घोषणा के बाद नहीं मिला प्रखंड का दर्जा

Updated at : 01 Oct 2015 1:16 AM (IST)
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घोषणा के बाद नहीं मिला प्रखंड का दर्जा

गांव-गांव में बैठक कर लोगों को किया जा रहा एकजुट हिलसा़ जब-जब चुनाव आया तब-तब नेताओं ने चिकसौरा इलाके की जनता को सिर्फ छलने व ढगने का काम किया. पिछले चुनाव में चुनावी सभा में किये गये वादे को पूरा करने में बड़े-बड़े नेता विफल हो गये. फिर चुनाव आ गया है. नेताओं द्वारा इलाके […]

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गांव-गांव में बैठक कर लोगों को किया जा रहा एकजुट हिलसा़ जब-जब चुनाव आया तब-तब नेताओं ने चिकसौरा इलाके की जनता को सिर्फ छलने व ढगने का काम किया.

पिछले चुनाव में चुनावी सभा में किये गये वादे को पूरा करने में बड़े-बड़े नेता विफल हो गये. फिर चुनाव आ गया है.

नेताओं द्वारा इलाके में चुनावी घोषणा करने वाले हैं. लेकिन इस बार इलाके के लोग काफी सावधान होकर मुद्दे को प्रमुखता के साथ उछालने के मूड बनाया है. चिकसौरा प्रखंड निर्माण संघर्ष समिति के बैनर तले सभी लोगों को एकजुट करने में जुट गये है,
जो वोट के नाम पर झूठे वादे करने वाले नेताओं को मुंह तोड़ जवाब जनता दे सके. चिकसौरा इलाके के दर्जनों से भी ऊपर कई गांवों के लोग काफी दूर यानी करीब सात किलोमीटर हिलसा प्रखंड जा कर कोई भी समस्या का निष्पादन कराते आ रहे हैं.
उल्लेखनीय है कि हिलसा विधान सभा क्षेत्र के चिकसौरा बाजार में पिछले विधान सभा चुनाव में चुनावी सभा को संबोधित करते हुए वर्तमान मुख्य मंत्री ने चिकसौरा में थाना बनाने तथा प्रखंड बनाने का ग्रामीणों की मांग पर घोषणा किया था. घोषणा के बाद चिकसौरा में थाना तो बनाया गया.
परंतु प्रखंड बनाने में विफल साबित हुए. घोषणा के बाद चिकसौरा इलाके के लोगों में आस जगी थी कि प्रखंड बनने के बाद कोई काम के लिए सात किलोमीटर का सफर नहीं करना पड़ेगा. लेकिन प्रखंड बनाने का वादा सिर्फ घोषणा तक ही रह गया. इसके अलावा कई दलों के बड़े नेताओं ने प्रखंड बनाने का वादा किया था.
लेकिन उस वादा को नेता भूल गये. फिर चुनाव के समय आया तो उन्हें यह वादा याद आयेगा. लेकिन इस बार चिकसौरा इलाके के लोग प्रखंड निर्माण संघर्ष समिति के बैनर तले लगातार बैठक कर गांव-गांव में जाकर लोगों की एकजुटता करने में जुटे हैं. जिससे इस बार इलाके में नेताओं को वोट मांगना बड़ी मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है. क्योंकि इस इलाके के ग्रामीणों को प्रखंड का मुद्दा वर्षों से मन में खल रहा है.
जिसे निदान करने में नेता कोई दिलचस्पी नहीं ले पा रहे हैं. ग्रामीणों ने कहा कि पिछले चुनाव में हर बड़े नेता ने सभा में घोषणा पर घोषणा कर खूब लोगों से तालिया बटोरी थी. किंतु किये गये वादे भूल गये. ग्रामीण रघुनंदन सिंह ने कहा कि चुनाव के समय नेता तरह-तरह के वादा करते है. फिर भूल जाते है.
वहीं बालेश्वर प्रसाद, सरयुग प्रसाद, धर्मेन्द्र प्रसाद, अजय कुमार, संजय कुमार, शिव पूजन सहाय, मनोज यादव समेत कई लोगों ने नेताओं की बातों का भरोसा नहीं होने का आरोप लगाया. कहा इस बार के चुनाव में वहीं बड़े-बड़े नेता चुनावी सभा करेंगे और फिर एक बार चिकसौरा को प्रखंड बनाने का आश्वासन करेंगे.
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