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15 महीने से लोगों को नहीं मिल रहा पेयजल का लाभ

Updated at : 05 Jan 2020 2:29 AM (IST)
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15 महीने से लोगों को नहीं मिल रहा पेयजल का लाभ

शेखपुरा : नगर पर्षद् के खुद की कार्य योजना वार्ड नं 12 में आज 33 लाख की लागत से बनी नल-जल योजना के अस्तित्व को दांव पर लगा बैठा है. सकुनत पुलपर मोहल्ले में मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना अंतर्गत हर घर नल का जल योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है. घर-घर पेयजल पहुंचाने वाली […]

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शेखपुरा : नगर पर्षद् के खुद की कार्य योजना वार्ड नं 12 में आज 33 लाख की लागत से बनी नल-जल योजना के अस्तित्व को दांव पर लगा बैठा है. सकुनत पुलपर मोहल्ले में मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना अंतर्गत हर घर नल का जल योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है. घर-घर पेयजल पहुंचाने वाली इस योजना का निर्माण कार्य भले ही अधूरा है

लेकिन 15 माह पहले ही इस योजना से पानी की आपूर्ति की जा रही है. योजना की स्थिति पर नजर डालें तो बोरिंग, पाइप लाइन के बाद टंकी लगाने का काम भी पूरा कर दिया गया है. लाभुकों को कनेक्शन भी दे दिया गया, लेकिन कनेक्शनधारियों के घरों तक अब भी पानी नहीं पहुंच सका. इसके बाद स्थानीय लोगों में काफी आक्रोश है. लोग दूसरे के घरों की बोरिंग से पानी भरने को मजबूर हैं.
500 परिवारों को पानी की किल्लत : इस योजना का लाभ लगभग पांच सौ से अधिक परिवारों को मिलना था, लेकिन इसका लाभ कुछ परिवारों को ही मिल पा रहा है. बड़ी संगत पुलपर ऊंचाई पर होने के कारण सप्लाइ के लिए लगाया गया पुराने नल से भी यहां तक पानी नहीं पहुंच पाता है. यहां के लोग एक सरकारी चापाकल में समरसेबल डालकर लोग पानी की जरूरतें पूरी करने को मजबूर हैं.
पूर्व डीएम योगेंद्र सिंह ने समस्या दूर करने का दिया था आश्वासन :
इस संबंध में पूर्व जिला अधिकारी योगेंद्र सिंह से भी गुहार लगायी गयी थी. इसके बाद योगेंद्र सिंह ने इस मामले को अनुमंडल लोक निवारण अधिकारी को सौंप दिया. जहां नगर पर्षद के अधिकारियों की परेड लगायी गयी.
नगर पर्षद ने तीन माह में कार्य को पूरा कर लोगों को लाभ पहुंचाने का आश्वासन दिया था. लेकिन जिला अधिकारी के तबादले के बाद सब कुछ रुक गया और लोगों को इसका लाभ नहीं मिल सका. इसकी जानकारी देते हुए स्थानीय निवासी महेंद्र प्रसाद, मोहम्मद चुन्नू, राहुल मालाकार, गौतम कुमार एवं शंकर रजक ने बताया कि लोगों को पानी की किल्लत से रोजाना दो-चार होना पड़ता है.
शेखपुरा : नगर पर्षद् के खुद की कार्य योजना वार्ड नं 12 में आज 33 लाख की लागत से बनी नल-जल योजना के अस्तित्व को दांव पर लगा बैठा है. सकुनत पुलपर मोहल्ले में मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना अंतर्गत हर घर नल का जल योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है. घर-घर पेयजल पहुंचाने वाली इस योजना का निर्माण कार्य भले ही अधूरा है लेकिन 15 माह पहले ही इस योजना से पानी की आपूर्ति की जा रही है.
योजना की स्थिति पर नजर डालें तो बोरिंग, पाइप लाइन के बाद टंकी लगाने का काम भी पूरा कर दिया गया है. लाभुकों को कनेक्शन भी दे दिया गया, लेकिन कनेक्शनधारियों के घरों तक अब भी पानी नहीं पहुंच सका. इसके बाद स्थानीय लोगों में काफी आक्रोश है. लोग दूसरे के घरों की बोरिंग से पानी भरने को मजबूर हैं.
500 परिवारों को पानी की किल्लत : इस योजना का लाभ लगभग पांच सौ से अधिक परिवारों को मिलना था, लेकिन इसका लाभ कुछ परिवारों को ही मिल पा रहा है. बड़ी संगत पुलपर ऊंचाई पर होने के कारण सप्लाइ के लिए लगाया गया पुराने नल से भी यहां तक पानी नहीं पहुंच पाता है. यहां के लोग एक सरकारी चापाकल में समरसेबल डालकर लोग पानी की जरूरतें पूरी करने को मजबूर हैं.
पूर्व डीएम योगेंद्र सिंह ने समस्या दूर करने का दिया था आश्वासन :
इस संबंध में पूर्व जिला अधिकारी योगेंद्र सिंह से भी गुहार लगायी गयी थी. इसके बाद योगेंद्र सिंह ने इस मामले को अनुमंडल लोक निवारण अधिकारी को सौंप दिया. जहां नगर पर्षद के अधिकारियों की परेड लगायी गयी. नगर पर्षद ने तीन माह में कार्य को पूरा कर लोगों को लाभ पहुंचाने का आश्वासन दिया था.
लेकिन जिला अधिकारी के तबादले के बाद सब कुछ रुक गया और लोगों को इसका लाभ नहीं मिल सका. इसकी जानकारी देते हुए स्थानीय निवासी महेंद्र प्रसाद, मोहम्मद चुन्नू, राहुल मालाकार, गौतम कुमार एवं शंकर रजक ने बताया कि लोगों को पानी की किल्लत से रोजाना दो-चार होना पड़ता है.
32 लाख की योजना का कोई फायदा नहीं
इस योजना में करीब 32 लाख आठ सौ रुपये की राशि आवंटित की गयी थी. इसके तहत सभी के घरों तक नल का जल पहुंचाना था. बोरिंग और टंकी के निर्माण तो किया गया, लेकिन पाइप लाइन को गलत दिशा दे दिया गया. टंकी से निकलनेवाले पानी के पाइप का ढलान बड़ी दरगाह की ओर कर दिया गया. नगर प्रशासन की इसी दोहरी नीति के कारण ऊंचाई पर बसे बड़ी आबादी को अब तक पानी नहीं मिल पा रहा.
वार्ड नंबर 12 बड़ी संगत पुलपर पहले लोग कोकिल कुएं से पानी भर कर जरूरतें पूरी करते थे, लेकिन यह कुआं भी सूख गया है. जिले में अतिक्रमण सभी तालाब, आहार, पाइन तथा कुओं का जीर्णोद्धार किया जा रहा है. इस कुएं का सर्वे तक नहीं किया गया. स्थानीय लोगों ने बताया कि छठ के दिनों में लोग इस कुएं से पानी भरकर प्रसाद बनाते थे. इस कुएं के सूख जाने से अब लोग दो किलोमीटर दूर शेखपुरा के खांडपर स्थित दाल कुएं से पानी लाते हैं.
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