सीतामढ़ी जेल से अपराधी व नक्सली चलाते हैं फेसबुक

Published at :20 Dec 2017 2:21 AM (IST)
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सीतामढ़ी जेल से अपराधी व नक्सली चलाते हैं फेसबुक

जेल प्रशासन है बेखबर चलाते हैं फेक अकाउंट सीतामढ़ी : सीतामढ़ी जेल में बंद हार्डकोर नक्सली व कई अपराधी मोबाइल फोन का उपयोग करते हुए अपना फेसबुक अकाउंट चला रहे हैं. फेसबुक फेक नाम पर चलाया जा रहा है. इस मामले से जेल प्रशासन बेखबर बना हुआ है. विभिन्न खुफिया एजेंसियों ने इस संबंध में […]

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जेल प्रशासन है बेखबर

चलाते हैं फेक अकाउंट
सीतामढ़ी : सीतामढ़ी जेल में बंद हार्डकोर नक्सली व कई अपराधी मोबाइल फोन का उपयोग करते हुए अपना फेसबुक अकाउंट चला रहे हैं. फेसबुक फेक नाम पर चलाया जा रहा है. इस मामले से जेल प्रशासन बेखबर बना हुआ है. विभिन्न खुफिया एजेंसियों ने इस संबंध में सरकार व प्रशासन को आगाह किया है. इस सूचना के बाद पुलिस के आला अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया है. सीतामढ़ी के एसपी व जिला प्रशासन को मामले की जांच कर त्वरित कार्रवाई का आदेश भी दिया गया है.
खुफिया सूत्रों की मानें तो शिवाइपट्टी थाना के रामनगर निवासी हार्डकोर नक्सली सुहाग पासवान सीतामढ़ी जेल में फेसबुक चलाता है और इसके माध्यम से संगठन की गतिविधियों पर भी नजर रख रहा है. वह फेसबुक दूसरे के नाम से चलाता है. इसके अलावा भी सीतामढ़ी जेल में कई अपराधियों द्वारा भी फेसबुक चलाये जाने की खुफिया रिपोर्ट पर पुलिस ने जेल में छापेमारी की.
अाठवीं की पढ़ाई छोड़ सुहाग ने थामा था नक्सलियों का हाथ
शिवाई पट्टी थाना क्षेत्र के रामनगर निवासी सुहाग पासवान ने आठवीं की पढ़ाई छोड़कर नक्सलियों का हाथ थाम लिया था. नक्सलियों से हाथ मिलाते ही सुहाग संगठन के विस्तार में लग गया. संगठन विस्तार में उसके कार्यों को देखकर उसे जोनल कमांडर के रूप में ताजपोशी किया गया. उत्तर बिहार में संगठन को सुहाग ने काफी मजबूत कर दिया, जिसके बाद गिद्धा मेले में फिर उत्तर बिहार सब जोनल सचिव के रूप में नक्सलियों ने ताजपोशी की. वर्ष 2007 से 2011 के बीच सुहाग ने इलाके में कई हत्या और निर्माण कंपनियों के कैंप पर हमला कर आतंक का माहौल कायम कर दिया. मीनापुर प्रखंड के पैगंबरपुर पंचायत के मुखिया प्रेमचंद्र की हत्या कर दी. इतना ही नहीं, मोतिहारी जिले के राजेपुर थाना क्षेत्र स्थित नारायणपुर स्टेट के मालिक रामदेव सिंह व अशोक सिंह की भी हत्या कर दी.
सुहाग के इस खौफ के बाद नक्सलियों ने जमकर लेवी वसूली शुरू कर दी. सुहाग पुलिस के लिए सरदर्द बन गया जिसके बाद पुलिस उसे गिरफ्तार करने के लिए लगातार छापेमारी शुरू कर दी. पुलिस की दबिश को देख सुहाग पहले दिल्ली में जाकर छिप गया, फिर वहां से वह गुजरात चला गया. वर्ष 2012 के अक्तूबर माह में एसटीएफ के जवानों ने उसे गुजरात के सूरत से गिरफ्तार कर लिया. उसके ठिकाने पुलिस ने एके 47 सहित कई हथियार भी बरामद किया गया था.
नक्सलियों की सूचना पर एसडीओ सदर सत्येंद्र प्रसाद के नेतृत्व में काफी संख्या में पुलिस बल के साथ छापेमारी शुरू की गयी. बताया जाता है कि जोनल आइजी सुनील कुमार को जानकारी मिली िक डुमरा मंडलकारा में हार्डकोर नक्सली सुहाग पासवान सहित कई अपराधी फेसबुक चला रहे हैं. वे अपने साथियों से इस माध्यम से संपर्क भी बनाये हुए हैं. जिसके बाद आइजी ने एसपी को छापेमारी का आदेश िदया.
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