टीबी मुक्त भारत अभियान में सारण की बड़ी उपलब्धि, 109% स्क्रीनिंग के साथ बिहार में आठवां स्थान

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ग्रामीण क्षेत्र में स्क्रीनिंग करते स्वास्थ्यकर्मी  | Prabhat Khabar

ग्रामीण क्षेत्र में स्क्रीनिंग करते स्वास्थ्यकर्मी | Prabhat Khabar

Saran News: टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत सारण जिले ने टीबी स्क्रीनिंग में 109% की शानदार उपलब्धि हासिल कर बिहार में 8वां स्थान प्राप्त किया है। ट्रूनेट और सीबीनेट जांच में भी जिले का प्रदर्शन सराहनीय रहा।

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सारण: टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत सारण जिले ने उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए टीबी स्क्रीनिंग में 109 प्रतिशत उपलब्धि हासिल की है. इस उपलब्धि के साथ जिले को पूरे बिहार में आठवां स्थान मिला है. वहीं ट्रूनेट और सीबीनेट जांच में सारण ने छठा स्थान प्राप्त किया है. स्वास्थ्य विभाग ने इसे अभियान की बड़ी सफलता बताया है.

13 दिनों में 3.35 लाख से अधिक लोगों की हुई स्क्रीनिंग

जिला संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. रत्नेश्वर प्रसाद सिंह ने बताया कि एक जुलाई से 13 जुलाई तक जिले में 3,35,676 लोगों की टीबी स्क्रीनिंग की गई. विभाग की ओर से 3,08,908 लोगों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसके मुकाबले सारण ने 109 प्रतिशत उपलब्धि हासिल की.

ट्रूनेट-सीबीनेट जांच में भी बेहतर प्रदर्शन

उन्होंने बताया कि ट्रूनेट और सीबीनेट जांच में जिले ने 1,459 जांच के साथ राज्य में छठा स्थान प्राप्त किया है. वहीं निक्षय मित्र श्रेणी में 333 पंजीकरण के साथ सातवां तथा करीब 5,000 एक्स-रे के साथ दसवां स्थान मिला है.

मुख्य सचिव की समीक्षा के बाद अभियान को मिली रफ्तार

डॉ. सिंह ने बताया कि दो जुलाई को बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने टीबी मुक्त भारत अभियान की समीक्षा की थी. इसके बाद जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने अभियान को और तेज गति से संचालित करने का निर्देश दिया था, जिसका सकारात्मक परिणाम सामने आया है.

टीबी मुक्त भारत अभियान का उद्देश्य

जिला संचारी रोग पदाधिकारी ने बताया कि अभियान का उद्देश्य समय पर टीबी मरीजों की पहचान करना, निःशुल्क जांच और उपचार उपलब्ध कराना, मरीजों को पोषण सहायता दिलाना तथा टीबी को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों और भेदभाव को समाप्त करना है.

स्वास्थ्यकर्मी निभा रहे अहम भूमिका

जिला यक्ष्मा विभाग के जिला कार्यक्रम समन्वयक हिमांशु शेखर ने बताया कि अभियान के तहत ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लगातार जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं. आशा कार्यकर्ता, एएनएम, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी और अन्य स्वास्थ्यकर्मी संभावित मरीजों की पहचान कर उनकी जांच सुनिश्चित करा रहे हैं. टीबी की पुष्टि होने पर मरीजों को सरकारी अस्पतालों में निःशुल्क दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं तथा पूरे उपचार के दौरान उनकी नियमित निगरानी भी की जाती है.

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