गवाही के लिए अधिकारियों पर गिरफ्तारी की तलवार

Author Niranjan Kumar|Edited by Amlesh prasad
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गिरफ्तारी की सांकेतिक  तस्वीर

गिरफ्तारी की सांकेतिक तस्वीर

शेखपुरा न्यायालय में गवाही के लिए नहीं आने वाले सरकारी अधिकारियों और पुलिसकर्मियों के खिलाफ कोर्ट ने जारी किया गैर-जमानतीय गिरफ्तारी वारंट।

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खुद घायल होने के बावजूद न्यायालय में नहीं आ रहे गवाही को शेखपुरा. न्यायालय कार्य के निष्पादन में सरकारी अधिकारियों की रुचि नहीं लेने के कारण न्यायालय में मुकदमों का निपटारा तेजी से नहीं हो पा रहा है. कई मामलों में स्वयं पीड़ित रहने के बावजूद सरकारी अधिकारी न्यायालय के बुलावे के बाद भी अपनी गवाही तक दर्ज कराने न्यायालय में उपस्थित नहीं हो रहे हैं. जिसमें प्रशासन के अधिकारियों के साथ-साथ पुलिस पर अधिकारी भी शामिल है. अधिकारी और पुलिस पदाधिकारी घटना के समय प्राथमिक की दर्ज कर लेना ही अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि मानते हैं. उसके बाद बरसों बरस तक मामले का अनुसंधान जारी रखना और न्यायालय कार्य से दूर रहना उनके कार्यशैली में शामिल दिखता है. स्थानीय न्यायालय द्वारा इस संबंध में ऐसे लेट लतीफ अधिकारियों के खिलाफ न्यायालय में हाजिर होने के लिए गैर जमानतीय गिरफ्तारी वारंट भी जारी किया है. लेकिन उसका भी तामिला नहीं हो पा रहा है. इस संबंध में विस्तार से जानकारी देते हुए जिला लोक अभियोजक उदय नारायण सिन्हा ने बताया कि सरकारी अधिकारियों और पुलिस पदाधिकारी द्वारा न्यायालय में गवाही नहीं दिये जाने का अभियोजन के कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है. गवाही नहीं होने के कारण न्यायालय में प्रभावी तरीके से साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जाने का लाभ बदमाशों को मिलने की संभावना तेज हो गयी है. उन्होंने बताया कि तत्कालीन कार्यपालक दंडाधिकारी नरेंद्र कुमार झा, एसडीओ श्याम किशोर प्रसाद सहित अन्य वरीय अधिकारियों पर किये गये हमले को लेकर मामला वर्षों से न्यायालय में लंबित है. इस मामले में स्वयं पीड़ित होने के बावजूद यह सभी न्यायालय में गवाही के लिए उपस्थित नहीं हो रहे हैं. इन सभी के खिलाफ अप्रैल माह में ही न्यायालय द्वारा गैर जमानतीय वारंट भी जारी किया गया है, लेकिन इसके बाद भी उनके कान पर जूं नहीं रेंगी. इस मामले में दारोगा दिनेश पासवान, अशोक कुमार मिश्रा, फूदी पासवान, सूर्यदेव प्रसाद आदि की गवाही भी लंबित है. उन्होंने बताया कि न्यायालय कार्यों के संबंध में समीक्षा बैठकों में स्थानीय पुलिस द्वारा अभियोजन कार्य में सभी प्रकार के सहयोग का आश्वासन दिया जाता है, लेकिन व्यवहार में उसे लागू नहीं करने के कारण पीड़ितों को नुकसान और बदमाशों को लाभ पहुंचाने की संभावना बढ़ गयी है.

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