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नशाबंदी के गिनाये लाभ, खामियों पर उठे सवाल

Updated at : 24 Nov 2025 3:57 PM (IST)
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नशाबंदी के गिनाये लाभ, खामियों पर उठे सवाल

नशा मुक्ति के पक्ष में वाद-विवाद व जागरूकता रैली का आयोजन

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नशा मुक्ति के पक्ष में वाद-विवाद व जागरूकता रैली का आयोजन शहर के कई मुहल्लों से गुजरती रैली में नारे लगाकर लोगों को किया जागरूक प्रतिनिधि, सासाराम ऑफिस. नशामुक्ति दिवस के पूर्व सोमवार को शिक्षा विभाग (साक्षरता) के तत्वावधान में नशा मुक्ति पर वाद-विवाद एवं जागरूकता रैली का आयोजन किया गया. सबसे पहले शिक्षा सेवक एवं शिक्षा सेवक (तालीमी मरकज) प्रखंड सासाराम की ओर से मदरसा किला परिसर में वाद-विवाद कार्यक्रम हुआ, जिसकी अध्यक्षता केआरपी सासाराम राम नारायण सिंह ने की. वाद-विवाद में वक्ताओं ने एक ओर बिहार में नशाबंदी के फायदे बताते हुए कहा कि इससे स्वस्थ समाज का निर्माण होता है. दुर्घटनाओं में कमी आती है. शादी-विवाह समेत मांगलिक कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होते हैं. घरेलू हिंसा में कमी और शरीर स्वस्थ रहने से बेहतर नींद, कम चिंता और परिवार-दोस्तों के साथ बेहतर रिश्ते बनते हैं. पैसे की बचत से गरीब परिवार बच्चों की पढ़ाई और बेहतर जिंदगी की ओर बढ़ते हैं. दूसरी ओर कुछ वक्ताओं ने कहा कि बिहार में नशाबंदी पूर्णरूप से लागू होती नहीं दिखती. लोग महंगी व जहरीली शराब दूसरे राज्यों से मंगाकर चोरी-छिपे सेवन कर रहे हैं, जिससे बिहार के राजस्व में कमी के साथ असामयिक मृत्यु के मामले बढ़ रहे हैं. इसे सरकार को पूरी तरह रोकने की जरूरत है. अध्यक्षता कर रहे राम नारायण सिंह ने नशा से दूर रहने की सलाह दी. आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा प्रस्तुत की. इसके तहत स्कूल व सार्वजनिक स्थलों पर नशा विरोधी स्लोगन लेखन, बैनर-पोस्टर लगाना, मंगलवार को रंगोली, मेंहदी आदि गतिविधियां करायी जायेंगी. वाद-विवाद के बाद शिक्षा सेवकों व तालीमी मरकज की ओर से भव्य नशा मुक्ति रैली निकाली गयी. रैली का शुभारंभ समाजसेवी बैरिस्टर पांडेय अधिवक्ता ने हरी झंडी दिखाकर किया. उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि कुछ लोग शासन में आने पर शराब चालू करने की बात कर रहे थे, जो पूरी तरह गलत है. यदि शराब कुछ मात्रा में उपलब्ध हो भी रही है, तो इसका मतलब इसे वैध करना नहीं, बल्कि इसे पूर्णरूपेण बंद करने और लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि हत्या, बलात्कार, दहेज प्रथा जैसे अपराधों पर कानून है, तो क्या वे समाज से पूरी तरह खत्म हो गये. राजस्व बढ़ाने के लिए गलत रास्ते अपनाने की सलाह नहीं दी जा सकती. इसलिए ऐसे मुद्दों से बचना चाहिए, जिनसे समाज में भ्रम और अशांति फैले. रैली निकाल दिया संदेश बैनर-तख्ती लिए लोग ‘नशे का जो हुआ शिकार, उजड़ा उसका घर परिवार’ जैसे नारे लगाते हुए किला, चीकटोली, कादीरगंज, दलेलगंज, बारादरी, आलमगंज समेत कई इलाकों से गुजरते बीआरसी सासाराम पहुंचे. यहां प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी सोनू कुमार ने नशा से दूर रहने के संकल्प को दोहराया और रैली के समापन की घोषणा की. कार्यक्रम में मोहम्मद सुल्तान, शाकिर अली, पिंटू कुमार, बेबी, तरन्नुम, अरुण कुमार, सदाकत, शमशेर आलम, शमा बनो, तबस्सुम परवीन, यास्मीन खातून, मुख्तार, अमित सहित कई लोग उपस्थित थे. गौरतलब हो कि आगामी 26 नवंबर को जिलेभर में नशा मुक्ति दिवस मनाया जायेगा, जिसके लिए विभिन्न कार्यक्रम निर्धारित है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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ANURAG SHARAN

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ANURAG SHARAN is a contributor at Prabhat Khabar.

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