सुस्त अधिकारियों से मांगा स्पष्टीकरण

Updated at : 12 Jul 2016 4:15 AM (IST)
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सुस्त अधिकारियों से मांगा स्पष्टीकरण

शेखपुरा : राजस्व उगाही में सुस्त लगभग एक दर्जन अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है. स्पष्टीकरण के माध्यम से राजस्व उगाही में तेजी लाने को भी कहा गया है. जिनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है उनमें जिला और प्रखंड स्तरीय अधिकारी शामिल हैं. एडीएम जवाहर लाल सिन्हा की अध्यक्षता में सोमवार को आंतरिक संसाधन की समीक्षा […]

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शेखपुरा : राजस्व उगाही में सुस्त लगभग एक दर्जन अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है. स्पष्टीकरण के माध्यम से राजस्व उगाही में तेजी लाने को भी कहा गया है. जिनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है उनमें जिला और प्रखंड स्तरीय अधिकारी शामिल हैं.

एडीएम जवाहर लाल सिन्हा की अध्यक्षता में सोमवार को आंतरिक संसाधन की समीक्षा की गयी.
समीक्षा बैठक में एडीएम सुबोध कुमार, भूमि सुधार उप समाहर्ता मो. युनूस खा, वरीय उप समाहर्ता मो. कामिल अख्तर, सिद्धार्थ, वाणिज्य कर पदाधिकारी, उत्पाद अधीक्षक वीकेश कुमार आदि मौजूद थे. बैठक की जानकारी देते हुए जिला सूचना व जनसंपर्क पदाधिकारी योगेंद्र कुमार लाल ने बताया कि राजस्व उगाही की समीक्षा बैठक में राष्ट्रीय बचत पदाधिकारी के उपस्थित नहीं रहने पर गहरी नाराजगी प्रकट की गयी तथा नोटिस भी जारी किया गया. कम राजस्व को लेकर मोटर यान निरीक्षण को भी स्पष्टीकरण जारी किया गया. अंचल कार्यालयों द्वारा भू-राजस्व की धीमी प्रगति पर भी चिंता व्यक्त की गयी. बैठक में उपस्थित अंचलाधिकारियों को स्पष्टीकरण नोटिस किया गया.
समीक्षा के दौरान शेखपुरा अंचल द्वारा मात्र 02 प्रतिशत, अरियरी से 1.3 प्रतिशत, बरबीघा से 1.07 प्रतिशत राजस्व उगाही पर नाराजगी प्रकट की गयी. बैठक में भूमि उप समाहर्ता को अंचलाधिकारी के साथ बैठक कर भू-राजस्व के मामलों में उगाही में तेजी लाने तथा सभी राजस्व का रिटर्न जमा करने को कहा गया. 31 दिसंबर 2015 तक के सभी निष्पादित मामलों को जिला वेबसाइट पर भी डालने का निर्देश दिया गया. बैठक में 15 जुलाई तक राजस्व उगाही से संबंधित सभी तरह के मामलों के संधारण के लिए रजिस्टर तैयार कर लेने का निर्देश दिया गया.
तालाबों का इकट्ठा करें ब्योरा
जिला प्रशासन ने जिले के सभी सरकारी तालाबों का ब्योरा तलब किया है. आंतरिक संसाधन की समीक्षा के दौरान मत्स्य विभाग के राजस्व की चर्चा के दौरान यह निर्देश दिया गया. बैठक में सभी अंचलाधिकारी से जिले के सभी 170 बड़े-छोटे तालाबों का ब्योरा मांगा गया है. बताना है कि कितने भू-भाग पर तालाब है और कितना अतिक्रमणकारियों के चंगुल में है.
बैठक में यह बात आयी कि तालाबों के लगातार सिकुड़ने के कारण मत्स्य विभाग को राजस्व का भारी नुकसान उठाने पड़ रहा है. तालाबों के अतिक्रमण का यह मामला जिला मुख्यालय से लेकर सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्र तक में है.
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