शेखपुरा में 8 साल की कोमल बनीं मिसाल, गंभीर बीमारी से जंग जीत अब चला रहीं 'सीलिएक रोग जागरूकता अभियान'

डीएम शेखर आनंद को जागरूकता बैनर भेंट करती कोमल भारती सीएस संजय कुमार को जागरूकता सौंपती भारती | Prabhat Khabar Network
शेखपुरा की आठ वर्षीय कोमल भारती सीलिएक रोग से पीड़ित होकर भी हार नहीं मानीं. उन्होंने अपनी पॉकेट मनी से 'सीलिएक रोग जागरूकता अभियान' शुरू किया है, ताकि अन्य बच्चे और उनके परिजन इस बीमारी को समय पर पहचान सकें.
Sheikhpura News : गंभीर बीमारी से वर्षों तक संघर्ष करने वाली शेखपुरा की आठ वर्षीय कोमल भारती अब अपनी पीड़ा को समाज के लिए प्रेरणा में बदल रही हैं. सीलिएक रोग (ग्लूटेन एलर्जी) से पीड़ित कोमल ने जिले में 'सीलिएक रोग जागरूकता अभियान' शुरू किया है, ताकि अन्य बच्चों और उनके परिजनों को समय रहते इस बीमारी की पहचान और सही उपचार की जानकारी मिल सके.
बचपन से झेली कई स्वास्थ्य समस्याएं
कोमल के परिजनों के अनुसार जन्म के बाद से ही उन्हें पेट दर्द, पेट फूलना और लगातार रोने जैसी समस्याएं रहती थीं. तीन वर्ष की उम्र में कान से खून आने और बाद में थायराइड की बीमारी ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी. लगातार पेट दर्द, उल्टियां और कमजोरी के कारण कई अस्पतालों में इलाज कराया गया. आखिरकार पटना में चिकित्सकों की सलाह पर कराई गई टीटीजी (tTG) ब्लड जांच में सीलिएक रोग की पुष्टि हुई. इसके बाद वर्ष 2023 से उन्हें गेहूं, जौ और राई से पूरी तरह दूर रखा गया है.
परहेज ही है सबसे बड़ा इलाज
कोमल के लिए घर पर बाजरा, ज्वार, मक्का और रागी का विशेष आटा तैयार किया जाता है. खून की कमी और शारीरिक कमजोरी के कारण उन्हें कई बार स्कूल और खेलकूद से भी दूर रहना पड़ता है. तबीयत अधिक बिगड़ने पर 25 मई को उन्हें रेफर किया गया और 12 जून 2026 से उनका इलाज पीजीआई लखनऊ में चल रहा है.
पॉकेट मनी से शुरू किया जागरूकता अभियान
इलाज के दौरान ही कोमल ने संकल्प लिया कि उनकी तरह कोई अन्य बच्चा जानकारी के अभाव में इस बीमारी से परेशान न हो. इसी सोच के साथ उन्होंने 15 जून 2026 से अपने पिता के सहयोग और अपनी पॉकेट मनी से बैनर छपवाकर 'सीलिएक रोग जागरूकता अभियान' शुरू किया. वह सरकारी अस्पतालों और सार्वजनिक स्थानों पर लोगों को इस बीमारी के लक्षण, जांच और ग्लूटेन-मुक्त आहार के बारे में जागरूक कर रही हैं.
'मेरा मकसद किसी और को दर्द से बचाना'
कोमल का कहना है कि उनका अभियान किसी प्रचार या पहचान के लिए नहीं है. उनका उद्देश्य सिर्फ इतना है कि लोगों को समय पर सही जानकारी मिले, ताकि कोई अन्य बच्चा इस बीमारी के कारण अनावश्यक तकलीफ न झेले. उनकी यह पहल शेखपुरा जिले में प्रेरणा का विषय बन गई है.
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