातों का दोनों परिवार पर यह असर हुआ कि दोनों परिवार समझौता करने पर सहमत हो गया.
कहती हैं महिला थानाध्यक्ष
महिला थानाध्यक्ष कुमारी विभा रानी ने कहा कि पति-पत्नी के बीच झगड़े को बातचीत से ही सुलझाया जा सकता है. समझौते से दोनों के मनमुटाव का गांठ नहीं पड़ता है. जबकि कानूनी प्रक्रिया में मिलने के बाद भी मनमुटाव की स्थिति बनी रहती है. केस-मुकदमा इसका हल नहीं है.
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