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किसानों के बिचड़े बचाने के बजाय सूख गयीं नदियां

Updated at : 08 Jun 2024 10:08 PM (IST)
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किसानों के बिचड़े बचाने के बजाय सूख गयीं नदियां

प्रखंड क्षेत्र के दिनारा-चौसा लाइन नहर से सटे कंचन नदी का पानी सूख जाने से किसानों की हालत बिगड़ती जा रही है. अभी तक पानी नहीं आने से किसान बिचड़े बचाने के लिए तरह-तरह के तरीके अपना रहे हैं.

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दिनारा. प्रखंड क्षेत्र के दिनारा-चौसा लाइन नहर से सटे कंचन नदी का पानी सूख जाने से किसानों की हालत बिगड़ती जा रही है. अभी तक पानी नहीं आने से किसान बिचड़े बचाने के लिए तरह-तरह के तरीके अपना रहे हैं. कई किसानों के खेतों में पानी के अभाव में अभी बिचड़ा डालना बाकी है. किसानों की मानें, तो रोहिणी नक्षत्र में बिचड़ा डालने का सिलसिला सदियों से चला आ रहा है. लेकिन, भीषण गर्मी के कारण कंचन नदी, चौसा लाइन नहर, पास-पड़ोस के पोखर, तालाब सारे सूख चुके हैं. धान का कटोरा कहे जाने वाले रोहतास में दिनारा प्रखंड के किसानों की मुश्किलें बढ़ गयी हैं. गौरतलब है कि इसके किनारे बसे दर्जनों गांव बैरी बांध, जिगीना, धर्मागतपुर, जगदीशपुर, रामपुर टोला, भानपुर, भटपुरवा ,सुजानपुर, धरकंधा, सेमरी, शंभू डिहरी, सेमरी डीह, भैरोडीह, योगिया, खखड़ही, पिटसर, मैरा आदि के लोगों की परेशानियां बढ़ गयी हैं. वहीं, आस-पास के गांवों में जलस्तर प्रभावित होने से कई गांवों के चापाकल भी बहुत कम पानी दे रहे हैं. नदी का पानी सूख जाने से पशुपालकों को भी पशुओं को पानी पिलाने और नहलाने में काफी दिक्कत हो रही है. वहीं, जंगली जानवर जैसे नीलगाय, हिरण भी अपनी प्यास बुझाने के लिए इधर-उधर भटकते नजर आते हैं.

बरसात के दिनों में विशाल हो जाता है नदी का स्वरूप

स्थानीय लोगों की मानें, तो लगभग 50 किलोमीटर लंबे प्रवाह वाली इस कंचन नदी का उद्गम स्थल करंज पोखरे से माना जाता है. वहीं, कुछ लोगों का कहना है कि इसका उद्गम स्थली भलुनी भवानी मंदिर के समीप के पोखरे से हुआ है. अपितु भानपुर पंचायत के बैरी बांध में पूर्व दिशा एवं दक्षिण दिशा से आती हुई दो जल धाराएं इस नदी को मूर्त स्वरूप प्रदान करती है. जहां से नदी का व्यापक स्वरूप दृष्टिगोचर होने लगता है. इसका जल ग्रहण क्षेत्र सोन नहर की विभिन्न शाखाओं के अवशिष्ट जल एवं बरसात के जल से पूरित होता है. नोखा डग से निकलने वाला नारा जो प्रखंड के क्षेत्र के चिल्हरुआं गांव के समीप चौसा नहर साइफन के रास्ते वेलवैयां एवं जमरोढ होते हुए भटपुरवा गांव के समीप नदी के जल प्रवाह को बढ़ाता है. बरसात के दिनों में नदी का जलप्रवाह काफी बढ़ जाने से नदी का स्वरूप काफी विशाल दिखाई देने लगता है. यह नदी बक्सर जिले के कई गांवों और बाजारों को स्पर्श करते हुए इटाढ़ी के समीप ठोरा नदी में विलीन होकर गंगा नदी में जा मिलती है. वर्तमान में यह नदी दो जिले रोहतास और बक्सर को जोड़ती है, जबकि फ्रांसिस बुकानन (अंग्रेज सर्वेयर) के सन 1812 -13 के सर्वेक्षण के मुताबिक यह दो राज्यों बिहार एवं अवध राज्य की सीमा का क्षेत्र था. चौसा परगना तब शाहाबाद में नहीं बल्कि अवध राज्य में शामिल था. बिहार राष्ट्रभाषा परिषद से प्रकाशित पुस्तक बिहार की नदियों में भी इसकी चर्चा है. स्थानीय लोगों से पता चला कि पूर्व के समय में जब सिंचाई के आधुनिक संसाधन उपलब्ध नहीं थे, नहरों का विकास भी नहीं हुआ था, तब यही कंचन नदी मनुष्य के लिए ही नहीं, बल्कि पशु पक्षियों के लिए भी जलस्रोत का कार्य करती थी. इसके अलावा नदी के पानी को जगह-जगह बांध कर सिंचाई का कार्य किया जाता था. इसमें बैरी बांध एवं मैरा बांध का नाम उल्लेखनीय है.

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