छपरा से पटना जाना हुआ महंगा, बढ़े किराये से परेशान दैनिक यात्री
Published by : YUVRAJ RATAN Updated At : 03 Jun 2026 4:00 PM
प्रतीकात्मक तस्वीर
Saran News : मंडियों में बढ़ी लागत, आने वाले दिनों में और महंगाई के संकेत
Saran News (प्रभात किरण हिमांशु) : पेट्रोल व डीजल की बढ़ती कीमतों का असर परिवहन व्यवस्थाओं के साथ आम दिनचर्या व रोजमर्रा से जुड़ी अन्य सामग्रियों की कीमतों पर साफ देखने को मिल रहा है. लोगों के लिए सफर करना महंगा हो रहा है. निजी सवारी गाड़ियों के यात्री किराए में 10 से 15 फीसदी तक की बढ़ोतरी देखी जा रही है. छपरा से पटना, रांची, कोलकाता, नयी दिल्ली, टाटा, बोकारो आदि जगहों तक जाने वाली लंबी दूरी की बसों का किराया गत एक सप्ताह में ही पांच फीसदी बढ़ गया है. इस अतिरिक्त किराये का बोझ अब आम जनता झेल रही है. छपरा से विभिन्न ग्रामीण इलाकों तक जाने वाली सवारी वाहनों के किराए में 15 से 20 फीसदी की बढ़ोतरी की गयी है. पेट्रोल डीजल की उपलब्धता पर संकट आने व कीमत बढ़ने के पहले छपरा से पटना जाने के लिए बस का किराया 130 से 150 रुपये तक लगता था. लेकिन यह किराया अब बढ़कर 140 से 160 रुपया हो गया है. दैनिक यात्रियों का कहना है कि छपरा से पटना के लिए डायरेक्टर पैसेंजर ट्रेन नहीं है. स्टेट ट्रांसपोर्ट की बसें भी कम हैं. जिससे मजबूरन अतिरिक्त किराया देकर पटना जाना पड़ रहा है. पटना ही नहीं छपरा से अन्य जगहों के लिए खुलने वाली बसों का किराया बढ़ गया है. जिससे आम जनता की जेब ढीली हो रही है.
यात्रियों से वसूला जा रहा मनमाना किराया
ग्रामीण क्षेत्रों में चलने वाली बसों का काफी बुरा हाल है. इन क्षेत्रों में यात्रा करने वाले लोगों को ड्राइवर और कंडक्टर के मनमानी का सामना करना पड़ रहा है. यह लोग आम यात्रियों से मनमाने ढंग से किराया वसूल रहे हैं. जिससे यात्रियों की परेशानी काफी बढ़ गयी है. मनमाने किराये को लेकर जब यात्री इनका विरोध करते हैं तो मनमानी करने वाले ड्राइवर उन्हें बस में भी नहीं चढ़ाते. यात्रियों की परेशानी के बाद भी ऐसी बसों पर अबतक कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है.
लोकल ट्रेनों की कमी से महंगा हुआ सफर, बढ़े रोडवेज किराये
रोडवेज किरायों के बढ़ने की एक वजह ट्रेनों का फुल फ्लेज मोड में न चलना है. रेलवे द्वारा कोरोना के समय कई लोकल ट्रेनों का परिचालन बंद कर दिया गया था. बाद में कुछ ट्रेनों को शुरू किया गया. लेकिन इसकी टाइमिंग सही नहीं है. ऐसे में लोकल यात्रा करने के लिए लोगों को भाड़े के वाहनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है. इसका फायदा उठाकर सवारी वाहनों ऑटो, जीप, बस द्वारा किराया बढ़ा दिया गया है. पहले लोकल पैसेंजर ट्रेनें अधिक चलती थी तो यात्री लोकल में आराम से 10 से 15 रुपये में अपने गंतव्य स्थान तक पहुंच जाते थे. लेकिन जब से लोकल ट्रेनें बन्द हुई हैं यात्रियों को अब एक जगह से दूसरे जगह जाने के लिए दो से तीन गुना किराया खर्च करना पड़ रहा है.
चावल और सरसों तेल के दाम बढ़े, बाजार में दिखने लगा महंगाई का असर
पेट्रोल डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी होने से ट्रांसपोर्टेशन भी मांगा हो गया है. दूसरे राज्यों से ट्रांसपोर्ट के माध्यम से जो समान छपरा की मंडियों में आ रहे हैं. उनकी कीमतों में पहले से 10 से 15 फीसदी बढ़ोतरी बतायी जा रही है. हालांकि अभी शहर के व्यवसायी संतुलित रेट व पुराने दर पर ही सामान बेच रहे हैं. लेकिन इन लोगों का कहना है आने वाले समय में कीमत में बढ़ोतरी हो सकती है. छपरा शहर के थोक मंडी में ब्रांडेड कंपनियों के चावलों की कीमत में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है. 10 दिन पहले तक सरकारी बाजार में उन्नत क्वालिटी की जो चावल 60 से 70 रुपये प्रति किलो की दर से मिल जाती थी. उसकी कीमत में दो से तीन रुपए बढ़ोतरी बतायी जा रही है. सरसों तेल की कीमत में भी इजाफा हुआ है. 170 से 180 रुपए प्रति लीटर मिलने वाले सरसों तेल के पैकेट की कीमत में भी पांच से 10 रुपये की बढ़ोतरी हुई है.
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