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Sasaram News : अधिग्रहण से पहले मुआवजे की राशि तय करने के लिए होगा एसआइए

Updated at : 02 Sep 2025 8:29 PM (IST)
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Sasaram News : अधिग्रहण से पहले मुआवजे की राशि तय करने के लिए होगा एसआइए

जिले में विकास को गति देने के लिए जिला भू-अर्जन कार्यालय भूमि अधिग्रहण कर रहा है. इसके लिए रैयत को मुआवजा भी दिया जा रहा है.

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सासाराम नगर. जिले में विकास को गति देने के लिए जिला भू-अर्जन कार्यालय भूमि अधिग्रहण कर रहा है. इसके लिए रैयत को मुआवजा भी दिया जा रहा है. लेकिन, इस राशि से रैयत संतुष्ट नहीं है. हाल के दिनों में भारत माला परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण को लेकर किसान व प्रशासन के बीच नोकझोंक चल रही है. अब फिर से शिवसागर प्रखंड के तारडीह मौजा में 492.85 एकड़ जमीन अधिग्रहण की तैयारी है. इसको औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित करने की तैयारी है, जिसको लेकर कैबिनेट में मुहर लगा दी है और 154.07 करोड़ रुपये की स्वीकृति भी दे दी गयी है. लेकिन, अधिग्रहण से पहले सामाजिक प्रभाव का आकलन (एसआइए) किया जायेगा, जिसके बाद मुआवजे की राशि तय कर गजट प्रकाशन होगा. हालांकि, पिछले नौ वर्षों से न्यूनतम दर (एमवीआर) को संशोधित नहीं किया गया है, जिसका खामियाजा रैयतों को भुगतना पड़ेगा. क्योंकि, मुआवजा राशि का निर्धारण पहले से तय एमवीआर पर ही होगा. हालांकि, रैयतों का ख्याल रखते हुए आकलन करने वाली इंस्टीट्यूट यह प्रयास करती है कि उनके हितों को रक्षा हो और मुआवजा राशि बेहतर मिले. तारडीह मौजा में 5600 रुपये डिसमिल है न्यूनतम दर- शिवसागर प्रखंड के तारडीह मौजा में औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने के लिए 492.85 एकड़ जमीन का अधिग्रहण होनेवाला है, जिसका न्यूनतम दर 5600 रुपये डिसमिल फिलहाल है. हालांकि, यह दर एक फसला भूमि के लिए है. इसके दर से देखा जाये, तो एक बीघा करीब 63 डिसमिल भूमि के लिए एक रैयत को 352800 रुपये मुआवजा बनेगा. ऐसे ही सिंचित भूमि के लिए 7600 रुपये डिसमिल न्यूनतम दर है. वहीं, आवासीय के लिए 49300 रुपये न्यूनतम दर रखा गया है. हालांकि, यह दर जिला निबंधन विभाग ने निर्धारित किया है. हालांकि, यह दर ज्यादा हो सकता था. अगर हमारे जनप्रतिनिधियों ने इस मामले को लेकर विधानसभा में चर्चा की होती, तो आज रैयत उचित मुआवजा के लिए सड़क से लेकर कोर्ट तक जद्दोजहद नहीं करते. अपने सीमावर्ती राज्य उत्तरप्रदेश का उदाहरण देखें, तो वहां भूमि के न्यूनतम दर में अमूमन प्रत्येक वर्ष संशोधन होता है, जिसकी वजह से अधिग्रहण के दौरान वहां के रैयतों को अच्छा मुआवजा मिलता है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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PRABHANJAY KUMAR

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