Sheohar: 18 सालों में 9 बड़े चेहरों पर गिरी गाज, 'साहेब' से 'बाबू' तक सब नपे

Published by :Aniket Kumar
Published at :04 May 2026 10:29 AM (IST)
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Sheohar News corruption crackdown ddc suspension vigilance action

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो

Sheohar News: शिवहर में निगरानी और SVU की कार्रवाई तेज, 18 साल में 9 भ्रष्ट अधिकारी-कर्मचारी पकड़े गए. हाल में DDC निलंबन के बाद हड़कंप मचा है. कई विभागों पर नजर, आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे की संभावना. पढ़ें पूरी खबर…

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Sheohar News: जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो और विशेष सतर्कता इकाई (SVU) ने अपनी दबिश तेज कर दी है. शिवहर में पिछले 18 वर्षों का रिकॉर्ड खंगालें तो पता चलता है कि आधे दर्जन से अधिक बड़े मामलों में 9 भ्रष्ट अधिकारियों व कर्मचारियों के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई की गई है. हाल ही में डीडीसी के निलंबन ने प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है.

आय से अधिक संपत्ति का मामला

भ्रष्टाचार के खिलाफ सबसे बड़ी कार्रवाई जिले के उप विकास आयुक्त (DDC) बृजेश कुमार पर हुई है. 24 मार्च, 2026 को स्पेशल विजिलेंस यूनिट ने उनके आवास और कार्यालय पर छापेमारी की थी, जिसमें 1.86 करोड़ रुपये की आय से अधिक संपत्ति का खुलासा हुआ। गंभीर आरोपों के आधार पर सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए 2 मई 2026 को उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है.

सिविल सर्जन से लेकर थानेदार तक आए घेरे में

भ्रष्टाचार के खिलाफ इस अभियान की तपिश जिले के हर छोटे-बड़े विभाग तक पहुंची है. इसकी शुरुआत वर्ष 2008 में हुई थी, जब तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ. पंचानंद प्रसाद को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया था. इस मामले ने पूरे स्वास्थ्य महकमे को हिला कर रख दिया था.

पुलिस महकमा भी इससे अछूता नहीं रहा

वर्ष 2015 में तरियानी थानाध्यक्ष संजय कुमार राय को 15 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए निगरानी की टीम ने दबोचा था. वहीं, सेंट्रल बैंक के सहायक मैनेजर अर्जुन राम और जिला कोषागार के सहायक क्लर्क राम प्रवेश चौधरी (10 हजार रुपये रिश्वत) भी निगरानी के जाल में फंस चुके हैं.

इंजीनियरिंग और राजस्व विभाग में मची खलबली

2018 में भवन निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता अमरेंद्र कुमार और जेई विद्यासागर की जोड़ी को 88 हजार रुपये की रिश्वत के साथ गिरफ्तार किया गया था.
2020: तरियानी के राजस्व कर्मचारी ईश्वर चंद्र सिंह 9 हजार रुपये लेते पकड़े गए.
2025: जिला भू-अर्जन कार्यालय के लिपिक विजय कुमार श्रीवास्तव को रेलवे मुआवजे के एवज में 70 हजार रुपये की मोटी रकम लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया.
2026 (जनवरी): पुरनहिया के राजस्व कर्मचारी रामकृत महतो को जमाबंदी नामांतरण के नाम पर 10 हजार रुपये लेते हुए निगरानी ने दबोचा.

विभाग का आक्रामक रुख

इन सख्त कदमों के बावजूद जिले में रिश्वतखोरी का सिलसिला पूरी तरह नहीं थमा है, जिससे निगरानी विभाग अब और भी आक्रामक मूड में है. जिला प्रशासन और विजिलेंस की टीम अब उन विभागों पर पैनी नजर रख रही है जहां जनता का सीधा जुड़ाव है. डीडीसी के निलंबन के बाद यह साफ है कि आने वाले दिनों में कुछ और बड़े नाम जांच के दायरे में आ सकते हैं.

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Aniket Kumar

लेखक के बारे में

By Aniket Kumar

अनिकेत बीते 4 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. राजस्थान पत्रिका और न्यूजट्रैक जैसे मीडिया संस्थान के साथ काम करने का अनुभव. एंटरटेनमेंट, हाईपरलोकल और राजनीति की खबरों से अधिक जुड़ाव. वर्तमान में प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ कार्यरत.

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