बगैर चिकित्सक का है पीएचसी
Updated at : 25 Jun 2017 5:04 AM (IST)
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अनदेखी. चिकित्सकों ने कई सालों से नहीं किया योगदान पीएचसी अरियरी में आठ चिकित्सकों की तैनाती की गयी थी.पदस्थापित किये गये आठ चिकित्सक पिछले कई सालों से फरार हैं. इन चिकित्सकों के विरुद्ध प्रपत्र क गठित कर प्रस्ताव भेजा गया है. इसके बावजूद भी यह चिकित्सक पीएचसी में अपना योगदान नहीं कर सके. शेखपुरा : […]
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अनदेखी. चिकित्सकों ने कई सालों से नहीं किया योगदान
पीएचसी अरियरी में आठ चिकित्सकों की तैनाती की गयी थी.पदस्थापित किये गये आठ चिकित्सक पिछले कई सालों से फरार हैं. इन चिकित्सकों के विरुद्ध प्रपत्र क गठित कर प्रस्ताव भेजा गया है. इसके बावजूद भी यह चिकित्सक पीएचसी में अपना योगदान नहीं कर सके.
शेखपुरा : जिले का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अरियरी एक एकलौता ऐसा अस्पताल है जहां पिछले डेढ़ सालों से एक भी चिकित्सक का पदस्थापन नहीं किया जा सका है.
अगर ये कहा जाय कि अरियरी पीएचसी बिना चिकित्सक का चलने वाला अस्पताल है तो इसमें कोइ हैरत की बात नहीं होगी. दरअसल सरकार के द्वारा पीएचसी अरियरी में आठ चिकित्सकों की तैनाती की गयी थी. पदस्थापित किये गये आठ चिकित्सक पिछले कई सालों से फरार हैं. इन फरार चिकित्सकों के विरुद्ध विभाग के द्वारा प्रपत्र क गठित कर कार्यवाही का भी प्रस्ताव भेजा गया है. इसके बावजूद भी यह चिकित्सक पीएचसी में अपना योगदान नही कर सके. इन परिस्थितियों में वैकल्पिक व्यवस्था बहाल करने के लिए स्वास्थ्य महकमा ने विभिन्न क्षेत्र में पदस्थापित सात चिकित्सकों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अरियरी के लिए प्रतिनियुक्त किया है, लेकिन करीब डेढ़ वर्ष पूर्व विभाग के निर्देश के कारण चिकित्सकों के प्रतिनियुक्ति को अवैध करार दिया गया.
इसके बाद पीएचसी में प्रतिनियुक्ति पर रहने वाले इन चिकित्सकों ने भी आनाकानी शुरू कर दी. इस आदेश के बाद इन प्रतिनियुक्त चिकित्सकों पर विभाग किसी प्रकार का दबाब बनाने में अक्षम साबित हो रहा है. पीएचसी में फिलहाल तीन एमबीबीएस समेत अन्य सात लोग वहां तैनात है. चिकित्सक या तो अवकाश में होते हैं या ससमय नहीं पहुंचने के कारण वहां मरीजों को स्वास्थ्य लाभ पाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. कुल मिलाकर सरकार के स्वास्थ्य व्यवस्था में पीएचसी अरियरी के लिए एक भी मूल चिकित्सक की तैनाती नहीं है ऐसी स्थिति में अस्पताल के अंदर स्वास्थ्य व्यवस्था बहाल रखने के दबाव को झेल रहे विभाग के आला अधिकारी भी खुद को परेशान बताते हैं.
क्या है फरार चिकित्सकों का हाल : दरअसल चिकित्सकों का पदस्थापन राज्य सरकार के द्वारा किया जाता है. पिछले तीन साल पहले राज्य सरकार ने अरियरी पीएचसी में जिन आठ चिकित्सकों को पदस्थापित किया उसमें एक ने भी योगदान नहीं किया. इन परिस्थितियों के बाद जिला प्रशासन ने सभी फरार चिकित्सकों पर कार्रवाई की. लेकिन इस मामले में स्वास्थ्य विभाग के एक आलाधिकारी ने जो जानकारी दी. वह एक चौंकाने वाला मसला है. नाम नहीं छापने के शर्त पर बताया कि राज्य सरकार के संचिका में फरार चिकित्सकों का नाम आज भी यहां तैनात रहने वाले चिकित्सकों में शामिल है.
क्या कहते हैं अधिकारी
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अरियरी में सरकार द्वारा पदस्थापित चिकित्सक पिछले कई वर्षों से फरार हैं. उनके विरुद्ध विभाग के द्वारा कार्यवाही भी की गयी है. जिला स्तर पर चिकित्सकों की प्रतिनियुक्ति का प्रावधान नहीं है. ऐसी स्थिति में किसी प्रकार वैकल्पिक व्यवस्था से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में ओपीडी और जरूरी सेवाएं संचालित की जा रही है. मरीजों को चिकित्सा लाभ देने में स्वास्थ्य विभाग सजग है. चिकित्सकों के पदस्थापन के लिए विभाग को पत्राचार किया गया है.
डॉ मृगेंद्र प्रसाद सिंह, सिविल सर्जन शेखपुरा
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