स्थापना के 40 वर्षों बाद बिक्रमगंज अनुमंडल को मिला अपना भवन

Updated at : 23 Feb 2025 8:49 PM (IST)
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स्थापना के 40 वर्षों बाद बिक्रमगंज अनुमंडल को मिला अपना भवन

पुराने अनुमंडल कार्यालय, जो व्यापार मंडल के भवन में चल रहा था, उसको लेकर संशय बरकरार

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फोटो -18- नवनिर्मित अनुमंडल कार्यालय प्रतिनिधि, बिक्रमगंज नौ अप्रैल 1984 को स्थापित बिक्रमगंज अनुमंडल को 40 वर्ष बाद अपना स्थायी भवन नसीब हुआ. 19 फरवरी को सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने संवाद यात्रा के दौरान इसका उद्घाटन किया. यह भवन धावा पुल के पास करीब नौ करोड़ 85 लाख रुपये की लागत से तैयार किया गया है. अनुमंडलाधिकारी अनिल बसाक ने सोमवार से नये भवन में प्रशासनिक कार्यों की विधिवत शुरुआत की घोषणा की. यह आश्चर्यजनक है कि 40 वर्षों तक अनुमंडल कार्यालय उसी किराये के भवन में संचालित होता रहा, जहां इसका उद्घाटन हुआ था. बता दें कि अब तक अनुमंडल कार्यालय व्यापार मंडल के भवन में और अनुमंडलाधिकारी का आवास जिला पर्षद के भवन में संचालित हो रहा था. इन भवनों का किराया मात्र कुछ हजार रुपये था. इस अवधि में अनुमंडल के अधिकांश कार्यालय व अधिकारियों के आवास भी किराये के भवनों में ही चलते रहे. सिविल कोर्ट और जेल की स्थापना में दो दशक का समय बिक्रमगंज अनुमंडल को सिविल कोर्ट और जेल की सुविधा स्थापना के 20 वर्षों बाद मिली. 25 सितंबर 2004 को सिविल कोर्ट व जेल का उद्घाटन हुआ. इसके 11 वर्षों बाद 29 जून 2015 को सब जज कोर्ट की शुरुआत हुई. हालांकि, उसी वर्ष शुरू हुआ सर्किट कोर्ट ज्यादा दिनों तक नहीं चला और जल्द ही बंद हो गया. करीब 1160 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले इस अनुमंडल में आठ प्रखंड, 11 थाना, एक ओपी, एक नगर पर्षद, चार नगर पंचायत, 96 ग्राम पंचायत और 10 लाख से अधिक की आबादी है. लेकिन, अब तक यहां ट्रेजरी कार्यालय की स्थापना नहीं हुई है. ऐसा लगता है कि विकास की इस धीमी रफ्तार को देखते हुए अन्य प्रशासनिक सुविधाओं के पूरा होने में वर्षों का समय लग सकता है. व्यापार मंडल सहयोग समिति का योगदान बिक्रमगंज व्यापार मंडल सहयोग समिति की स्थापना दो अक्त्तूबर 1960 को हुई थी. इसका उद्देश्य व्यापारिक और सामाजिक सहयोग को बढ़ावा देना था. व्यापार मंडल भवन का उद्घाटन आठ जनवरी 1963 को परियोजना कार्यपालक पदाधिकारी ए. बद्दू ने किया था. समिति के पहले अध्यक्ष राजमुख सिंह, उपाध्यक्ष मैनेजर गिरीशचंद सिन्हा और कोषाध्यक्ष श्रीनिवास चौधरी थे. समिति के प्रमुख सदस्यों में रामनौमी सिंह, यमुना पांडेय, रामसेवक सिंह, राजबहादुर सिंह, शिवजन्म पांडेय, शिवशंकर चौधरी, नर्वदेश्वर राय, रामप्रीत सिंह, गोपीकृष्ण दास (प्रखंड विकास पदाधिकारी), भूतेश्वर प्रसाद (कृषक प्रतिनिधि पर्यवेक्षक), रामबचन सिंह (सहायक प्रतिनिधि पर्यवेक्षक) और बंशीलाल सिंह (बैंक प्रतिनिधि) प्रमुख थे. नये भवन में स्थानांतरण और प्रशासनिक सुधार की उम्मीद: बिक्रमगंज अनुमंडल कार्यालय नये भवन में स्थानांतरित होने के बाद व्यापार मंडल भवन के भविष्य को लेकर अब भी संशय बना हुआ है. वर्तमान में व्यापार मंडल के पास केवल एक पीडीएस दुकान की जिम्मेदारी है. नये अनुमंडल भवन से प्रशासनिक कार्यों में सुधार की उम्मीद है. लेकिन, ट्रेजरी कार्यालय और अन्य सुविधाओं की अनुपलब्धता अब भी क्षेत्रवासियों के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है. विकास की धीमी गति को देखते हुए यह कहना कठिन है कि कब तक सभी प्रशासनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी. क्या, बिक्रमगंज अनुमंडल विकास की इस गति को तेज कर पायेगा या फिर इसे वर्षों तक इंतजार करना पड़ेगा, यह भविष्य के गर्भ में है.

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