शिक्षक हड़ताल से चरमरायी शिक्षा व्यवस्था, अभिभावकों में आक्रोश
Updated at : 06 May 2015 1:19 AM (IST)
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सरकारी विद्यालयों से पलायन को विवश हैं छात्र-छात्रएं शेखपुरा : वेतनमान की लड़ाई में कूदे नियोजित शिक्षक जिले भर के सवा लाख से ज्यादा छात्र-छात्राओं का भविष्य अधर में लटका दिया है. हड़ताल में शिक्षकों के समर्थन का आंकड़ा जो भी हो, परंतु शिक्षा व्यवस्था पर प्रभाव व्यापक पड़ा है. शिक्षक हड़ताल के बीच बच्चों […]
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सरकारी विद्यालयों से पलायन को विवश हैं छात्र-छात्रएं
शेखपुरा : वेतनमान की लड़ाई में कूदे नियोजित शिक्षक जिले भर के सवा लाख से ज्यादा छात्र-छात्राओं का भविष्य अधर में लटका दिया है. हड़ताल में शिक्षकों के समर्थन का आंकड़ा जो भी हो, परंतु शिक्षा व्यवस्था पर प्रभाव व्यापक पड़ा है.
शिक्षक हड़ताल के बीच बच्चों का भविष्य अधर में देख अभिभावक के अंदर भी आक्रोश परवान पर है. खास बात यह है कि हड़ताल के इन हालात में शिक्षा अधिकारी भी सरकारी आदेशों की अनदेखी कर अघोषित रूप से छुट्टियां मना रहे हैं. कुल मिला कर आंदोलन के कमजोर समर्थन के बावजूद शिक्षा व्यवस्था चरमरा गयी है.
शिक्षक हड़ताल ने बिगाड़ी शिक्षा व्यवस्था
जिले में वेतनमान को लेकर नियोजित शिक्षकों का संघर्ष अब आमजनों के मंसूबे पर पानी फेर रहा है. खास बात यह है कि नियोजित शिक्षकों की हड़ताल के समर्थन में कूदे नियमित शिक्षक ने भी सक्रियता बढ़ा दी है. जिले में हड़ताल के प्रभाव पर अगर नजर डाले, तब नियोजित शिक्षकों की संख्या 1632 है. जबकि सरकारी आंकड़ों में लगभग 935 हड़ताल पर है.
ऐसे बचे-खुचे शिक्षक अगर स्कूल जाकर हाजिरी बनाते भी हैं, तो अनियमित तरीके से समय के पूर्व भी विद्यालय में अनुपस्थित हो जाते हैं. विद्यालय में छात्र-छात्राओं की अनुपस्थिति का भी हाल वही है. शिक्षकों की अनुपस्थिति के कारण छात्रएं विद्यालय से पलायन कर रहे हैं. शिक्षक हड़ताल के कारण गत दिनों करीब 10 दिनों तक जिला शिक्षा कार्यालय में रही तालाबंदी में भी विभाग के आलाधिकारी की लापरवाही सामने आयी.
सरकार विद्यालयों में अनिवार्य शिक्षा के लिए अथक प्रयास के बाद जहां नामांकन की दिशा में हालात में सुधार हुआ था. वहीं दूसरी ओर हड़ताल के कारण शिक्षा से वंचित बच्चों को अभिभावक अपनी क्षमता के अनुसार निजी विद्यालयों में नामांकन कराने को विवश है.
हड़ताल से शिक्षा व्यवस्था पर लगातार ग्रहण समाज के अंदर शिक्षा प्रेमी और अभिभावकों के अंदर सरकार और आंदोलनकारी के खिलाफ आक्रोश भड़क रहा है.
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