करोड़ों का गबन कर ग्राहक सेवा केंद्र का संचालक फरार
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :12 Dec 2017 5:18 AM (IST)
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पिता – पुत्र के नाम से है अलग – अलग केंद्र का कोड सीतामढ़ी / बेलसंड : दो ग्राहक सेवा केंद्र संचालक द्वारा ग्राहकों का रुपया गबन कर लिया गया है. गबन की राशि करोड़ों में बतायी जा रही है. हालांकि जांच के बाद ही गबन की पूरी राशि का खुलासा होगा. दोनों केंद्र के […]
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पिता – पुत्र के नाम से है अलग – अलग केंद्र का कोड
सीतामढ़ी / बेलसंड : दो ग्राहक सेवा केंद्र संचालक द्वारा ग्राहकों का रुपया गबन कर लिया गया है. गबन की राशि करोड़ों में बतायी जा रही है. हालांकि जांच के बाद ही गबन की पूरी राशि का खुलासा होगा. दोनों केंद्र के संचालक रिश्ते में पिता – पुत्र है. फिलहाल केंद्रों को बंद कर दोनों संचालक फरार है. यह मामला भले ही किसी को पच नहीं रहा होगा, लेकिन सच है. गबन की बाबत एक प्राथमिकी भी हो चुकी है.
शाखा प्रबंधक से शिकायत : गत दिनों ग्राहकों को पता चला कि उसके खाते से अवैध रूप से राशि निकाल ली गयी है या जो रुपया जमा करने के लिए केंद्र पर दिया था, उसे खाते में जमा नहीं कर गबन कर लिया गया है.
तब विनोद चौधरी, महंत चौधरी, सीताराम पंडित व सहदेव पंडित समेत अन्य ने शाखा प्रबंधक से लिखित शिकायत की. शाखा प्रबंधक ने मामले से क्षेत्रीय कार्यालय, दरभंगा को अवगत करा दिया है.
लोहासी का केंद्र चलता है अथरी में : रून्नीसैदपुर प्रखंड के अथरी में संचालित केंद्र का कोड देवकी के पिता राजेश कुमार सिंह के नाम से निर्गत है. हैरानी कि बात यह कि केंद्र खुलना था बेलसंड के लोहासी में, पर उसे दूसरे प्रखंड में खोल लिया गया. इसके पीछे क्या माजरा था, यह बैंक व संजीवनी के ही अधिकारी बता सकते है. कारण कि अधिकारी की मिलीभगत के बगैर कही का केंद्र कही संचालित नही हो सकता है. अथरी में केंद्र भारतेंदु नामक युवक चलाता है. कहने के लिए यह केंद्र भी बंद है, पर खबर मिली है कि गुपचुप तरीके से अब भी चलाया जा रहा है. इस बीच, मखनाहा केंद्र के एक ग्राहक महेश चौधरी के मुकदमे के आलोक में कोर्ट के आदेश पर गबन की बाबत बेलसंड थाना में प्राथमिकी दर्ज की गयी है.
क्या है पूरा मामला
प्रखंड के मखनाहा गांव में संचालित केंद्र के संचालक देवकीनंदन है. खास बात यह कि यह केंद्र मांची गांव में खोला जाना था, लेकिन खुला था मखनाहा में. यह जानकर भी स्टेट बैंक के अधिकारी खामोश थे. देवकी के केंद्र का कोड 3A450576 है। वह दीमक की तरह धीरे – धीरे ग्राहकों का रुपया चट करता रहा. इसकी भनक न तो किसी ग्राहक को लगी और न ही बैंक को. यहां तक कि उस संजीवनी विकास फाउंडेशन को भी खबर नहीं लगी, जिसके माध्यम से देवकी व उसके पिता को केंद्र चलाने का कोड मिला था.
कहते हैं शाखा प्रबंधक
स्टेट बैंक के शाखा प्रबंधक प्रमोद कुमार ने बताया कि ग्राहकों की शिकायत के आलोक में कार्रवाई को क्षेत्रीय कार्यालय को लिखा गया है. मखनाहा का केंद्र बंद है. अथरी के केंद्र का कोड रद्द करने के लिए पांच दिन पूर्व संजीवनी के अधिकारी को पत्र भेजा गया था. कार्रवाई की कोई खबर नहीं है.
प्रमोद कुमार, स्टेट बैंक के शाखा प्रबंधक
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