जख्म प्रतिवेदन लेने के िलए सदर अस्पताल पहुंची पुलिस

Published at :23 Dec 2017 4:51 AM (IST)
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जख्म प्रतिवेदन लेने के िलए सदर अस्पताल पहुंची पुलिस

सीतामढ़ी : जख्म प्रतिवेदन को लेकर प्रभात खबर में शुक्रवार को ‘धूल फांक रहे 400 जख्म प्रतिवेदन’ खबर प्रकाशन के बाद पुलिस व स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया. बन कर तैयार जख्म प्रतिवेदन को लेकर सदर अस्पताल में विभिन्न थाना की वाहनें लगने लगी. इस क्रम में रीगा, रून्नीसैदपुर व सुरसंड के अलावा विभिन्न थाना […]

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सीतामढ़ी : जख्म प्रतिवेदन को लेकर प्रभात खबर में शुक्रवार को ‘धूल फांक रहे 400 जख्म प्रतिवेदन’ खबर प्रकाशन के बाद पुलिस व स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया.

बन कर तैयार जख्म प्रतिवेदन को लेकर सदर अस्पताल में विभिन्न थाना की वाहनें लगने लगी. इस क्रम में रीगा, रून्नीसैदपुर व सुरसंड के अलावा विभिन्न थाना की पुलिस ने सदर अस्पताल से बना हुआ जख्म प्रतिवेदन प्राप्त कर लिया. एसपी हरि प्रसाथ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दूरभाष पर कई थानाध्यक्षों की जम कर क्लास ली. समाचार लिखे जाने तक रीगा, रून्नीसैदपुर व सुरसंड की पुलिस ने बन कर तैयार 400 में से 170 जख्म प्रतिवेदन प्राप्त कर लिया. बाकी जख्म प्रतिवेदन ले जाने के लिए भी पुलिस वालों के आने का सिलसिला जारी था. इधर, सिविल सर्जन डा बिंदेश्वर शर्मा ने भी चिकित्सकों को समय पर जख्म प्रतिवेदन बनाने की चेतावनी दी है.
पीड़ित व्यक्ति को नहीं मिल पाता न्याय: प्रभात पड़ताल में यह सामने आया था कि जख्म प्रतिवेदन के कारण कई पीड़ित लोगों को समय पर न्याय नहीं मिल पा रहा है. जिसमें स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही उजागर होकर सामने आयी. यह बात भी सामने आयी कि जिला जज ने जख्म प्रतिवेदन को लेकर सिविल सर्जन को कार्रवाई की चेतावनी दी है. एसपी हरि प्रसाथ एस भी अपने स्तर से सिविल सर्जन को पत्र भेज चुके है. यहां बता दे कि सदर अस्पताल में 400 से अधिक जख्म प्रतिवेदन तैयार रहने के बाद भी कई माह से फाइल में गुम हैं. सभी जख्म प्रतिवेदन वर्ष 2016-17 के बीच का है, जो बन कर तैयार है. 60 ऐसे भी जख्म प्रतिवेदन है, जो अब तक नहीं बन सका है. जिसके कारण पीड़ित आदमी परेशान हो रहे है.
24 घंटे के अंदर बनाना
है इंज्यूरी रिपोर्ट
बनाये गये नियम के अनुसार 24 घंटा के अंदर चिकित्सक को 24 घंटा के अंदर जख्म प्रतिवेदन बना कर दे देना है. जख्म प्रतिवेदन के कारण पीड़ित व्यक्ति को न्याय नहीं मिल पाता. अगर समय पर जख्म प्रतिवेदन न्यायालय में जमा हो तो पीड़ित को न्याय व न्यायालय में केस को बोझ भी हल्का होगा. जख्म प्रतिवेदन के आधार पर प्राथमिकी में भादवि की विभिन्न धाराओं को लगाया जा सकेगा. दफा को जमानतीय व गैर जमानतीय करने की संभावना भी समाप्त हो जायेगी.
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