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sasaram News : आपातकाल के 50 साल : अखबार पहुंचाने व नारेबाजी के आरोप में जेपी सेनानी बलिराम मिश्रा की हुई थी गिरफ्तारी

Updated at : 24 Jun 2025 10:14 PM (IST)
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sasaram News : आपातकाल के 50 साल : अखबार पहुंचाने व नारेबाजी के आरोप में जेपी सेनानी बलिराम मिश्रा की हुई थी गिरफ्तारी

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05 जून 1974 को लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने संपूर्ण क्रांति का किया था एलान

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संतोष चंद्रकांत, बिक्रमगंज

जेपी सेनानी बलिराम मिश्रा ने 1973 में मैट्रिक पास की थी. इंटर में नामांकन के लिए सोच रहे थे. तभी 05 जून 1974 को लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने संपूर्ण क्रांति का ऐलान कर दिया. छात्रों की सभाएं होने लगी थी. चार नवंबर 1974 को जेपी आंदोलन का पोस्टर चिपकाने बिक्रमगंज में निकला था. नारेबाजी करने पर जेपी सेनानी बलिराम मिश्रा को गिरफ्तार कर आरा जेल भेज दिया गया. यह वाक्या सुनाते हुए बिक्रमगंज प्रखंड के इंद्राथ खुर्द गांव निवासी 68 वर्षीय जेपी सेनानी बलिराम मिश्रा की आंखों में आक्रोश झलकने लगा. उन्होंने कहा कि दिसंबर 1974 में मुझे जमानत मिली. मैं जेल से बाहर आया. माहौल और गरम हो उठा था. छात्रों में तत्कालीन सरकार को लेकर भयंकर आक्रोश था. सीनियर्स जगह-जगह सभाएं कर रहे थे. कई सभाओं में मैं शामिल हुआ. 25 जून 1975 को देश में तत्कालीन इंदिरा सरकार ने आपातकाल घोषित कर दिया. 05 जुलाई 1975 को सरकार के खिलाफ जुलूस निकला गया. बिक्रमगंज थाना चौक वाली नहर पुल के पास हमलोगों को पुलिस ने घेर लिया. पुलिस मुझे गिरफ्तार कर सासाराम जेल भेज दी. मैं जेल में खराब भोजन परोसने विरुद्ध आंदोलन छेड़ दिया. मुझे सासाराम के तत्कालीन एसडीएम आइएएस मुकुंद प्रसाद समक्ष लाया गया. उन्होंने मुझे सासाराम जेल से बक्सर सेंट्रल जेल भेज दिया. बक्सर जेल का दौर मैं कभी जीवन पर्यंत भूल नहीं सका. आज भी आंखों के सामने वह दृश्य दौड़ आ जाता है. 15 अगस्त 1975 को मेरी पत्नी रुक्मिणी देवी का निधन हो गया था. इसकी सूचना मुझे एक महीने बाद सितंबर 1975 में मिली. मुझे दुखी देख, साथियों ने जेल में ही श्रद्धांजलि सभा आयोजित की. साथियों ने जेल में पुड़ी-सब्जी और मीठा बुंदिया बनाकर पत्नी की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना सभा की. मैंने अपनी पत्नी की आत्मा को जेल में तर्पण दिया. फिर दिसंबर 1975 में मुझे जमानत मिली और फिर मैं जेल से बाहर आया. जेल की घटना मुझे चैन से सोने नहीं देती थी. मन तत्कालीन इंदिरा सरकार के विरुद्ध आक्रोश था. कुछ कर गुजरने के लिए मैं हमेशा तैयार रहता था. केंद्र सरकार ने मीडिया हाउसों पर प्रतिबंध लगा दिया था. पटना से जेपी लोकवाणी क्रांति अखबार निकालने लगे थे. सरकार से प्रतिबंधित अखबार को मैं बिक्रमगंज के आस-पास के गांवों में लोगों तक पहुंचाता था. सरकार के विरुद्ध इस कार्य के लिए मुझे 20 अप्रैल 1976 को तीसरी बार गिरफ्तार किया गया.

जेल में मिलावटी दूध बांटने के विरोध में गैलन जेल अधीक्षक पर फेंक दिया :बक्सर जेल में मिलावटी दूध बांटने के विरोध में मैंने दूध का गैलन तत्कालीन जेल अधीक्षक पर फेंक दिया. जेल में मेरे साथ बंद समाजवादी नेता महामाया प्रसाद के हस्तक्षेप से किसी तरह मामला शांत हुआ. जब तत्कालीन इंदिरा सरकार हटी, तो मुझे रिहाई मिली. हाल के दिनों में जेपी सेनानी योजना के तहत प्रमाणपत्र और वर्तमान में पेंशन मिल रहा है. उन्होंने अपने साथियों को याद करते हुए कहा कि बिक्रमगंज और काराकाट क्षेत्र में उस समय कई साथी थे, जिन्होंने आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभायी थी. इसमें प्रमुख रूप से घुसियांकला गांव के अखलाक अहमद व दनवार के त्रिभुवन सिंह दोनों बाद में विधायक और मंत्री भी बने. एक साथी बिक्रमगंज के सुगी बाल, तुर्ती गांव निवासी जगनारायण सिंह यादव पिछड़ा वर्ग आयोग में 2013 से लेकर 2016 तक सदस्य बने थे. धनगाईं के सोशलिस्ट पार्टी के नेता नरेंद्र सिंह कुशवाहा, मतुली गांव निवासी देव बंश सिंह, काराकाट के अखिलेश पांडेय, धारूपुर पोखरा के दीनानाथ बारी व रमेश गुप्ता, मानी के सूर्यदेव सिंह, धनगाई के कलक्टर सिंह जैसे कई लोग आंदोलन की अगुवाई करते थे.

इतिहास ने हमें भुला दिया हो, लेकिन मुझे गर्व है :

उन्होंने कहा कि हम जेपी सेनानी हैं. मुझे कभी पद की लालसा नहीं रही. मैंने गांव और बिक्रमगंज काराकाट में रहकर ही समाज सेवा को चुना. आज भी में काराकाट, बिक्रमगंज की जनता के साथ ही रहता हूं. बच्चों को पढ़ाता हूं. लोगों की मदद करता हूं. पत्नी की मौत के इतने वर्ष बीत गये, लेकिन कभी शादी की इच्छा नहीं हुई. भले ही इतिहास ने हमें भुला दिया हो, लेकिन मुझे गर्व है कि मैंने उस समय लोकतंत्र की रक्षा के लिए खड़ा होना स्वीकार किया और आजीवन लोगों की सेवा को ही अपना धर्म मानता रहूंगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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PANCHDEV KUMAR

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